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Best hidden nature park : गर्मी की छुट्टियों में देवघर आने वाले पर्यटकों के लिए मात्र 20 रुपये में माधोपुर महावीर वाटिका इको पार्क सुकून और प्राकृतिक सुंदरता का बेहतरीन ठिकाना बन गया है.यहां परिवार के साथ हरियाली, बोटिंग और बच्चों के लिए खेल का आनंद लेकर लोग अपनी यात्रा को और यादगार बना रहे हैं.
देवघर : गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही लोग अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ घूमने-फिरने का प्लान बनाने लगते हैं. खासकर देवघर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इन दिनों काफी बढ़ जाती है. बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने के बाद लोग ऐसी जगह की तलाश करते हैं जहां परिवार के साथ कुछ सुकून भरा समय बिताया जा सके. अगर आप भी देवघर आ रहे हैं और दर्शन के बाद किसी खूबसूरत प्राकृतिक जगह को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो बिहार-झारखंड बॉर्डर पर स्थित माधोपुर महावीर वाटिका पार्क आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है.
यह इको पार्क अपनी हरियाली, प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण की वजह से लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यहां पहुंचते ही लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे प्रकृति की गोद में आ गए हों. चारों तरफ फैली हरियाली, ऊंचे-ऊंचे पेड़, ठंडी हवा और शांत माहौल लोगों को शहर की भागदौड़ और शोरगुल से दूर सुकून का एहसास कराता है. यही वजह है कि देवघर आने वाले पर्यटक अब इस पार्क को भी अपनी यात्रा का हिस्सा बना रहे हैं.
110 एकड़ में फैला यह इको पार्क
यह पार्क बिहार के जमुई जिला अंतर्गत चकाई प्रखंड के माधोपुर इलाके में स्थित है और झारखंड के देवघर जिला से सीमा से सटा हुआ है. यह पार्क देवघर से लगभग 25किलोमीटर की दुरी पर पड़ता है करीब 110 एकड़ में फैला यह इको पार्क प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं माना जाता. यहां हजारों प्रकार के औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जिनकी वजह से यह जगह और भी खास बन जाती है. पार्क में घूमते समय लोगों को अलग-अलग तरह के फल और फूलों के पौधे देखने को मिलते हैं, जो इसकी सुंदरता को और बढ़ा देते हैं.
सुबह और शाम के समय यहां का नजारा बेहद आकर्षक दिखाई देता है. ठंडी हवा और पक्षियों की आवाज लोगों को मानसिक शांति देती है. पार्क की खास बात यह भी है कि यहां देश का एकमात्र कल्पवृक्ष गार्डन बनाया गया है, जहां कल्पवृक्ष के करीब 277 पौधे लगाए गए हैं. इसके अलावा यहां लंका की प्रसिद्ध अशोक वाटिका और मां जानकी की कुटिया भी बनाई गई है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से लोगों को आकर्षित करती है. यहां लगभग 1100 अशोक के पौधे लगाए गए हैं, जिनमें लाल और गुलाबी रंग के सुंदर फूल खिलते हैं. यह नजारा लोगों को काफी पसंद आता है और यहां आने वाले पर्यटक फोटो और वीडियो बनाकर अपनी यादों को खास बनाते हैं.
क्या कहते है पर्यटक
देवघर के रहने वाले शैलेश कुमार ने बताया कि वे कई बार वीकेंड पर अपने परिवार के साथ माधोपुर महावीर वाटिका घूमने आते हैं. उनका कहना है कि यह जगह इतनी शांत और सुंदर है कि यहां आकर मन को काफी सुकून मिलता है. शैलेश कुमार ने बताया कि जब भी उनके घर में कोई मेहमान आता है, तो वे देवघर दर्शन के साथ-साथ उन्हें इस इको पार्क में जरूर लेकर आते हैं, ताकि वे यहां की हरियाली, प्राकृतिक नजारा और मनोरम वातावरण का आनंद ले सकें और उनकी यात्रा यादगार बन सके.
प्रवेश शुल्क मात्र 20 रूपए
मनोरंजन के लिहाज से भी यह पार्क लोगों को निराश नहीं करता. यहां परिवार और दोस्तों के साथ बोटिंग का मजा लिया जा सकता है. पानी के बीच बोटिंग करते समय आसपास का प्राकृतिक नजारा लोगों के रोमांच को दोगुना कर देता है. बच्चों के खेलने के लिए यहां अलग से चिल्ड्रेन पार्क बनाया गया है, जहां बच्चे झूले और कई खेलों का आनंद लेते हैं. वहीं पूरा पार्क काफी बड़ा होने की वजह से यहां बैटरी चालित वाहन की सुविधा भी दी गई है. इस वाहन में एक साथ सात लोग बैठकर पूरे पार्क का आराम से भ्रमण कर सकते हैं.
इसकी टिकट करीब 100 रुपये रखी गई है, जिससे परिवार के लोग आसानी से पूरे पार्क का आनंद ले सकते हैं. वहीं प्रवेश शुल्क मात्र 20 रुपये प्रति व्यक्ति है, जिससे कम बजट में भी लोग यहां शानदार समय बिता सकते हैं. पार्क का साफ-सुथरा वातावरण और प्राकृतिक खूबसूरती लोगों को बार-बार यहां आने के लिए मजबूर कर देती है. हालांकि यहां आने से पहले यह जरूर ध्यान रखें कि यह पार्क हर गुरुवार को बंद रहता है. अगर आप इस गर्मी की छुट्टी में देवघर घूमने आ रहे हैं, तो बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद माधोपुर महावीर वाटिका का आनंद लेना बिल्कुल न भूलें, क्योंकि यह जगह आपके सफर को यादगार बना सकती है.
About the Author
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें





