बंगाल के लिए ऑनलाइन जंग और आयोग की ‘लिपिकीय त्रुटि’


‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए, तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल के प्रमुख देबांग्शु भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी मुख्य रणनीति लोगों को यह समझाना है कि बीजेपी झूठ फैला रही है। यह ‘जैसे को तैसा’ वाली बात हैः जब भी बीजेपी का आईटी सेल बंगाल की किसी बात का मजाक उड़ाता है, तो तृणमूल यूपी और गुजरात-जैसे बीजेपी-शासित राज्यों की असलियत सामने रख देती है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने अभी 23 मार्च को ही खबर दी है कि टीएमसी के सोशल मीडिया इकोसिस्टम ने 10,000 से ज्यादा रील्स और छोटे वीडियो बनाए हैं, जिन्हें पार्टी से जुड़े आधिकारिक चैनलों, वॉलंटियर नेटवर्क और स्वतंत्र इन्फ्लुएंसर्स के जरिये अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैलाया गया है। आई-पैक के पूर्व सदस्य आनंद चौरसिया ने इन पंक्तियों के लेखक को बताया कि टीएमसी आईटी सेल को छोटे वीडियो, रील्स, मीम्स और ग्राफिक्स के जरिये रोजाना की कहानी को आकार देने का काम सौंपा गया है।

कंसल्टेंट ऋधि प्रोतिम नियोगी का कहना है कि ‘बीजेपी का आईटी सेल अब भी ज्यादातर केन्द्रीय निर्देशों और आम मैसेजिंग पर ही निर्भर रहता है; स्थानीय पार्टी मशीनरी और बूथ-स्तर के फीडबैक लूप के साथ इसका तालमेल उतना अच्छा नहीं है। आई-पैक और टीएमसी के आईटी सेल ने वोटर-स्तर के डेटा और जमीनी कार्यकर्ताओं, बूथ-स्तर के एजेंटों, फील्ड टीमों और ‘दीदी के बोलो’ (दीदी को बताओ) हेल्पलाइन के बीच एक ज्यादा आसान और सीधा जुड़ाव बनाया है, जिससे अभियान में बदलाव करने के लिए रियल-टाइम जानकारी मिलती रहती है।’

किस आईटी सेल की जीत होगी, यह जानने के लिए हमें मतगणना के दिन 4 मई तक इंतजार करना होगा।



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