बच्चे दिन-ब-दिन क्यों हो रहे हैं कमजोर? कहीं शरीर में छिपी ये कमी तो नहीं बना रही वजह


बच्चों का स्वस्थ, एक्टिव और खुश रहना हर माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है. लेकिन कई बार शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी, खासकर आयरन की कमी, बच्चों के विकास को प्रभावित कर सकती है. नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, 2 साल से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया की समस्या मस्तिष्क के विकास, सीखने की क्षमता और सामान्य ग्रोथ पर असर डाल सकती है. इसलिए बचपन से ही सही और संतुलित आहार देना बेहद जरूरी माना जाता है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर बच्चे को शुरुआती उम्र से ही पूरा पोषण मिले, तो उसका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से होता है. इसके विपरीत, जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो बच्चा अक्सर थका हुआ, कमजोर और कम एक्टिव दिखाई देता है. लंबे समय तक यह कमी बनी रहने पर इसका असर बच्चे की याददाश्त, समझने की क्षमता और पढ़ाई में ध्यान लगाने की क्षमता पर भी पड़ सकता है.

नेशनल हेल्थ मिशन ने बच्चों में एनीमिया से बचाव के लिए रोजमर्रा के भोजन में आयरन से भरपूर चीजें शामिल करने की सलाह दी है. इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना, गुड़, अनार और खजूर जैसे फूड शामिल हैं, जो शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं. इसके साथ ही विटामिन-सी युक्त फल जैसे संतरा, आंवला और नींबू भी काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि ये शरीर को आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे को छह महीने की उम्र के बाद धीरे-धीरे ठोस और पौष्टिक आहार देना शुरू कर देना चाहिए. इस दौरान मां के दूध के साथ-साथ सही पूरक भोजन देना बच्चे की ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी होता है. सही डाइट से न केवल बच्चे की ताकत बढ़ती है, बल्कि उसकी इम्युनिटी भी मजबूत होती है, जिससे वह बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है.

इसके अलावा, NHM यह भी सुझाव देता है कि 6 से 59 महीने तक के बच्चों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार आयरन और फोलिक एसिड (IFA) सिरप भी दिया जाना चाहिए. यह सप्लीमेंट शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है और एनीमिया जैसी समस्या से बचाव करता है. हालांकि, इसे हमेशा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही देना चाहिए.

कुल मिलाकर, बच्चों की सेहत का आधार उनका रोजाना का खानपान होता है. अगर शुरुआत से ही सही पोषण, संतुलित डाइट और नियमित देखभाल पर ध्यान दिया जाए, तो बच्चों को एनीमिया जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचाया जा सकता है और उनका विकास बेहतर तरीके से हो सकता है.



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