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Danger Of Wrong Blood Transfusion: अगर किसी मरीज को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान गलत ब्लड टाइप मिल जाए, तो इसके नतीजे बहुत बुरे हो सकते हैं. कई बार इससे ऑर्गन फेलियर से लेकर जान जाने तक का भी खतरा होता है. यहां आप हेल्थ एक्सपर्ट से इसके साइड इफेक्ट्स को समझ सकते हैं.
राजस्थान के पाली स्थित बांगड़ अस्पताल से एक गंभीर मामला सामने आया है. यहां एक बच्ची को गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ा दिया गया. परिजनों का आरोप है कि O+ की जगह B+ ब्लड चढ़ा दिया गया, जिससे बच्ची की हालत बिगड़ गई और अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ. बच्ची को अभी ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. लेकिन गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने से क्या होता है? इसके खतरे को समझने के लिए हमने फरीदाबाद सेक्टर 88
स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इंटर्नल मेडिसिन एंड रुमेटोलॉजी के सीनियर डायरेक्टर डॉ.जयंता ठाकुरिया से बात की.
एक्सपर्ट ने बताया कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी होता है कि मरीज को सही ब्लड ग्रुप का खून ही चढ़ाया जाए. अगर गलती से गलत ब्लड ग्रुप का खून दे दिया जाए, तो शरीर में गंभीर और कभी-कभी जानलेवा रिएक्शन हो सकते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर का इम्यून सिस्टम गलत ब्लड को बाहरी और नुकसान पहुंचाने वाला मानकर उस पर हमला करने लगता है.
O+ की जगह B+ ब्लड चढ़ाने के नुकसान
अगर किसी मरीज को O+ ब्लड की जरूरत है लेकिन उसे गलती से B+ ब्लड चढ़ा दिया जाए, तो शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है. O+ ब्लड वाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज B+ ब्लड की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला करती हैं और उन्हें तेजी से नष्ट करने लगती हैं. इस प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में “एक्यूट हेमोलिटिक रिएक्शन” कहा जाता है.
यह प्रतिक्रिया अक्सर ब्लड चढ़ाने के कुछ ही मिनटों के अंदर शुरू हो सकती है. मरीज को तेज बुखार, कंपकंपी, सीने या फेफड़ों में दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, जी मिचलाना और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. कुछ मामलों में पेशाब का रंग गहरा हो सकता है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने का संकेत होता है. अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाए, तो किडनी फेल होने या शरीर को शॉक लगने का खतरा भी हो सकता है.
आमतौर पर O+ ब्लड ग्रुप वाले लोग दूसरे पॉजिटिव ब्लड ग्रुप से खून ले सकते हैं, लेकिन सही मिलान होना बेहद जरूरी है. यदि O+ मरीज को B+ ब्लड दिया जाता है, तो शरीर में मौजूद Anti-B एंटीबॉडीज तुरंत B+ डोनर ब्लड के खिलाफ प्रतिक्रिया शुरू कर देती हैं. इससे शरीर में गंभीर इम्यून रिएक्शन हो सकता है.
नुकसान से बचाव के उपाय
ऐसी गलती होने पर तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूजन रोकना जरूरी होता है. इसके बाद मरीज की हालत पर लगातार नजर रखी जाती है. मरीज को ऑक्सीजन, नसों के जरिए फ्लूड और जरूरत पड़ने पर दूसरी दवाएं दी जाती हैं ताकि शरीर को स्थिर रखा जा सके. डॉक्टर खासतौर पर किडनी को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि गलत ब्लड का असर सबसे पहले किडनी पर पड़ सकता है.
इन नियमों का पालन करना जरूरी
हर बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन करने से पहले, अस्पतालों में सुरक्षा से जुड़े कुछ सख्त नियम अपनाए जाते हैं, जैसे- ब्लड टाइप की जांच करना, मरीज और डोनर के ब्लड टाइप का मिलान करना, और किसी भी तरह की गलती से बचने के लिए डोनर की पहचान की दोबारा जांच करनाय. कोई भी छोटी सी गलती बहुत खतरनाक हो सकती है, और इसी वजह से, खून चढ़ाते समय डॉक्टर और नर्स दोनों ही बहुत ज्यादा सावधानी बरतते हैं.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.





