बॉडी को फ्रिज बना देगा पहाड़ों का ये नन्हा फल, गर्मी का दुश्मन, डिहाइड्रेशन चुटकियों में छूमंतर


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Hisalu benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों में मिलने वाला हिसालू सेहत के लिए वरदान से कम नहीं. मई-जून में झाड़ियों पर लगने वाला ये छोटा पीले रंग का फल स्वाद में खट्टा-मीठा और बेहद रसदार होता है. इसका सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है. हिसालू की मांग हर साल बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. यह फल बेहद जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे दूर के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल होता है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्मियों में मौसमी और प्राकृतिक फलों के सेवन को बेहद जरूरी मानते हैं. हिसालू जैसे जंगली फल शरीर को पोषण देने के साथ कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करते हैं. इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक है. इसका सेवन शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में भी मदद करता है. पहाड़ों में लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में खाते आ रहे हैं. प्राकृतिक फलों का सेवन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है. हिसालू स्वादिष्ट होने के साथ शरीर को ताजगी और ऊर्जा भी देता है. गर्मियों में इसे सेहत का खजाना माना जाता है.

Hisalu lives in folk songs and culture

उत्तराखंड की लोक संस्कृति में हिसालू का विशेष महत्व है. पहाड़ों के कई लोकगीतों और पारंपरिक कहानियों में इस फल का जिक्र मिलता है. ग्रामीण इलाकों में हिसालू को बचपन और प्रकृति से जुड़ी यादों का प्रतीक माना जाता है. गर्मियों के मौसम में बच्चे जंगलों में जाकर हिसालू तोड़ते हैं, परिवार के साथ इसका आनंद लेते हैं. पहले समय में लोग जंगल से लौटते वक्त हिसालू जरूर लेकर आते थे. यह फल पहाड़ की जीवनशैली और प्राकृतिक खानपान का हिस्सा रहा है. आज भी गांवों में हिसालू का इंतजार गर्मियों के खास मौसम की तरह किया जाता है. लोगों का मानना है कि यह फल केवल स्वाद नहीं, बल्कि पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है.

Less in the market but more choice of people

हिसालू की मांग हर साल बढ़ रही है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. यह फल बेहद जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे दूर के बाजारों तक पहुंचाना मुश्किल है. कई स्थानीय लोग इसे छोटे स्तर पर बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाते हैं. गर्मियों में सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में हिसालू बेचते ग्रामीण आसानी से दिखाई देते हैं. पर्यटक भी इस पारंपरिक पहाड़ी फल का स्वाद लेना पसंद करते हैं. यदि इसके संरक्षण और पैकेजिंग पर काम किया जाए तो यह पहाड़ के किसानों और ग्रामीणों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन सकता है. पहाड़ की पहचान बन चुका हिसालू अब धीरे-धीरे दूसरे क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हो रहा है.

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Excellent source of natural energy

हिसालू को पहाड़ों में प्राकृतिक ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है. जंगलों और खेतों में काम करने वाले लोग थकान मिटाने के लिए हिसालू खाते हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा और पोषक तत्व शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करते हैं. गर्मियों में अधिक पसीना आने से शरीर कमजोर महसूस करता है, ऐसे में हिसालू राहत देने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को स्वस्थ रखने में मददगार होते हैं. यह फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे बिना किसी प्रसंस्करण के सीधे खाते हैं, जिससे इसके प्राकृतिक गुण बरकरार रहते हैं.

Hisalu fruit is very delicate

हिसालू बेहद नाजुक होता है. जंगल से तोड़ने के कुछ घंटों बाद ही यह खराब होने लगता है, इसलिए इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना आसान नहीं होता है. यही वजह है कि यह फल बाजारों में कम दिखाई देता है, ज्यादातर स्थानीय क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है. ग्रामीण लोग सुबह के समय ताजा हिसालू तोड़कर सीधे सेवन करते हैं. इसका स्वाद ताजा रहने पर सबसे ज्यादा अच्छा माना जाता है. कई जगहों पर लोग इसका जूस और चटनी भी बनाते हैं. पहाड़ों में बच्चों के लिए हिसालू केवल फल नहीं, बल्कि गर्मियों की खास याद माना जाता है. इस पारंपरिक फल को पहचान मिले और इसके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाए.

Helps in keeping the body cool

भीषण गर्मी के दौरान हिसालू शरीर को ठंडा रखने में काफी मददगार है. पहाड़ों में रहने वाले लोग इसे प्राकृतिक कूलिंग फल के रूप में जानते हैं. यह फल रसदार होने के कारण शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में सहायक है. जंगल में काम करने वाले लोग गर्मी से राहत पाने के लिए हिसालू खाते हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की थकान कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है, इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता है. डॉक्टर भी गर्मियों में मौसमी और प्राकृतिक फलों के सेवन की सलाह देते हैं.

Rich in vitamins and antioxidants

बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल लोकल 18 से बताते हैं कि हिसालू पोषक तत्वों से भरपूर फल है. इसमें विटामिन-सी, आयरन, फाइबर और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में हिसालू खाने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है. गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने लगती है, ऐसे में हिसालू शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा और पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं.

Hisalu is a special wild fruit of the mountains

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला हिसालू इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. स्थानीय लोग इसे बचपन की यादों और पहाड़ की पारंपरिक पहचान से जोड़कर देखते हैं. हिसालू को वैज्ञानिक भाषा में रुबस एलिप्टिकस कहा जाता है, जो गुलाब परिवार का पौधा माना जाता है. यह फल प्राकृतिक रूप से पहाड़ों में उगता है, बिना किसी रासायनिक खाद के तैयार होता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे और महिलाएं जंगलों से हिसालू तोड़कर घर लाते हैं. गर्मियों में यह फल शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा बनाए रखने में काफी मददगार माना जाता है.

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