रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि हर चार में से तीन अफगान अपनी बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। लगभग 50 लाख लोग भूख के आपातकालीन स्तर का सामना कर रहे हैं, और कुपोषण तथा स्वास्थ्य सेवाओं के पूरी तरह ठप हो जाने के कारण बच्चों की मौतें भी बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बेरोजगारी अपने चरम पर है, स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह जूझ रही हैं, और वह मदद, जो कभी लाखों लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी करती थी, अब घटकर पहले के मुकाबले बहुत ही कम रह गई है।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन के आंकड़ों के अनुसार, हर चार में से तीन अफगान अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। माता-पिता का कहना है कि भुखमरी से बचने का उनके पास बच्चों को बेचने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है। एक परेशान पिता ने अपने दो बच्चों – सात साल की जुड़वां बेटियों, रोकिया और रोहिला का परिचय कराते हुए ब्रिटिश पब्लिक ब्रॉडकास्टर को बताया कि वह इतने गरीब, कर्ज में डूबे और बेबस हो चुके हैं कि अपनी बेटियों को बेचने के लिए भी तैयार हैं।





