पश्चिम एशिया जंग से कांग्रेस में दो फाड़, राहुल गांधी से अलग हुई आनंद शर्मा की राह, PM मोदी की कूटनीति की तारीफ


होमताजा खबरदेश

पश्चिम एशिया जंग से कांग्रेस में दो फाड़, राहुल से अलग हुई आनंद शर्मा की राह

Last Updated:

कांग्रेस नेता ने राजनीति से ऊपर उठकर बात करने की अपील की है. आनंद शर्मा ने कहा, ‘भारत की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय एकता के साथ होनी चाहिए’. सरकार ने सभी राजनीतिक दलों की बहुत अहम मीटिंग बुलाई है. यह बातचीत देशहित में आगे भी लगातार जारी रहनी चाहिए.

ख़बरें फटाफट

Zoom

आनंद शर्मा ने पीएम मोदी की कूटनीति की तारीफ कर कांग्रेस के मतभेद जाहिर कर दिए हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान से अलग राय रखते हुए पश्चिम एशिया संकट में भारत की कूटनीति की तारीफ की है. आनंद शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कई पोस्ट करते हुए पश्चिम एशिया संकट पर राय रखी. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और उसके जवाब में ईरान की कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति बहुत गंभीर हो गई है. इससे पूरी दुनिया में अस्थिरता और आर्थिक संकट पैदा हो गया है. भारत सहित वे सभी देश जो कच्चा तेल, गैस और एलपीजी के लिए मध्य-पूर्व और खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पर खतरा है.

आनंद शर्मा ने आगे कहा, “हम इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में से एक का सामना कर रहे हैं. यह मुश्किल समय हमारी नीतियों और कूटनीति दोनों की परीक्षा ले रहा है. भारत के खाड़ी देशों के साथ पुराने संबंध हैं और ईरान के साथ सांस्कृतिक रिश्ते भी हैं. तेल और गैस के अलावा, लगभग 200 अरब डॉलर का व्यापार, 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और विदेश से आने वाली लगभग 60 प्रतिशत कमाई (रेमिटेंस) भी ध्यान में रखना जरूरी है. इस संकट में भारत की कूटनीति समझदारी और संतुलन से भरी रही है, जिससे बड़े खतरों से बचाव हुआ है. भारत की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय एकता और सहमति के साथ होनी चाहिए. सरकार ने सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाकर उन्हें स्थिति और फैसलों की जानकारी दी है. यह बातचीत जारी रहनी चाहिए. इस समय देशहित में एकजुट और समझदारी भरा रवैया बहुत जरूरी है.”

उन्होंने आगे लिखा कि इस युद्ध ने ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा की समस्याओं को और बढ़ा दिया है. सप्लाई चेन में रुकावट, बाजारों में गिरावट और रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियां सामने हैं, जिनका तुरंत और लंबे समय तक समाधान करना होगा. इस संकट की गंभीरता को समझना जरूरी है. दुनिया चुप नहीं रह सकती जब वैश्विक व्यवस्था और नियम टूट रहे हों. भारत हमेशा शांति और नैतिकता के लिए जाना जाता है. आज बहुत कुछ दांव पर लगा है, खासकर युवाओं का भविष्य. भारत को कोशिश करनी चाहिए कि वह ग्लोबल साउथ और अपने साझेदार देशों को साथ लेकर शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए काम करे.

About the Author

authorimg

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img