Junglee Jalebi: जंगलों और ग्रामीण इलाकों में एक ऐसा पेड़ मिलता है, जिसकी फलियां देखकर पहली नजर में कोई भी चौंक जाए. गोल-गोल कुंडली बनाकर मुड़ी हुई ये फलियां बिल्कुल बाजार की जलेबी जैसी दिखाई देती हैं. इसी वजह से गांव के लोग इसे प्यार से ‘जंगली जलेबी’ कहते हैं. यह कोई मिठाई नहीं, बल्कि एक फल है, जिसे बच्चे से लेकर बड़े तक चाव से खाते हैं. हल्का मीठा और थोड़ा खट्टापन लिए इसका स्वाद लोगों को बार-बार इसे तोड़कर खाने पर मजबूर कर देता है.
इस पेड़ का वैज्ञानिक नाम Pithecellobium dulce है. कई जगह इसे मद्रास थॉर्न या मनीला इमली भी कहा जाता है. मध्य प्रदेाश में शिवपुरी के जंगली हिस्सों, चरागाहों और गांव के किनारों पर यह पेड़ कहीं-कहीं नजर आ जाता है. जो लोग इसे पहचानते हैं, वह दूर से ही इसकी जलेबी जैसी फलियों को देखकर तोड़ने का जुगाड़ करने लगते हैं.
15-20 मीटर तक ऊंचा पेड़
जंगली जलेबी का पेड़ काफी ऊंचा और फैला हुआ होता है. यह करीब 15 से 20 मीटर तक बढ़ जाता है. इसकी डालियों पर छोटे-छोटे कांटे होते हैं. पत्तियां घनी होती हैं, जिससे पेड़ दूर से हरा-भरा दिखाई देता है. मौसम आने पर इसमें हल्के सफेद-हरे रंग के फूल लगते हैं. बाद में यही फूल मुड़कर लाल-भूरे रंग की कुंडलीदार फली का रूप ले लेते हैं. हर फली के अंदर सफेद, मुलायम गूदा होता है. इसी गूदे को लोग खाते हैं. कुछ लोग बीज अलग करके सिर्फ गूदा चूसते हैं, तो कुछ लोग बीज समेत चबा लेते हैं.
बचपन की यादों से जुड़ा फल
ग्रामीण बताते हैं कि पहले जब बच्चे मवेशी चराने या लकड़ी बीनने जंगल जाते थे, तो जंगली जलेबी तोड़कर खाना एक आम बात थी. कई बार बच्चे पेड़ पर चढ़कर सीधे डाल से फलियां तोड़ते और वहीं बैठकर खाते थे. इसका स्वाद इतना अलग होता है कि जिसने एक बार खा लिया, वह इसे भूल नहीं पाता. आज भी गांव के बच्चे इस पेड़ को ढूंढ लेते हैं और जलेबी जैसी फलियां देखकर खुश हो जाते हैं.
स्वाद के साथ पोषक तत्वों का खजाना
जानकारों के अनुसार जंगली जलेबी की फलियों में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें आहार फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और विटामिन-सी अच्छी मात्रा में होते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण इसे सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा मानते हैं. इसका गूदा हल्का मीठा-खट्टा होता है, जो पाचन को बेहतर करने में मददगार माना जाता है. कई लोग इसे ऐसे ही खाते हैं, तो कुछ लोग इसका गूदा निकालकर पानी या नींबू पानी में मिलाकर पीते हैं.
पेट की दिक्कतों में देसी सहारा
गांवों में मान्यता है कि अगर पेट खराब हो, हल्के दस्त हों या अपच की समस्या हो, तो जंगली जलेबी का गूदा फायदेमंद रहता है. बुजुर्ग बताते हैं कि पहले दवा के बजाय लोग ऐसे ही फलों और जड़ी-बूटियों पर भरोसा करते थे. जंगली जलेबी भी उन्हीं में से एक मानी जाती है. मुंह के छाले या मसूड़ों की कमजोरी में भी कुछ लोग इसका सेवन करते हैं. हालांकि, इसे दवा की तरह नहीं, बल्कि घरेलू खान-पान का हिस्सा मानकर ही खाया जाता है.
वजन संतुलन और भूख पर असर
जंगली जलेबी में फाइबर की मात्रा अच्छी होने की बात कही जाती है. ग्रामीणों का मानना है कि इसे खाने से देर तक भूख नहीं लगती और पेट भरा-भरा महसूस होता है. यही वजह है कि जंगल में काम करने वाले लोग इसे साथ में तोड़कर रख लेते हैं और समय-समय पर खाते रहते हैं.
शरीर की ताकत और रोग प्रतिरोधक क्षमता
इस फल में मौजूद विटामिन-सी और खनिज तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं. कुछ लोग इसे बदलते मौसम में खाना अच्छा मानते हैं. हड्डियों और दांतों के लिए भी इसे लाभकारी बताया जाता है, क्योंकि इसमें कैल्शियम और फॉस्फोरस पाए जाते हैं.
जंगल में मिलती है ‘प्राकृतिक जलेबी’
जंगली जलेबी आपको बाजार में शायद ही देखने को मिले. यह पूरी तरह जंगल और ग्रामीण इलाकों का फल है. जो लोग इसे पहचानते हैं, वही इसे ढूंढ पाते हैं. बाकी लोगों के लिए यह किसी रहस्य से कम नहीं.
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