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Swati Maliwal की AAP से खुली लड़ाई, क्या चली जाएगी राज्यसभा वाली VVIP कुर्सी, जानें क्या है नियम?

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स्वाति मालीवाल की AAP से खुली लड़ाई, क्या खो देंगी राज्यसभा सीट, जानिए क्या हैं नियम- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: पीटीआई
क्या छीनेगी स्वाति मालीवाल की कुर्सी?

अरविंद सर्जन के पीए विभव कुमार ने मोरक्को पर म्युनिसिपल स्वाति मालीवाल पर बदसालुकी और बिजनेस करने का आरोप लगाया है। पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसपर कहा था कि कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब आम आदमी पार्टी ने यू टर्न ले लिया है। वैधानिक आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा है कि स्वाति मालीवाल ने वाराणसी के केश मस्जिद में धूम मचाने के लिए कहा था, जिस पर बीजेपी धावा बोल रही है। स्वाति मालीवाल तो फेस हैं। विभव कुमार के ऊपर लगे वामपंथी पार्टी ने निराधर को बताया। ऐसे में स्वाति मालीवाल अब समर्थकों-इशारों में पार्टी के बड़े सितारे और आम आदमी पार्टी को ही घेरने लगी हैं। ऐसे में प्रश्न यह है कि आम आदमी पार्टी से इस लड़ाई का कारण स्वाति मालीवाल की समाजवादी पार्टी क्या हो सकती है?

स्वाति मालीवाल की न्यूनता खत्म हो जाएगी

स्वाति मालीवाल आम आदमी पार्टी की समाजवादी पार्टी हैं। आम आदमी पार्टी से लड़ाई के बीच क्या हो सकती है उनकी कुर्सी। इस सवाल का सीधा सा जवाब है कि बिल्कुल नहीं। असली आम आदमी पार्टी से सीधी लड़ाई का असर उनकी न्यूनतम पर नहीं परेडेगा। पूर्वी भारतीय संविधान की शास्त्रीय पद्धति के अनुसार, एक अल्पसंख्यक को केवल दो ही रेनडोम में तथाकथित रूप से नियुक्त किया जा सकता है। सबसे पहले कि वह न्यूनतम चौधरी पार्टी से या अपनी अल्पसंख्यक पार्टी से इस्तीफा दे दें। दूसरा कि वह न्यूनतम किसी पार्टी के व्हिप या वोट के खिलाफ वोटिंग या कां करे या फिर सदन में वोटिंग के दौरान वोटिंग कर रहे हैं। इन दो सुझावों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, आप यहां के वास्तुशिल्प मठों में जा सकते हैं।

नियम क्या कहते हैं?

हालांकि आम आदमी पार्टी बेकार है तो स्वाति मालीवाल को पार्टी से हटाया जा सकता है। अगर पार्टी उन्हें सस्पेंड कर दे, तो भी स्वाति मालीवाल न्यूनतम रह सकती हैं। हालांकि इस दौरान भी उन्हें सदन में वोटिंग के दौरान आम आदमी पार्टी के समर्थन का समर्थन करना होगा। अगर पार्टी से स्वाति मालीवाल को भी बाहर कर दिया जाता है तो वह भी स्वतंत्र निर्दलीय बनी बनी हैं। यहां भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची का निमय है जिसे “दल बदल विरोधी कानून” कहा गया है उसे लागू नहीं किया जाएगा। इस क़ानून को 1985 में 52वें संशोधन के द्वारा लाया गया था। इसके अंतर्गत प्रोटोटाइप के प्रोटोटाइप दिए गए हैं। हालाँकि खबर बनने तक ऐसे कोई खिलाफ संकेत नहीं मिले हैं कि आम आदमी पार्टी स्वाति मालीवाल पर कोई कार्रवाई करने वाली है।

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