क्या कभी खत्म हो पाएगा कोरोना वायरस? नए वेरिएंट के बाद फिर उठा सवाल, क्या कहते हैं एक्सपर्ट


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Covid New Variant BA.3.2 News: इस वक्त दुनिया के 23 देशों में कोरोना का नया वेरिएंट सिकाडा तेजी से फैल रहा है. यूएस समेत कई देशों में इसके मरीज रिपोर्ट किए गए हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो इस वेरिएंट के 70 से 75 म्यूटेशन हैं, जिसकी वजह से यह बेहद संक्रामक है और यह मौजूदा वैक्सीन को भी चकमा दे सकता है. कोरोना वायरस पिछले करीब 7 साल से लोगों को संक्रमित कर रहा है. पहले की तुलना में अब यह स्थानीय बीमारी बन गया है, लेकिन अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

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कोरोना वायरस पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है, लेकिन अब यह एंडेमिक बन रह गया है.

Coronavirus New Variant Cicada: करीब 7 साल पहले चीन के वुहान से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी. धीरे-धीरे यह दुनिया के सभी देशों में फैल गया था और करोड़ों लोग इसकी चपेट में आए थे. कोरोना संक्रमण के कारण लाखों की तादाद में लोगों की मौत हुई थी. शुरुआत में कोविड ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया, लेकिन कुछ सालों बाद वैज्ञानिकों ने वैक्सीन डेवलप कर ली और कोरोना पर काबू पाने में कामयाबी हासिल की. कोरोना अब पहले की तुलना में काफी सिमट गया है, लेकिन समय-समय पर इसके नए वेरिएंट लोगों को संक्रमित कर रहे हैं. पिछले कुछ सप्ताह में कोविड का नया वेरिएंट BA.3.2 अमेरिका समेत कई देशों में तेजी से फैल रहा है. इसे वैज्ञानिकों ने सिकाडा नाम दिया है. यह वेरिएंट भी 23 देशों में फैल चुका है. इससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या कभी कोरोना वायरस पूरी तरह खत्म हो पाएगा? इस बारे में एक्सपर्ट्स की राय जान लेते हैं.

नई दिल्‍ली स्थित डॉक्टर अंबेडकर सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च के डायरेक्‍टर और वायरोलॉजिस्ट डॉ. सुनीत के सिंह ने News18 को बताया कि SARS-CoV-2 वायरस का पूरी तरह से खत्म होना लगभग असंभव है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि यह वायरस केवल इंसानों तक सीमित नहीं है. अब कोरोना वायरस जानवरों में भी घर बना चुका है. अगर इंसानों से यह खत्म भी हो जाए, तो जानवरों के जरिए यह वापस लौट सकता है. ऐसे में अब यह पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन सर्दी-जुकाम की तरह समय-समय पर संक्रमण फैलाता रहेगा और इसके नए वेरिएंट सामने आते रहेंगे.

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डॉक्टर सुनीत ने बताया कि अब कोरोना वायरस महामारी से बदलकर एंडेमिक चरण में प्रवेश कर चुका है. इसका मतलब है कि वायरस हमारे बीच हमेशा मौजूद रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे मौसमी इन्फ्लुएंजा या सामान्य सर्दी-जुकाम. यह अब अचानक आने वाली वैश्विक तबाही के बजाय एक अनुमानित क्षेत्रीय बीमारी बन गई है, जिसके केस समय-समय पर बढ़ते और घटते रहेंगे. नए सब-वेरिएंट सिकाडा में भी ऐसे म्यूटेशन देखे गए हैं. भले ही नए वेरिएंट्स तेजी से फैल रहे हैं, लेकिन वैक्सीनेशन के कारण अब सीवियरिटी और मौतों में भारी कमी आई है. भविष्य में हमें मास्क, वेंटिलेशन और स्वच्छता जैसी बुनियादी आदतों को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाए रखना होगा, ताकि नए वेरिएंट से संक्रमण का खतरा कम से कम रहे.

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल का कहना है कि शुरुआत में माना जा रहा था कि हर्ड इम्यूनिटी से कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा, लेकिन अब यह धारणा बदल चुकी है. वायरस बार-बार अपना स्वरूप बदल रहा है और वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा समय के साथ कम होती है, इसलिए हर्ड इम्यूनिटी स्थायी समाधान नहीं रही. इसके बजाय अब हाइब्रिड इम्यूनिटी यानी वैक्सीन और नेचुरल इम्यूनिटी शरीर को वायरस के गंभीर हमलों से बचाने के लिए तैयार रखती है. बेहतर सर्विलांस, अपडेटेड बूस्टर डोज और एंटीवायरल दवाओं की उपलब्धता ने हमें इस वायरस के साथ जीने में सक्षम बना दिया है. लोग धीरे-धीरे इसके अनुकूल जीवन जिएंगे और वातावरण में यह वायरस बना रहेगा.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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