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अमेरिका ने ईरान के 6 वरिष्ठ नेताओं पर 1 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया है. इनमें खुफिया, सैन्य और राजनीतिक तंत्र के अहम चेहरे शामिल हैं. दो नेताओं की हाल में मौत हो चुकी है, जबकि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के उभार के बीच यह कदम उठाया गया है.
मोजतबा खामेनेई.
जेफरसन सिटी: ट्रंप सरकार ने 15 मार्च, 2026 को ईरान की सत्ता से जुड़े छह वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर एक करोड़ डॉलर (लगभग 92 करोड़ रुपये) का इनाम घोषित किया है. इस सूची में शामिल दो नेताओं की हाल ही में इजराइली हमलों में मौत हो गई है, लेकिन ईरान के प्रभावशाली सत्ता तंत्र की पूरी तस्वीर दिखाने के लिए उनके नाम भी इसमें रखे गए हैं. ये नेता इस्लामी गणराज्य की धार्मिक, खुफिया और सुरक्षा संस्थाओं के मुख्य स्तंभ माने जाते हैं. ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की फरवरी 2026 में अमेरिका-इजराइल हमले में मौत के बाद उनके बेटे सैयद मुजतबा खामेनेई को मार्च की शुरुआत में नया सर्वोच्च नेता चुना गया.
मोजतबा खामेनेई कौन हैं?
56 साल के सैयद मुजतबा खामेनेई लंबे समय से सत्ता में प्रभावशाली माने जाते रहे हैं और सुरक्षा व खुफिया संस्थानों से उनके करीबी संबंध रहे हैं. सैयद मुजतबा खामेनेई हमेशा विवादों में रहे हैं, उन्होंने कभी कोई चुना हुआ पद नहीं संभाला, लेकिन उन्हें संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था. 2005 के राष्ट्रपति चुनाव में उन पर चुनावी धांधली के आरोप लगे थे और 2022–23 के प्रदर्शनों में उनके संभावित नेतृत्व के विरोध में नारे लगाए गए थे. सैयद अली-असगर (मीर) हेजाजी, अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी सहयोगी रहे हैं. उन्होंने 1979 की क्रांति के बाद ‘शुद्धिकरण समिति’ में भूमिका निभाई और बाद में खुफिया मंत्रालय और सर्वोच्च नेता कार्यालय में वरिष्ठ पद संभाले.
वह सरकारी और धार्मिक इकाइयों के बीच समन्वय के मुख्य सूत्रधार रहे हैं. अमेरिका ने 2013 में और यूरोपीय संघ ने 2019 में उन पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप में प्रतिबंध लगाए थे. मार्च 2026 के एक इजराइली हमले में उनके बच जाने की खबर है.
अमेरिका ने किन-किन पर रखा ईनाम?
सैयद इस्माइल खतीब (64) की 18 मार्च, 2026 को इजराइल और अमेरिका के हमले में मौत हो गई. वह 2021 से ईरान के खुफिया मंत्री थे और इससे पहले न्यायपालिका और सर्वोच्च नेता के सुरक्षा कार्यालय में अहम पदों पर रहे. 1980 में उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े अभियानों में हिस्सा लिया था. अमेरिका ने 2020 में उन पर प्रतिबंध लगाया था. अली लारीजानी (68) की 17 मार्च, 2026 को इजराइल और अमेरिका के हमले में मौत हो गई. अली लारीजानी ईरान के अनुभवी राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं, वे संस्कृति मंत्री, राज्य प्रसारण प्रमुख, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार रह चुके हैं.
जनवरी 2026 से और खासकर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद वह निर्णय प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका में आए थे. ब्रिगेडियर जनरल एस्कंदर मोमेनी (64) ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी हैं और कई पुलिस और आंतरिक सुरक्षा पदों पर रहे हैं. अगस्त 2024 से वह गृह मंत्री हैं और 2017–18 और 2026 की अशांति के दौरान सुरक्षा कार्रवाई की निगरानी से जुड़े रहे. मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी (73) रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर-इन-चीफ हैं और अभी सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2006 में उनके खिलाफ प्रतिबंध लगाए थे और वह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में भी हैं.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





