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Wholesale Inflation : खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई दर भी लगातार बढ़ती जा रही है. सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में देखें तो पता चलता है कि फरवरी में थोक महंगाई दर लागातर चौथे महीने बढ़कर 11 महीने के शीर्ष पर जा पहुंची है. खाने-पीने की चीजों के अलावा फैक्ट्री उत्पादों की कीमत बढ़ने की वजह से ही महंगाई पर यह दबाव दिखा है.
थोक महंगाई फरवरी में बढ़कर 11 महीने के शीर्ष पर जा पहुंची है.
नई दिल्ली. खुदरा महंगाई के अब थोक महंगाई की दर में भी तेज उछाल दिख रहा है. फरवरी में यह बढ़त के साथ 11 महीने के शीर्ष पर पहुंच गई है. उपभोक्ता मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों में बताया गया है कि खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से थोक मूल्य आधारित महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 2.13 फीसदी पहुंच गई है. यह लगातार चौथा महीना है जब थोक महंगाई में उछाल आया है.
उपभोक्ता मंत्रालय ने बताया कि थोक महंगाई लगातार चौथे महीने बढ़कर फरवरी में 2.13 फीसदी हो गई है, जिसमें खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि मुख्य कारण रही. हालांकि, सब्जियों की कीमतें महीने दर महीने कम हुई हैं, लेकिन अन्य उत्पादों के दाम बढ़ने से थोक महंगाई पर इसका असर दिखा. पिछले महीने यानी जनवरी में थोक महंगाई की दर 1.81 फीसदी थी और पिछले साल फरवरी महीने में 2.45 फीसदी थी. हालांकि, पिछले साल के मुकाबले अभी यह थोड़ी नीचे है लेकिन माना जा रहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए जल्द ही इस स्तर को भी पार कर जाएगी.
क्यों बढ़ रही थोक महंगाई दर
उद्योग मंत्रालय ने बताया कि फरवरी 2026 में महंगाई की सकारात्मक दर मुख्य रूप से अन्य विनिर्माण, मूल धातुओं के निर्माण, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य वस्तुओं और वस्त्रों आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण है. डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में महंगाई दर फरवरी में 2.19 फीसदी रही, जबकि पिछले महीने यह 1.55 फीसदी थी. सब्जियों की महंगाई दर फरवरी में घटकर 4.73 फीसदी हो गई, जबकि जनवरी में यह 6.78 फीसदी थी.
किन चीजों के ज्यादा बढ़े दाम
सब्जियों में भले ही नरमी दिख रही है लेकिन दाल, आलू और अंडा, मांस और मछली में फरवरी में पिछले महीने की तुलना में ज्यादा महंगाई देखी गई. निर्मित उत्पादों के मामले में, थोक महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 2.92 फीसदी हो गई, जबकि पिछले महीने यह 2.86 फीसदी थी. गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 8.80 फीसदी हो गई, जबकि जनवरी में यह 7.58 फीसदी थी. ईंधन और बिजली की टोकरी में नकारात्मक महंगाई या डिफ्लेशन फरवरी में 3.78 फीसदी रही, जबकि जनवरी में यह 4.01 फीसदी थी.
खुदरा महंगाई ने भी बनाया दबाव
देश की खुदरा महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 3.2 फीसदी हो गई, जबकि जनवरी में यह 2.75 फीसदी थी. पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष में नीतिगत ब्याज दरों में 1.25 फीसदी अंक की कटौती की है, क्योंकि महंगाई कम रही है. आरबीआई मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को बेंचमार्क ब्याज दरों के निर्धारण के लिए ट्रैक करता है. इसका मतलब है कि खुदरा महंगाई ही वह फैक्टर है जो कर्ज की ब्याज दरें घटाने के लिए आरबीआई को प्रेरित करता है. अगर खुदरा महंगाई बढ़ती है तो आरबीआई रेपो रेट नहीं घटा सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें





