कौन है अमेरिका का ‘विभीषण’, जिसने लीक कर दी थी ईरान में पायलट की जानकारी, अब डोनाल्ड ट्रंप लेंगे इंतकाम


वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान में फंसे एक फाइटर पायलट के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हुई एक बड़ी सुरक्षा चूक पर नाराजगी जताई. उन्होंने इसके लिए एक अज्ञात मीडिया संस्थान को सीधे निशाने पर लिया है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को शुरुआत में यह पता ही नहीं था कि उनका कोई सैनिक लापता है.

उन्होंने कहा, “ईरान को तब तक कुछ नहीं पता था जब तक कि किसी ‘लीकर’ ने यह जानकारी सार्वजनिक नहीं कर दी.” इस लीक की वजह से ईरानी सेना ने बड़े पैमाने पर तलाश शुरू की, जिससे अमेरिकी पायलट की जान खतरे में पड़ गई थी.

ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस मीडिया कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया जिसने यह जानकारी छापी थी. उन्होंने कड़े लहजे में कहा, “हम उस मीडिया कंपनी के पास जाने वाले हैं जिसने इसे प्रकाशित किया और हम कहेंगे: राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, जानकारी दे दो (स्रोत बता दो) वरना जेल जाओ!”

‘आप जानते हैं हम किसकी बात कर रहे हैं’
ट्रंप ने किसी कंपनी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन एक रहस्यमयी अंदाज में कहा, “आप जानते हैं कि हम किसकी बात कर रहे हैं.” उनका इशारा संभवतः उन प्रमुख समाचार आउटलेट्स की ओर था जो अक्सर उनके प्रशासन के खिलाफ खबरें प्रकाशित करते हैं.

क्यों है यह मामला इतना गंभीर?
गोपनीयता का उल्लंघन: सैन्य रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ऐसी जानकारी लीक होना ‘देशद्रोह’ (Treason) और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जाता है.

प्रेस की आजादी बनाम सुरक्षा: ट्रंप का यह रुख प्रेस की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच एक नई कानूनी और कूटनीतिक बहस छेड़ सकता है.

FCC की चेतावनी: इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन द्वारा नियुक्त FCC प्रमुख ब्रेंडन कैर ने चेतावनी दी थी कि “फेक न्यूज” या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले मीडिया घरानों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं.

यह बयान साफ करता है कि ट्रंप न केवल ईरान के साथ युद्ध लड़ रहे हैं, बल्कि वे घरेलू मोर्चे पर उन ‘लीकर्स’ और मीडिया संस्थानों के खिलाफ भी युद्ध स्तर पर कार्रवाई के मूड में हैं जो उनके ऑपरेशन्स में बाधा डाल रहे हैं.



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