Hyderabad Hali Sikka History: एक समय था जब हैदराबाद रियासत की अपनी अलग मुद्रा और मजबूत आर्थिक पहचान हुआ करती थी, जिसे ‘हाली सिक्का’ के नाम से जाना जाता था. निजामों के शासनकाल में यह मुद्रा न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि ब्रिटिश भारत में भी मान्यता प्राप्त थी. 1858 में निजाम अफजल-उद-दौला के दौर में इसे औपचारिक रूप दिया गया. हाली सिक्के की खासियत इसकी अलग विनिमय दर और उस पर उकेरी गई चारमीनार की आकृति थी, जो हैदराबाद की शान को दर्शाती थी. इन सिक्कों की ढलाई सचिवालय के पास स्थित सैफाबाद मिंट कंपाउंड में होती थी, जिसे आधुनिक तकनीक से लैस किया गया था. 1903 में स्थापित यह टकसाल उस समय के औद्योगिक विकास का प्रतीक बनी. 1948 में भारत में विलय के बाद धीरे-धीरे यह मुद्रा समाप्त हो गई, लेकिन इसकी विरासत आज भी इतिहास में जीवित है.





