मुश्किलों ने दी ताकत तो मजदूर का बेटा मेहनत कर बन गया बिहार टॉपर, सहरसा के आदर्श ने लिखी कामयाबी की कहानी


Last Updated:

Bihar Intermediate topper success story: कठिन हालात अगर इरादों को मजबूत बना दें, तो वही संघर्ष सफलता की सबसे बड़ी कहानी बन जाती है. सहरसा के एक मजदूर के बेटे आदर्श कुमार ने यह साबित कर दिखाया है कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. इंटरमीडिएट परीक्षा में 500 में 477 अंक लाकर पूरे बिहार में तीसरा स्थान हासिल करने वाले आदर्श आज लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

Zoom

मजदूरी करने वाले पिता के बेटे आदर्श ने किया कमाल, इंटर आर्ट्स में तीसरी रैंक

सहरसा. परिस्थितियां चाहे जितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है. सहरसा जिले के सिहौल गांव के रहने वाले आदर्श कुमार ने अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन से बड़ा मुकाम हासिल किया है. उन्होंने अपने परिश्रम, अनुशासन  और लगन के दम पर इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में इतिहास रचते हुए पूरे बिहार में टॉप-3 में जगह बनाई है. उन्होंने आर्ट्स संकाय में 95.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राज्य में तीसरा स्थान पाया है. गांव के ही श्री दुर्गा उच्च विद्यालय से पढ़ाई करने वाले आदर्श ने सीमित संसाधनों के बावजूद सेल्फ स्टडी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और अपने सपनों को साकार किया.

पूरे बिहार में तीसरा स्थान

सिहौल गांव निवासी रंजीत झा के पुत्र आदर्श कुमार ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए आर्ट्स संकाय में 477 अंक हासिल किए हैं, जो कुल 95.40 प्रतिशत है. अपनी इस उपलब्धि के साथ आदर्श ने पूरे बिहार में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. सीमित संसाधनों के बावजूद आदर्श की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती.

सेल्फ स्टडी से मिली सफलता

आदर्श ने अपनी पढ़ाई गांव के ही श्री दुर्गा उच्च विद्यालय, सिहौल से की और एक स्थानीय प्राइवेट कोचिंग से मार्गदर्शन लिया. उन्होंने बताया कि उनकी पढ़ाई का मुख्य आधार सेल्फ स्टडी रहा. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा.

परदेश में मजदूरी करते हैं पिता, मां संभालती हैं घर

आदर्श के पिता हरियाणा में एक फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, जबकि मां घर की देखभाल करती हैं. आदर्श अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देते हैं, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया.

गांव में उत्सव का माहौल, मां बेहद खुशी

नहीं जैसे ही रिजल्ट घोषित हुआ, गांव में खुशी की लहर दौड़ गई. आसपास के लोग उनके घर पहुंचकर उन्हें बधाई देने लगे और मिठाइयां बांटी जाने लगीं. इस उपलब्धि से आदर्श की मां बंटी देवी की खुशी का भी ठिकाना नहीं है. सीमित संसाधनों के बावजूद सेल्फ स्टडी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और अपने सपनों को साकार करते हुए एक मजदूर के बेटे ने इतिहास रच दिया है.

About the Author

authorimg

Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img