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‘NDA’ का क्या है नया मतलब, संसदीय दल की बैठक में नरेंद्र मोदी ने बताया

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पीएम मोदी ने की संसदीय दल की बैठक में हिस्सा।- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत : इंडिया टीवी
राष्ट्र की संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी।

नई दिल्लीपुरानी संसद के केंद्रीय हॉल में आज एनडीए के घटक दलों की बैठक हुई। इस बीच नरेंद्र मोदी भी बैठक में शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी की इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे मातरम और मोदी-मोदी के नारे लगाए। बैठक में नरेंद्र मोदी को एनडीए का नेता चुना गया। इसके बाद शाम को नरेंद्र मोदी सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा। वहीं इससे पहले पीएम मोदी ने राष्ट्र दल की बैठक में नेतृत्व किया था। पीएम मोदी ने एनडीए का मतलब बताते हुए कहा कि ‘नया भारत, विकसित भारत, आकांक्षी भारत’। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं सबसे पहले इस सदन में मौजूद सभी लोगों को दिल से आभार व्यक्त करता हूं। मेरे लिए खुशी की बात है कि इतने बड़े समूह का स्वागत करने का अवसर मिला है। जो साथी विजयी हुए हैं, वह अभिनंदन के आभारी हैं। लेकिन जिन लाखों पूर्वजों ने परिश्रम किया है, मैं आज संविधान सदन के इस केंद्रीय हॉल से सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम करता हूं।

‘विश्वास’ पर दिया जोर

मेरा सौभाग्य है कि आप सभी साथियों ने नेताओं से चुनकर मुझे नया बनाया है। इसके लिए मैं आप सबका बहुत-बहुत दुखी हूं। व्यक्तिगत जीवन में जब मैं एक जवाबदारी का समाधान करता हूं। जब 2019 में मैं सदन में बोल रहा था तब मैंने एक बात पर बल दिया था- विश्वास। आज जब एक बार फिर से मुझे आप येलट देते हैं तो इसका मतलब है कि भरोसे में विश्वास का सेतू मजबूत है। ये अटूट रिश्ते विश्वास की सबसे मजबूत धरती पर है और ये सबसे बड़ी पूंजी होती है। इसलिए ये पल मेरे लिए भावुक करने वाला भी है और आप सबके प्रति आभार बहुत कम है।

‘पिंजरा राज्यों में सेवा दे रहा हूं’

बहुत कम लोग इन बातों की चर्चा करते हैं, हिंदुस्तान के इतने महान लोकतंत्र की ताकत देखते हुए कि 22 राज्यों में लोगों ने उनकी सरकार बनाने का मौका दिया है। भारत की जड़ों में जो रचा-बसा है, उसका एक प्रतिबिंब है। मैं इसलिए कह रहा हूं कि थोड़ी सी नजर डालें तो हमारे देश में 10 ऐसे राज्य होंगे जहां आदिवासी बंधुओं की संख्या प्रभावी रूप से होगी। जहां आदिवासियों की जनसंख्या अधिक है, ऐसे 10 राज्यों में से 7 राज्यों में राष्ट्र सेवा कर रहा है। जहां ये भाई-बहन हैं, वहां भी हमें सेवा का आश्वासन मिल रहा है। हिंदुस्तान की राजनीति के गठबंधन के इतिहास में प्रीपोल एलायंस इतना सफल कभी नहीं हुआ है, जैसा कि राष्ट्र हुआ है। इस गठबंधन की जीत ने हमें बहुमत हासिल किया है और मैं कई बार कह चुका हूं कि सरकार चलाने के लिए बहुमत जरूरी है, लोकतंत्र का वही सिद्धांत है, लेकिन देश चलाने के लिए सर्वमत बहुत जरूरी होता है। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपने जिस तरह से बहुमत देकर सरकार चलाने का दात्यत्व दिया है, उससे हम सर्वमत से देश को आगे ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

सबसे सफल एलायंस रहा है डॉन

भारत को करीब तीन दशक हो चुके हैं। ये सामान्य घटना नहीं है। इन तीन दशकों की यात्रा एक बहुत बड़े संदेश का संदेश देती है। मैं बहुत गर्व के साथ कहता हूँ कि एक समय मैं संगठन के कार्यकर्ता के रूप में इस अलायंस का हिस्सा था। मेरा भी नाता इससे तीन सालों का रहा है। मैं कह सकता हूँ कि ये सबसे सफल गठबंधन है। हम गर्व से कह सकते हैं कि पांच साल की शर्तें होती हैं। इस अलायंस ने तीन साल में 5-5 साल के तीन कार्यकाल पूरे किए हैं और अलायंस चौथे कार्यकाल में प्रवेश कर रहा है। इस बात को जो राजनीति के विशेषज्ञ हैं, अगर मुक्त मन से सोचेंगे तो पता चलेगा कि भारत ये सत्ता हासिल करने का या सरकार चलाने वालों का कुछ हिस्सा का निगलावा नहीं है। यह राष्ट्र प्रथम की मूल भावना से राष्ट्र प्रथम के प्रति प्रतिबद्ध समूह है। तीन साल का लंबा कालखंड शुरू हुआ होगा लेकिन आज भारत की राजनीतिक व्यवस्था में एक जैविक गठबंधन है। ये मूल्यवान श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी, बाला साहेब ठाकरे, शरद यादव जैसे अनगिनत लोगों ने जो बीज बोया था, आज भारत के जनता ने इस बीज को वट वृक्ष बना दिया है।

भारत का प्रयास है गुड गवर्नेंस

पिछले 10 सालों में हमने भारत की इसी विरासत को लेकर निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास किया है। भारत का जो लोग तम हैं, उसमें कामन चीज नजर आती है वह है गुड गवर्नेंस। सभी ने जब-जब सेवा का मौका मिला है, वहां इस देश को गुड गवर्नेंस दिया गया है। इस प्रकार से भारत कहता है कि गुड गवर्नेंस आपकी आप पर्यायवाची बन जाता है। हम सभी लोगों के कार्यकाल में गरीबों का कल्याण केंद्र स्थापित कर रहे हैं। देश ने राष्ट्र के, गरीब कल्याण के, गुड गवर्नेंस के 10 सालों को देखा है, देश ने इसे जीया है। जनता जनार्दन ने सरकार क्या होती है, सरकार क्यों होती है, सरकार किसके लिए होती है, सरकार कैसे काम करती है, इसे पहली बार अनुभव किया है। पहले जनता और पूर्वजों के बीच खाई की व्यवस्था बनी थी, हमने उसे पाटा। हमने सबका प्रयास का मंत्र देश को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए चरितार्थ करके देखा है।

सदन में सभी लोग समान

प्रधानमंत्री मोदी सरकार में हम अगले 10 वर्षों में गर्व, विकास, देशभक्ति और सामान्य मानव के जीवन से सरकार की दखल कम हो कर लोकतंत्र की वृद्धि करेंगे। आज के युग में हम इसे बहुत आसानी से कर सकते हैं। हम बदलाव चाहते हैं। हम विकास का नया अध्याय लिखेंगे। सब मिल कर विकसित भारत के सपने को साकार करके रहेंगे। घर में किसी भी दल का कोई भी पहलू मेरे लिए सब समान हैं। जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ तो सदन में भी हमारे लिए सब समान हैं। यही एक भाव है जिसके कारण तीस वर्षों से एनडीए एलायंस प्रोसेसर के साथ आगे बढ़ रहा है।

टीम भावना से किया गया काम

हमने 2024 में जिस टीम भावना से काम किया है और ग्रास रूट पर काम किया है। उसी ने हमें अलायंस का सामर्थ्य दिया है। एक-दूसरे का सहयोग किया गया है। हर किसी ने यही सोचा जहां कम वहां हम। ये हर कार्यकर्ता ने जीकर दिखाया है। दक्षिण भारत में एनडीए ने एक नई राजनीति की नींव मजबूत की है। यह साफ-साफ संदेश दे रहा है कि कल में क्या लिखा गया है। आने वाले 25 वर्षों में महाप्रभु जगन्नाथ जी की कृपा से ओडिशा देश की विकास यात्रा का इंजन बनेगा।

ईवीएम बोलने वालों के मुंह पर लगा ताला

4 जून के नतीजे आ रहे थे तो मैं अपने काम में व्यस्त था। मैंने पूछा कि ये बताओं की ईवीएम जीवित है कि मर गई। क्योंकि जो लोग तय करके बैठे थे कि भारत के लोकतंत्र और लोकतांत्रित प्रक्रिया पर भरोसा ही उठ गया था। लेकिन 4 जून की शाम को उन्हें मूर्ति लग गई और ईवीएम ने उन्हें चुप करा दिया। ये ताकत है भारत के लोकतंत्र की, चुनाव आयोग की, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की। मुझे आशा है कि पांच सालों तक ईवीएम जारी नहीं होगा, लेकिन जब हम 2029 में जाएंगे तो ये फिर से ईवीएम पर रोना शुरू कर देंगे। ये लोग सुप्रीम कोर्ट का उपयोग करते हुए कैसे इसके निहितार्थ डालने का प्रयास करते रहे। कितने निराशाजनक तरीके से ये लोग मैदान में आए थे कि पूरा हमला उसी प्रक्रिया पर लगा लो कि चुनाव के दौरान हम भारत के लोकतंत्र पर आरोप लगाएंगे।

हम विजय को पचाना जानते हैं

जब इंडी गठबंधन वाले ईवीएम के विश्लेषण की बात करते हैं तो मुझे लगता है कि ये पिछड़ी सोच वाले लोग हैं। ये तकनीक को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। मैं मानता हूं कि 2024 के चुनाव के जो नतीजे आएंगे, दुनिया ये मानेगी कि ये राष्ट्र की महाविजय है। आपने देखा होगा कि दो दिन ऐसे चले जैसे कि हम हार गए हों। अपने बुरे कर्मों को नैतिक रूप से ऊंचा करने के लिए ये करना पड़ रहा है। गठबंधन के इतिहास में अगर आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी देखी जाए तो यह सबसे मजबूत गठबंधन की सरकार है। लेकिन ये कोशिश की गई कि इस विजय को स्वीकार न किया जाए और पराजय की छाया में रखा जाए। देशवासी जानते हैं कि ना हम हारे थे और ना हम हारे हैं। 4 तारीख के बाद हमारा जो व्यवहार रहा है वो हमारी पहचान बताता है कि हम विजय को पाना जानते हैं। हमारे संस्कार ऐसे हैं कि विजय के देवता में जन्म नहीं होता और न ही पराजित लोगों के प्रति समर्पण करने के हमारे संस्कार हैं। आप किसी से पूछते हैं कि राष्ट्रीय चुनाव से पहले किसकी सरकार थी तो राष्ट्र, चुनाव के बाद किसी की सरकार बनेगी तो राष्ट्र। फिर हरे कहाँ से हैं भाई।

तीन बार के आंकड़े भी हमारे बराबर नहीं

आप सोच रहे होंगे कि 10 साल बाद भी कांग्रेस 100 के आंकड़े को छू नहीं पाई। अगर मैं 2014, 2019 और 2024 के तीन चुनावों को बताऊं तो इन तीनों चुनावों में पैटर्न मोड मिले हैं, उससे इस बार हमें अधिक मोड मिले हैं। ये तेज गति से गर्त में जाने वाले हैं। भारतीय अलायंस वाले देश के सामान्य नागरिकों के सामर्थ्य को समझ में नहीं आता। भारत के आम व्यक्ति की भी एक समझ है। जो ज़मीन से जुड़ा रहता है वो इस समझ को जानता है। चार तारीख के बाद इनका जो व्यवहार रहा है, संभवतः ये लोकतंत्र का सम्मान करके ऐसे संस्कार आएंगे। ये वो लोग हैं जो खुद की पार्टी के प्रधानमंत्री का सम्मान करना नहीं जानते।

लोकतंत्र में सबका सम्मान

लोकतंत्र हमें सबका सम्मान करना सिखाती है, लोकतंत्र में भी जो सांसद जीत कर आते हैं मैं उन्हें भी बधाई देता हूं। मुझे आशा है कि नए सदन में राष्ट्रहित की नियति के साथ हमारे विपक्ष के साथी सदन में आएंगे। मैं आशा करता हूँ कि वो राष्ट्रहित की भावना के साथ सदन में आएगी और अपना योगदान देगी। 2024 का जनादेश एक ऐसी बात को बार-बार बढ़ा रहा है कि देश को आज के माहौल में सिर्फ और सिर्फ भारत पर ही भरोसा है। जब इतना संपूर्ण विश्वास है तो स्वभाव है कि देश की अपेक्षाएं भी चुराई जाएंगी। इन खेलों को पूरा करने में रात भर भी देरी नहीं करना है। आज के माहौल में देश को सिर्फ और सिर्फ भारत पर ही भरोसा है और जब इतना अटूट विश्वास और भरोसा है तो स्वभाव है कि देश की अपेक्षाएं भी चुंगी और मैं इसे अच्छा मानता हूं। मैंने पहले भी कहा था कि पिछले 10 साल का काम तो सिर्फ ट्रेलर है। और ये मेरा कमिटमेंट है… हमें और तेजी से, और विश्वास से, और विस्तार से… देश की आकांक्षाओं को पूरा करने में रातभर भी देरी नहीं करनी है।

यहां देखें पीएम मोदी का पूरा प्रोफाइल-

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