क्या है अमेरिका का ‘गैंग ऑफ 8’? ट्रंप के वो 8 राजदार जिन्हें हमले से पहले पता था ईरान का अंजाम


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क्या है ‘गैंग ऑफ 8’? ट्रंप के वो राजदार जिन्हें पहले से पता था ईरान का अंजाम

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‘गैंग ऑफ 8’ अमेरिका की सत्ता का सबसे गोपनीय और ताकतवर समूह माना जाता है. किसी बड़े सैन्य अभियान से पहले राष्ट्रपति को इस ग्रुप को भरोसे में लेना जरूरी होता है. ईरान पर हालिया हमले से पहले डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर इसे पूरी ब्रीफिंग दी गई. इस समूह में हाउस और सीनेट के पक्ष-विपक्ष के सिर्फ 8 टॉप नेता शामिल होते हैं, जो देश के सबसे संवेदनशील सैन्य रहस्यों से वाकिफ रहते हैं.

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ईरान पर अमेरिकी स्ट्राइक की घोषणा करने जाते ट्रंप. (Photo : Reuters)

वाशिंगटन: ईरान पर हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. लेकिन इस हमले की पटकथा कई दिन पहले ही लिख दी गई थी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को अंजाम देने से पहले अमेरिकी कांग्रेस के एक बेहद खास और गोपनीय ग्रुप को भरोसे में लिया था. इसे ‘गैंग ऑफ 8’ के नाम से जाना जाता है. यह ग्रुप अमेरिकी लोकतंत्र का वह हिस्सा है, जो सबसे गहरे सैन्य रहस्यों को अपने सीने में दबाकर रखता है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने पुष्टि की है कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हमलों से पहले इस ग्रुप के सदस्यों से संपर्क किया था. इस ग्रुप की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति को भी कानूनन इन्हें रिपोर्ट करना पड़ता है.

कौन होते हैं ‘गैंग ऑफ 8’ के सदस्य और क्या है इनका काम?

’गैंग ऑफ 8′ कोई औपचारिक नाम नहीं है, बल्कि यह एक बोलचाल का शब्द है. इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के आठ शीर्ष नेता शामिल होते हैं. इनमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता (लीडर्स) शामिल होते हैं. इसके अलावा, दोनों सदनों की इंटेलिजेंस कमेटियों के अध्यक्ष (चेयरमैन) और रैंकिंग माइनॉरिटी मेंबर्स भी इसका हिस्सा होते हैं. अमेरिकी कानून के अनुसार, राष्ट्रपति को खुफिया गतिविधियों और सैन्य अभियानों की जानकारी इन आठ दिग्गजों को देनी ही होती है. ये वे लोग हैं जिनके पास देश की सबसे संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच होती है.

‘गैंग ऑफ 8’ का स्ट्रक्चर समझें

यह ग्रुप अमेरिकी कानून (Title 50 U.S. Code) के तहत बनाया गया है, जिसमें ये 8 पद शामिल होते हैं:

  1. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के स्पीकर
  2. हाउस में माइनॉरिटी लीडर
  3. सीनेट में मेजॉरिटी लीडर
  4. सीनेट में माइनॉरिटी लीडर
  5. हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के चेयर
  6. हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के रैंकिंग मेंबर
  7. सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के चेयर
  8. सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के रैंकिंग मेंबर

असाधारण परिस्थितियों में क्यों जरूरी है यह ग्रुप?

सामान्य तौर पर राष्ट्रपति को पूरी इंटेलिजेंस कमेटी को जानकारी देनी चाहिए. लेकिन जब हालात ‘असाधारण’ हों और राष्ट्रपति को लगे कि जानकारी लीक होने से मिशन खतरे में पड़ सकता है, तो वह ‘गैंग ऑफ 8’ का सहारा लेते हैं. अमेरिकी कानून (50 U.S.C. § 3093) राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह बेहद गोपनीय सैन्य कार्रवाई (Covert Action) की रिपोर्टिंग को सिर्फ इन आठ लोगों तक ही सीमित रखें. ईरान के मामले में भी यही हुआ. ट्रंप प्रशासन ने गोपनीयता बनाए रखने के लिए सिर्फ ‘गैंग ऑफ 8’ को ही मिशन के बारे में ब्रीफ किया ताकि दुश्मन को इसकी भनक न लग सके.
ईरान के खिलाफ अमेरिका के मिलिट्री ऑपरेशन लॉन्च किए जाने की घोषणा करते ट्रंप. (Photo : Reuters)

हाऊस स्पीकर माइक जॉनसन ने क्या किया खुलासा?

हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने साफ किया है कि ‘गैंग ऑफ 8’ को इस सप्ताह की शुरुआत में ही संभावित सैन्य कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दे दी गई थी. जॉनसन के मुताबिक, ईरान के बढ़ते परमाणु खतरे और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था. उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने व्यक्तिगत रूप से इन नेताओं को कॉल किया था. दिलचस्प बात यह है कि रूबियो 8 में से 7 सदस्यों से बात करने में सफल रहे. यह ब्रीफिंग दर्शाती है कि अमेरिका में युद्ध जैसे बड़े फैसले रातों-रात नहीं, बल्कि एक तय कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक तालमेल के साथ लिए जाते हैं.



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