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West Bengal 2010 OBC Certificate Case | Calcutta High Court | बंगाल में 2010 के बाद जारी सभी OBC सर्टिफिकेट रद्द: कलकत्ता हाईकोर्ट ने गैरकानूनी बताया; 5 लाख लोग प्रभावित होंगे, नौकरी करने वालों पर असर नहीं

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कोलकाता6 मिनट पहले

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उच्चतम का यह आदेश उन लोगों पर लागू नहीं होगा, जो पहले नौकरी मिल चुकी या मिलने वाली है।  - दैनिक भास्कर

उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि इसे किसी भी व्यक्ति पर लागू नहीं किया जाएगा, जिसमें पहले नौकरी मिलना या मिलना शामिल है।

कलकत्ता कोर्ट ने रविवार को पश्चिम बंगाल में 2010 के बाद जारी सभी अदर बैकवर्ड क्लास (ओबीसी) को रद्द करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस तपोब्रत के वकील और राजशेखर मंथर की बेंच ने कहा कि 2011 से प्रशासन ने किसी नियम का पालन नहीं किया है।

बेंच ने कहा- इस तरह से सब्सट्रेट का होना असंवैधानिक है। यह कैसल फ़्लॉम वर्ग आयोग का कोई भी विवरण मरे हुए जारी किए गए। इसलिए इन सभी शास्त्रो को रद्द कर दिया गया है। हालाँकि, यह आदेश उन लोगों पर लागू नहीं होगा, जिनमें पहले नौकरी मिलना या मिलना शामिल है।

ओबीसी सूची रद्द होने से करीब 5 लाख लाख रद्द होने वाले हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल पाली वर्ग आयोग अधिनियम 1993 के आधार पर ओबीसी की नई सूची पश्चिम बंगाल पाली वर्ग आयोग तैयार की जाए।

ममता बोलीं-उच्च न्यायालय का आदेश नहीं मानेंगे
हाईकोर्ट के जजमेंट को लेकर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि हाईकोर्ट और बीजेपी के आदेश को लेकर कोई भेदभाव नहीं है। ममता ने कहा कि राज्य में परमाणु रात्री रिलीज रहेगी। जरा इन लोगों की हकीकत तो देखिए। ये हमारे देश का एक खंडित अध्याय है। अविश्वास लागू करने से पहले सर्वेक्षण में कई वैज्ञानिक शामिल थे। इस मामले में पहले भी कई केस दर्ज किए गए थे, लेकिन उनका कोई नतीजा नहीं निकला। ये लोग बीजेपी का इस्तेमाल युनिट्स में क्यों नहीं करते।

ममता ने आगे कहा कि पीएम मोदी लगातार बात करते आ रहे हैं कि कैसे माइनॉरिटी पार्टी (माइनॉरिटी पार्टी) तापसी आरक्षण को छीन लेगी और इससे संविधान का उल्लंघन होगा। माइनॉरिटीज कभी भी तपशिली या आदिवासी आरक्षण को हाथ भी नहीं लगा सकते हैं। लेकिन भाजपा के शातिर लोग फ़ोर्क के माध्यम से अपना काम करवाते हैं।

2012 में ओबीसी आरक्षण कानून को चुनौती दी गई थी
बंगाल की टीएमसी सरकार 2012 में नवीनता का कानून लेकर आई थी। इसी को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि राज्य सरकार 1993 के कानून के अनुसार आयोग के क्षेत्र को राजकोषीय बनाएगी। इसी के आधार पर परमाणु की सूची बनाई जाएगी।

तपोब्रत बाकलिन की बेंच ने कहा, ‘ओबीसी किसे माना जाएगा, इसका निर्णय विधानसभा होगा। बंगाल ढाल वर्ग कल्याण को इसकी सूची तैयार करनी होगी। राज्य सरकार की उस सूची को विधानसभा में पेश किया जाए। स्थान का नाम इस सूची में होगा नवी को पुतिन माना जाएगा।



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