हालांकि यह मुकाबला त्रिकोणीय है। लेकिन राज्य में सत्ता मुख्य रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच हस्तांतरित होती रही है। इस चुनाव के परिणाम से पता चलेगा कि क्या यह पैटर्न बरकरार रहेगा या इसमें बदलाव आएगा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ एलडीएफ के लिए यह चुनाव लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने की एक अहम लड़ाई है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में, वाम मोर्चा ने अपने 10 साल के शासन रिकॉर्ड को प्रमुखता दी है, जिसमें बुनियादी ढांचा विकास, कल्याणकारी योजनाएं और संकट प्रबंधन शामिल हैं।
हालांकि, एलडीएफ को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें सत्ता विरोधी लहर की चर्चा और 2024 के लोकसभा चुनाव और हाल के स्थानीय निकाय चुनाव में मिली हार के बाद उठे सवाल शामिल हैं। वाम मोर्चा ने निरंतरता, स्थिरता और कामकाज का दावा करते हुए इन आरोपों का मुकाबला करने की कोशिश की है। उसने भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोपों को भी खारिज करने की भरपूर कोशिश की है।





