0.9 C
New York

Varanasi Manikarnika Ghat Funeral Records | Heatwave Alert | काशी के महाश्मशान पर शवों की कतार, आंकड़ा 400 पार: जगह नहीं मिली तो शव पर शव रखे; डोम राजा बोले- गर्मी में बढ़ी संख्या – Varanasi News

Published:


यह तस्वीर मणिकर्णिका घाट पर गुरुवार रात हुए अंतिम संस्कारों की है।

काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर शवों की कतारें लगी हैं। गुरुवार (30 मई) को सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुना 400 से ज्यादा शव पहुंचे। मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियों में रातभर जाम लगा रहा। भीड़ से व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं।

.

घाट पर अंतिम संस्कार कराने वाले डोम राजा ओम चौधरी ने बताया कि गर्मी बढ़ने के बाद अचानक शवों की संख्या बढ़ रही है। ओम चौधरी, डोम राजा जगदीश चौधरी के बेटे हैं। मणिकर्णिका पर अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी उनकी ही है।

गुरुवार की आधी रात में मदागिन से लेकर मोक्षद्वार तक शव ही शव नजर आ रहे थे। गली और घाट में जब जगह कम पड़ी तो शवों को एक के ऊपर एक रख दिया। मणिकर्णिका में रात्रिभर अंतिम संस्कार होता है। ऐसे में शुक्रवार को रास्ते तक वहां ऐसे ही परिस्थितियां रहीं।

पढ़िए मणिकर्णिका से दैनिक भास्कर की रिपोर्ट…

यह फोटो गुरुवार रात की है।  यहां एक बार में 25 से 30 तक शवों का दाह संस्कार किया जाता है।

यह फोटो गुरुवार रात की है। यहां एक बार में 25 से 30 तक शवों का दाह संस्कार किया जाता है।

जितने शव जल रहे थे, उससे कई गुना शव लेकर लोग बारी में थे
गुरुवार रात घाट पर बनाए गए मंच पर लोग शव जल रहे थे, उससे कई गुना शव लेकर लोग कतार में खड़े थे। घाट के डोम ने भीड़ देखकर शवों को कतार में लगवाया। जगह कम पड़ी, तो शव के ऊपर शव रखवा दिया।

घाट पर एक बार में 25 से 30 शवों का ही अंतिम संस्कार किया जाता है। इस तरह वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही थी। काशी के आसपास के बुजुर्गों से शव लेकर आए पूर्वजों को दाह-संस्कार के लिए 5-5 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। यही कारण था, कि मृतकों में शवों की संख्या और भीड़ दोनों बढ़ गई।

मणिकर्णिका पर इतने शव पहुंच गए कि एक के ऊपर एक शवों को रखा गया।  वह स्थान ही नहीं था।

मणिकर्णिका पर इतने शव पहुंच गए कि एक के ऊपर एक शवों को रखा गया। वह स्थान ही नहीं था।

लक्सीस की किल्लत, एक चिता पर दो शव जलाने को भी लोग तैयार
महेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया- अपने रिश्तेदारों का शव लेकर घाट आए, घाट पर लकड़ियां ही नहीं मिल रही हैं। हमें ऐसा नहीं लगता कि हालात ऐसे होंगे। भीड़ से परेशान परिजन एक चिता पर दो शव श्रद्धांजलि के लिए भी तैयार हो गए। उत्साहित, लकड़ी न मिलने से लोगों के पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था। वहीं, जब लकड़ियां मिलने में मुसीबत आई तो कुछ रिश्तेदार दूसरे घाट पर शव लेकर चले गए।

जिम्मेदार क्या कहते हैं?

समरस सार्थक अग्रवाल ने कहा- घाट पर नगर निगम की जिम्मेदारी है। अगर किसी तरह की लाभ होती है, तो उसे ठीक किया जाएगा। वहीं, नगर निगम के अपर नगर आयुक्त दुष्यंत मौर्य ने कहा- जब शव की संख्या बढ़ी है, तो अतिरिक्त कर्मचारी लगा दिए गए हैं। नगर निगम का जिम्मा है। लोगों की परेशानी खत्म करने पर तुरंत काम किया जाएगा।

यह गली मणिकर्णिका घाट की तरह जाती है। तस्वीर गुरुवार रात 12 बजे की है।  शवों को लाने वाले लोगों की भीड़ के चलते जाम लग गया।

यह गली मणिकर्णिका घाट की तरह जाती है। तस्वीर गुरुवार रात 12 बजे की है। शवों को लाने वाले लोगों की भीड़ के चलते जाम लग गया।

अंतिम संस्कार के लिए शवों की संख्या क्यों बढ़ाई गई?
अंतिम संस्कार के लिए शवों की संख्या क्यों बढ़ाई गई? इस सवाल पर डोम राजा ओम चौधरी कहते हैं, दो-तीन दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में मृत्यु का आंकड़ा बढ़ जाता है। इससे अंतिम संस्कार के शवों की संख्या भी अधिक है। हालांकि, गर्मी से मौत के उनके इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वह यह भी दावा करते हैं कि सिर्फ मणिकर्णिका नहीं, बल्कि हरिश्चंद्र घाट सहित अन्य श्मशान पर शवों की संख्या बढ़ी है। हरिश्चंद्र घाट पर पहले 50 से 60 शव आते थे। यह आंकड़ा भी 150 से 200 के बीच पहुंच गया है।

महाश्मशान नाथ सेवा समिति के सदस्य बिहारीलाल गुप्ता बताते हैं- सबसे पहले काशी में मणिकर्णिका घाट पर ही लोग अपने अनुयायियों का अंतिम संस्कार करना चाहते हैं। यह मान्य है कि यहां अंतिम संस्कार से शिवलोक की प्राप्ति होती है। लेकिन, जब यहां जगह नहीं होती तो फिर हरिश्चंद्र या अन्य घाटों में चले जाते हैं।

यह फोटो भी गुरुवार शाम की है।  घाट और उसके आसपास लाशें और उनके परिजन रखे हुए हैं।

यह फोटो भी गुरुवार शाम की है। घाट और उसके आसपास लाशें और उनके परिजन रखे हुए हैं।

भीषण गर्मी, शाम को शव लेकर पहुंच रहे लोग
मणिकर्णिका घाट पर रहने वाले रोहित वर्मा ने दैनिक भास्कर बताया- गुरुवार शाम को घाट और आसपास कोई बिल्कुल भी जगह नहीं थी। मंच पर जलने वाले शव की आग लगने पर नई चिता जलती है, लेकिन लोग इच्छुक कर रहे थे।

वह कहती हैं- दो-तीन दिन से शाम के वक्त ऐसी ही स्थिति हो जाती है। भास्कर ने जब शव यात्रा में आए लोगों से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि उस दिन भीषण गर्मी होती है। इसलिए ज्यादातर लोग दोपहर के बाद ही शव लेकर मणिकर्णिका आ रहे हैं। यहां रातभर अंतिम संस्कार चलता रहता है।

मणिकर्णिका घाट की मूर्तियों में शवों की कतार लगी थी।  एक के बाद एक शव वहां लिखे रहे।

मणिकर्णिका घाट की मूर्तियों में शवों की कतार लगी थी। एक के बाद एक शव वहां लिखे रहे।

घाट पर आये लोग क्या कहते हैं
घाट पर आए सुरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि दो घंटे से खड़े हैं, यहां लकड़ी मिल नहीं रही। सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए। यहां न पुलिस है, न प्रशासन। आम आदमी परेशान हो रहा है। अनुराग गुप्ता ने बताया कि यहां पूरा रास्ता ब्लॉक है, हजारों शव आ रहे हैं। पता नहीं मेरा नंबर कब आएगा।

मणिकर्णिका घाट पर पांच कीमत में बाइकें लकड़ियां
मणिकर्णिका घाट पर गुरुवार को लोगों को चिता जलाने के लिए भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी। यहां लकड़ी की कीमत 1000 रुपये प्रति 40 किलोग्राम बाइक। हरिश्चंद्र घाट के लकड़ी व्यवसायी ने बताया कि लकड़ी की कीमत 500 रुपए 40 किलोग्राम है। रात में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी नहीं मिली, इसलिए रिश्तेदारों ने आसपास के घाट से लकड़ी का भूत भगा दिया।



Source link

Related articles

spot_img

Recent articles

spot_img