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Uttarakhand Forest Fire Viral Video Controversy Exposed | Nainital | उत्तराखंड के जंगलों में आग: सोशल मीडिया पर दावा, इसके पीछे समुदाय विशेष के लोगों का हाथ; जानिए क्या है सच्चाई

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34 मिनट पहले

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उत्तराखंड में अप्रैल के पहले सप्ताह से लगी आग से अब तक 11 जिले प्रभावित हैं। गढ़वाल मंडल के मंडल रुद्रप्रयाग, शिमला, उत्तरकाशी, निवेशकों से सबसे अधिक प्रभावित हैं और मंडल का कुछ हिस्सा इसमें शामिल है। जबकि कुमाऊँ मंडल का अभ्यारण्य, चंपावत, अपोलो, बागेश्वर, अमृतसर सर्वाधिक प्रभावित हैं।

  • मीडीया के अनुसार, उत्तराखंड के पहाड़ों में लगी आग से अब तक 1316 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। उत्तराखंड के जंगल में आग क्यों लगी इसे लेकर भी तरह-तरह के दावे सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं।
  • ऐसा ही एक दावा है कि उत्तराखंड की आग के पीछे एक विशेष समुदाय का हाथ है। इस दावे से जुड़े ट्वीट्स कई वेरी ऑपरेशंस और नॉन वेरी ऑपरेशंस ग्राहकों ने साझा किए हैं।

एक्स आर्किटेक्चर उद्यमी प्रताप सिंह अपने ट्वीट में शामिल हैं-

उत्तराखंड के जंगलों में आग के मामले को लोग मोसर आलम, नाजेफर आलम, नुरुल, अय्याम और पिपरिया आलम के रूप में पहचानते हैं। ये यहां का काम करते थे। ये जंगल में आग उगलते रंगे हाथ वन विभाग को मिले थे। इन दरिंदों के मोबाइल से कई वीडियो भी मिले जिसमें ये जंगल में आग लगाकर उनके वीडियो बना रहे थे। मैं फिर से कह रहा हूं इस समुदाय को पर्यावरण से, प्रकृति से, देश के विकास से कोई मतलब नहीं है। यह कम्यूनिटी पद पर है, समाज के जिन हिस्सों में पूरी ताकत लगी हुई है कि किस तरह से भारत को खत्म कर दिया जाए, किस तरह से भारत को खत्म कर दिया जाए, किस तरह से भारत की अर्थव्यवस्था को खत्म कर दिया जाए।

ट्वीट देखें:

प्रधानमंत्री मोदी को एक्स पर शेयर किए गए प्रताप सिंह समेत 52 हजार लोग फॉलो करते हैं। वहीं, इंजीनियर के इस ट्वीट को खबर लिखने तक 1500 लोगों ने रीट्वीट किया था और 2200 लोगों ने इसे लाइक किया था।

उत्तराखंड में लगी आग से टॉयलेट ट्वीट हमें पंचजन के ट्विटर अकाउंट पर भी देखें। ट्वीट में लिखा था- मोहम्मद नुरुल मोहम्मद चॉकलेट मोहम्मद शालेम मोहम्मद नजेफर मोहम्मद मोसर आलम ने ही उत्तराखंड के जंगल में आग लगाई। अंतिम जंगल से क्या समस्या हुई होगी?

ट्वीट देखें:

क्या है दावा दावा सच?

क्या उत्तराखंड के जंगल में आग लगाने के पीछे एक सामुदायिक विशेष का हाथ था? इस दावे की पड़ताल के दौरान हमें उत्तराखंड पुलिस का एक ट्वीट मिला। इस ट्वीट में लिखा था-

सोशल मीडिया पर वनाग्नि द्वारा प्रकाशित कुछ तस्वीरों में एसोसिएटेड वायरल वीडियो को बढ़ावा दिया गया, जिसमें पांडवाखाल (गैरसैंण) को शामिल किया गया। जिस संबंध में बिहार रेजिडेंट त्रिपोली प्लास्टरबोर्ड कुमार, सलमान और सुखलाल के खिलाफ अभियोग पंजीकरण कर पात्रता को गिरफ्तार किया गया है।

ट्वीट देखें:

डेली भास्कर ने भी इस मामले से जुड़ी प्रमुख खबर प्रकाशित की थी। देखें बेरोजगारी…

खबर में हमने बताया था कि त्रिमूर्ति ने सोशल मीडिया पर नामांकन के लिए उत्तराखंड के शिखर केल जंगल में आग लगाई थी फिर वीडियो सोशल मीडिया पर डाला था। गिरफ्तार युवा यशपाल जिले के मंझौलिया खंड के विसंबर पुर पंचायत के अगरवा गांव निवासी कलाम के पुत्र सलमान अंसारी (19), पारस सहनी के पुत्र सुकलाल सहनी (20), विद्याराम के पुत्र राम (18) हैं।

पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें करें।

यह स्पष्ट है कि दावा किया गया है कि उत्तराखंड के जंगलों में एक समुदाय विशेष द्वारा आग लगाई गई है और यह गलत है। फ़ेस न्यूज़ के हमारे ख़िलाफ़ साथ जुड़ें। किसी भी ऐसी जानकारी पर आपको संदेह हो तो हमें ईमेल करें @fakenewsexpose@dbcorp.in और व्हाट्सएप करें-9201776050​​​​

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