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- उत्तराखंड जंगल की आग पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई अपडेट; सुप्रीम कोर्ट | देहरादून समाचार
नई दिल्ली26 मिनट पहले
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उत्तराखंड के जंगल में लगी आग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में शनिवार 15 मई को फिर सुनवाई होगी। इससे पहले 8 जून को सुनवाई में शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा था कि बारिश या कृत्रिम वर्षा (क्लाउड सीडिंग) के बारे में धारणा नहीं बनाई जा सकती। इसकी शीघ्र रोकथाम के उपाय करें।
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट में अंतरिम स्टेटस रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की। उत्तराखंड सरकार ने जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच को बताया कि नवंबर 2023 से अब तक जंगल में आग लगने की 398 घटनाएं हो चुकी हैं। हर बार ये आग इंसानों ने छोड़े।
सरकार के वकील उपमहाधिवक्ता जतिंदर कुमार सेठी ने बताया कि उत्तराखंड के जंगलों का सिर्फ 0.1% हिस्सा ही आग उगल में है।
उत्तराखंड में अप्रैल के पहले सप्ताह से लगी आग से अब तक 11 जिले प्रभावित हैं। जंगल में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई और चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। आग से 1316 हेक्टेयर जंगल जल चुका है।

कोर्ट में सरकार ने बताया- 350 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें 62 लोगों के नाम भी शामिल हैं
- सरकार के वकील सेठी: आग के मामले में 350 अपराधियों के खिलाफ मामले दर्ज हैं, जिनमें 62 लोगों के नाम शामिल हैं। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड का 40% हिस्सा आग की चपेट में है, जबकि पहाड़ी इलाके का सिर्फ 0.1% हिस्सा ही आग में है।
- वॅवाड और एनवायर्नमेंटलिस्ट वकील राजीव गांधी: मैंने इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में भी पेश किया था। एनजीटी ने दो साल पहले उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
- जतिंदर सेठी: उत्तराखंड के जंगल में आग लगाना कोई नई बात नहीं है। हमारा वन विभाग हर ताप में इसका सामना करता है। हम इसके लिए लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म प्लान लॉन्च कर रहे हैं और इसे फॉलो कर रहे हैं। एयरफोर्स के आर्किटेक्ट भी आग्नेयास्त्रों में लगे हुए हैं।
- उन्नत राजीव गांधीवादी: राज्य सरकार क्रमिक रूप से बता रही है, समस्या हर जगह बहुत गंभीर है।
- न्यायमूर्ति बी आर गवई: आपको (राज्य सरकार) मामले में सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी को भी शामिल करना चाहिए।
कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और उत्पादों से कहा कि मामले की रिपोर्ट सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) से साझा करें और अपनी राय लें।
उत्तराखंड में आग से 1316 हेक्टेयर जंगल जल चुका
उत्तराखंड में अप्रैल के पहले सप्ताह से लगी आग से अब तक 11 जिले प्रभावित हैं। गढ़वाल मंडल के मंडल रुद्रप्रयाग, शिमला, उत्तरकाशी, निवेशकों से सबसे अधिक प्रभावित हैं और मंडल का कुछ हिस्सा इसमें शामिल है। जबकि कुमाऊँ मंडल का अभ्यारण्य, चंपावत, अपोलो, बागेश्वर, अमृतसर सर्वाधिक प्रभावित हैं।
वन विभाग, फायर ब्रिगेड, पुलिस के साथ-साथ सेना के जवान वापसी ऑपरेशन में लगे हुए हैं। आर्मी एरिया में एग्रीकल्चरल एयरफोर्स के एमआई-17 हेलिकॉप्टर की लीज में मदद की गई है।

3 पेंट में स्वीकृत, आग की लंबाई के कारण
- विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड में 15 फरवरी से 15 जून यानी 4 महीने का फायर सीजन होता है। मतलब फरवरी के मध्य से जंगल में आग लगने की घटनाएं शुरू हो जाती हैं, जो अप्रैल में तेजी से बढ़ती हैं। इसी 15 जून को बारिश शुरू हो जाती है और धीरे-धीरे बारिश खत्म हो जाती है।
- कुछ स्थानों पर आग लगने का कारण समुद्र के मौसम में कम बारिश और उथल-पुथल होना है। समुद्र तटीय समुद्र तट से समुद्र तट पर आग लगने की घटनाओं में वृद्धि होती है। कम एलिज़ाबेथ की वजह से पेरूल के स्टाल्स में सबसे ज्यादा आग लग रही है। पहाड़ों से पत्थर गिरने के कारण से भी बढ़ती हैं आग की घटनाएं।
- कुछ जगहों पर इंसानों द्वारा भी की जाने वाली घटनाएं होती हैं। जंगल में हरी घास उगाने के लिए स्थानीय लोगों को भी आग की घटनाओं का एहसास होता है। इन पर वन विभाग नजर रखता है।

एयरफोर्स के एमआई-17 आश्रम के आश्रम भीमताल से पानी लेकर आग बबूला हो रहे हैं।
आग लगने पर क्या कार्रवाई हुई
- मुख्यमंत्री पुस्तर सिंह धामी ने काम में लगे कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
- आग लगने के मामले में 383 मामले दर्ज हैं। इसमें 315 लोगों के खिलाफ अज्ञात मामले दर्ज हैं, जबकि 59 मामले दर्ज हैं।
- बार-बार इस आग की घटनाओं में ज्वालामुखी पाए जाने पर अलौकिक कृत्य के तहत कार्रवाई की जाएगी। फसल काटने के बाद पराली को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- शहरी क्षेत्र में जंगलों के आसपास के जंगलों में आग लगाने पर भी रोक लगा दी गई है।
- प्रदेशभर में आग की घटनाओं को रोकने के लिए 1438 फायर क्रूज स्टेशन बनाए गए हैं, जिसमें 4000 फायर ब्रिगेड की स्थापना की गई है।

तस्वीर 26 अप्रैल की है। जंगल के जंगल में लगी आग बुबई जा रही है।
आग्नेयास्त्रों के लिए क्या किया जा रहा है
- प्रदेशभर में 3700 कर्मचारियों को आग लगाने के लिए नियुक्त किया गया है। 4 महीने के फायर सीजन में वन फ्रेंड्स की विशेषता है।
- इसके अलावा पीआरडी मदद, बिजनेस, पीएससी, युवा और महिला मंगल आश्रमों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी ली जा रही है।
- आग के औजारों के लिए मुख्य रूप से झाँपा (हरे व्यापारियों की लकड़ी) लोहे और स्टील के झाँपा का उपयोग किया जाता है।
आग्नेयास्त्र के आश्रम को 3 तस्वीरें…

लछमोली से आगे ददुआ गांव के जंगल में लगी आग को फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने भड़काया।

कालिका के पास जंगल में लगी आग को भड़काती रानीखेत फायर यूनिट टीम।

फैक्ट्री फैक्ट्री गनियादौली के पास जंगल में लगी आग पर फायर फाइटर्स ने भौतिक विज्ञानी पाया।
क्या है क्लाउड सीडिंग
क्लाउड सीडिंग एक कृत्रिम वर्षा का एक तरीका है। हवाई जहाज़ से सिल्वर आयोडाइड या प्लास्टिक आइस को साधारण नमक के साथ क्रोमियम पर ख़त्म कर दिया जाता है। एक तरह से ये क्लाउड में बीज डाला जाता है। ये कण हवा से औषधि को सोखते हैं और कण कण इसकी मात्रा (द्रव्यमान) को बढ़ाते हैं। इसके बाद तूफान से बारिश की मोटी बूंदें और चमकने लगती हैं।
किसी भी सीज़न में क्लाउड सीडिंग नहीं होती। यानी तेज धूप हो और बादल ना हो तो ऐसे में कोई क्लाउड सीडिंग प्लेयर नहीं है। इसके लिए आकाश में कम से कम 40% बादल होना जरूरी है, थोड़ा बहुत पानी भी हो।
