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Uttarakhand Char DhamYatra 2024 Update Follow Badrinath’s Latest News, Photos, and Videos Updates On Dainik Bhaskar | बद्रीनाथ धाम के कपाट कुछ देर में खुलेंगे: ब्रह्ममुहूर्त में गणेश और द्वार पूजा हुई, 20 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

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23 मिनट पहले

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उत्तराखंड के चार धामों में शामिल बद्रीनाथ मंदिर में 6 महीने के लिए भक्तों के कप खोले जाते हैं, बाकी समय मंदिर की दुकानें बंद रहती हैं।  - दैनिक भास्कर

उत्तराखंड के चार धामों में शामिल बद्रीनाथ मंदिर में 6 महीने के लिए भक्तों के कप खोले जाते हैं, बाकी समय मंदिर की दुकानें बंद रहती हैं।

बद्रीनाथ धाम के कपाट के दर्शन के लिए कुछ देर बाद आएं। इससे पहले रविवार ब्रह्ममुहूर्त में सुबह 5 बजे मंदिर के बाहर गणेश पूजन किया गया। इसके बाद पुजारियों ने द्वार पूजा की। अब मंदिर के कपाट तीन चबियों से खुलेंगे।

कपाट खुलते ही पहले अलौकिक दर्शन ज्योति केहोगे। यह 6 महीने से जल रही है। इसके बाद बद्रीनाथ में घी से बना कंबल हटा दिया गया। जो 6 महीने पहले कपाट बंद होने के समय भगवान को ओढ़ाया जाता है। इस कंबल को प्रसाद के रूप में कहा जाता है। मंदिर के कपाट पिछले साल 14 नवंबर को बंद हुए थे।

कपाट रेस्तरां से पहले मंदिर को फूलों से उतारा गया

कपाट रेस्तरां से पहले मंदिर को फूलों से उतारा गया

6 से 8 बजे तक बिना श्रंगार वाले दर्शन
चारधाम तीर्थ पुरोहित पंचायत के मुखिया डॉ. ब्रजेश सती ने बताया कि सुबह 6 से रात 8 बजे तक भगवान के बिना श्रृंगार के दर्शन होंगे। जिसे निर्वाण दर्शन कहते हैं। इसके बाद रात 8 बजे पहला जलाभिषेक होगा और पहली पूजा प्रधानमंत्री के नाम से होगी।

इसके बाद 9 बजे बालभोग स्थान। दोपहर 12 बजे पूर्ण भोजन का भोग लगा। यही भाग ब्रह्मकपाल का भेजा हुआ है। दर्शन के बाद वहीं पहला पिंडदान होगा।

पहले दिन 20 हजार उद्यमियों की पहुंच की संभावना, 7 लाख लोगों ने किया नामांकन

  • टेम्पल को करीब 15 औपचारिक फूल बेचे गए हैं। पहले दिन दर्शन के लिए करीब 20 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है।
  • 11 से 13 मई तक मौसम और समुद्री आपदाओं के होने की चेतावनी विभाग ने जारी की है। बद्रीनाथ धाम दर्शन के लिए 9 मई की शाम तक कुल 6 लाख 83 हजार लोगों ने बुकिंग कराई है।

तीन चैबियों से खुला कपाट कालॉक
मंदिर के कपाट का ताला तीन चबूतरे से खुला। इनमें से एक अरेस्ट राजारबार, दूसरी चाबी बद्री-केदार मंदिर समिति के पास और तीसरी चाबी बद्रीनाथ धाम के रावल और पुजारियों के पास है, जिसमें हक-हकूकधारी कहा जाता है।

इससे पहले 11 मई की सुबह भगवान बद्रीनाथ की डोली पांडुकेश्वर मंदिर से निकली। पालकी में गरुड़ जी और पूर्वजों की गद्दी थी। पांडुकेश्वर मंदिर से डोली में कुबेर और उषा जी की चलित प्रतिमा भी शामिल हुई। डोली के साथ मंदिर के रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और पुत्र अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती थे। डोली 11 की शाम को मंदिर का दर्शन।

पालकी से आगे की सेना और पुलिस के युवा बैंड के साथ चल रहे थे।  पालकी को पूजा के लिए मंदिर के मुख्य द्वार तक लाया गया।

पालकी से आगे की सेना और पुलिस के युवा बैंड के साथ चल रहे थे। पालकी को पूजा के लिए मंदिर के मुख्य द्वार तक लाया गया।

बद्रीनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व और इतिहास
1. उत्तराखंड के सिक्किम जिले में यह मंदिर समुद्र तल से 3,133 मीटर की दूरी पर बना हुआ है। हर साल करीब 10 लाख हाथी बद्रीनाथ धाम की मूर्तियां हैं।
2. मंदिर में विष्णु भगवान के बद्रीनारायण स्वरूप की 1 मीटर की मूर्ति स्थापित है। इसमें श्री हरि के स्वंय प्रकट हुए 8 प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। सिद्धांत यह है कि भगवान विष्णु का ध्यान करने के लिए यहां एक शांत और प्रदूषण मुक्त स्थान की तलाश की गई थी।
3. इतिहास के अनुसार बद्रीनाथ धाम की स्थापना आदि पूर्वजों ने 9वीं शताब्दी में की थी। कहा जाता है कि आदि पूर्वजों ने ही अलकंदा से बद्रीनाथ की मूर्ति निकाली थी।
4. इस मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में भी है। वैदिक काल (1750-500 ईसा पूर्व) के मंदिर के बारे में पुराणों में भी बताया गया है।
5. भगवान बद्रीनाथ का तिल के तेल से अभिषेक होता है। इसके लिए तेल अर्थशास्त्री राज परिवार से आता है। बद्रीनाथ तारामंडल राज परिवार के आराध्य देव हैं। मंदिर की एक चाबी राज परिवार के भी करीब है।
6. बद्रीनाथ के पुजारी पुजारियों के वंशज होते हैं, वे रावल कहलाते हैं। केरल स्थित राघवपुरम गांव में नंबूदरी संप्रदाय के लोग रहते हैं। इसी गांव से रावल नियुक्त किए जाते हैं। इसका साक्षात्कार होता है अर्थात शास्त्रार्थ। रावल समलैंगिक ब्रह्मचारी रहते हैं।

इससे पहले 10 मई, शुक्रवार को गंगोत्री, यमुनोत्री और मंदिर धाम के कपाट खुले हैं और चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। केदारनाथ में पहले दिन का रिकॉर्ड 32 हजार अनुयायियों ने भगवान के दर्शन किये। पूरी खबर यहां पढ़ें



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