US Iran War: ईरान में सेना भेजेंगे ट्रंप? 65 परसेंट अमेरिकी मान रहे ऐसा होगा, सिर्फ 7% पब्लिक ही सपोर्ट में


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Will US Invade Iran: रॉयटर्स-इप्सोस के नए सर्वे के मुताबिक 65% अमेरिकियों को डर है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में बड़े पैमाने पर जमीनी सेना भेज सकते हैं. हैरानी की बात यह है कि केवल 7% लोग ही इस फैसले के समर्थन में हैं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल ने ट्रंप की लोकप्रियता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

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क्या ईरान की धरती पर कदम रखेगी अमेरिकी सेना? सर्वे के नतीजों से टेंशन में आ जाएंगे ट्रंप! (Photo : Reuters)

वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब जमीनी आक्रमण की तरफ बढ़ रहा है. रॉयटर्स-इप्सोस के हालिया सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अमेरिकी पब्लिक भी यही मान रही है. इस सर्वे में शामिल 65 परसेंट अमेरिकियों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में एक बड़ी जमीनी जंग के लिए अपनी सेना भेज सकते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि अमेरिकी जनता इस विचार के सख्त खिलाफ है. केवल 7 परसेंट लोगों ने ही इस संभावित कदम का समर्थन किया है. तीन दिनों तक चले इस सर्वे में 1,545 वयस्कों ने अपनी राय रखी है. इसमें ट्रंप की ओवरऑल रेटिंग 40 परसेंट पर टिकी हुई है. 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद इसमें मामूली बढ़त देखी गई थी.

क्या ईरान के तेल भंडार पर कब्जे की है तैयारी?

ट्रंप प्रशासन मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए हजारों सैनिकों की तैनाती पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसेना और वायु सेना का इस्तेमाल खाड़ी के देशों में तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए किया जा सकता है. सबसे ज्यादा चर्चा ईरान के खार्ग आइलैंड की हो रही है. यह द्वीप ईरान के 90 परसेंट तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है. चर्चा है कि ट्रंप यहां जमीनी सेना भेजकर ईरान की आर्थिक कमर तोड़ना चाहते हैं. जब ट्रंप से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि वह कहीं भी सेना नहीं भेज रहे हैं. उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी जोड़ दिया कि अगर वह ऐसा करते भी, तो मीडिया को कभी नहीं बताते.

युद्ध की आग में जल रहा मिडिल ईस्ट और महंगाई का डर?

पिछले तीन हफ्तों से मिडिल ईस्ट में जारी हिंसा में अब तक 2,000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इसमें 13 अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं. अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने भी कड़ा पलटवार किया है. इस टकराव का सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ा है. एनर्जी प्लांट्स पर हमलों की वजह से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. शेयर बाजार धड़ाम हो गए हैं और अमेरिका में एक बार फिर महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है. जनता को डर है कि कोविड के दौर जैसी महंगाई वापस आ सकती है.

क्या ट्रंप अपने चुनावी वादों से भटक गए हैं?

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान वादा किया था कि वह अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखेंगे. वह नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की इच्छा भी जता चुके हैं. लेकिन साल की शुरुआत में ही वेनेजुएला पर सैन्य हमले और अब ईरान के साथ संघर्ष ने उनकी छवि पर सवाल खड़े किए हैं. ट्रंप के अपने ‘MAGA’ आंदोलन के समर्थक भी इस युद्ध का विरोध कर रहे हैं. उन्हें डर है कि नवंबर में होने वाले मिडिल टर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. सर्वे के मुताबिक 59 परसेंट अमेरिकी इस युद्ध के खिलाफ हैं. इनमें से 20 परसेंट तो खुद रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक हैं.

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Deepak Verma

दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्‍य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें



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