US Iran War data : 13 US Soldiers Killed | अमेरिका ने पहली बार खोला राज, ईरान जंग में कितने मारे गए, कितना हुआ नुकसान?


वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ ने पहली बार उन आंकड़ों को सार्वजनिक किया है, जिसे अब तक दबाने की कोशिश की जा रही थी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिकी सेना को कितना भारी नुकसान हुआ है, इसका कच्चा चिट्ठा अब दुनिया के सामने आ गया है. पेंटागन के ‘डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम’ (DCAS) ने आधिकारिक तौर पर हो गई है कि इस जंग में अब तक कितने सैनिक मारे गए हैं और देश के कितना नुकसान हुआ है. ट्रंप प्रशासन की ‘ईरान नीति’ और युद्ध के मैदान में सीधे उतरने के फैसले ने अमेरिकी सैन्य इतिहास में एक नया और दर्दनाक अध्याय लिख दिया है.

US ने वॉर डेटा में क्या-क्या बताया?

इस रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के साथ जंग लड़ते हुए अब तक 13 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि सैकड़ों जवान जख्मी हुए हैं. पेंटागन के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस सैन्य अभियान में अमेरिकी सेना को उम्मीद से कहीं ज्यादा कड़े डिफेंस का सामना करना पड़ा है.

जारी किए गए डेटा के अनुसार, इस संयुक्त अभियान में 13 सैनिकों की मौत हुई है और 365 सैनिक बुरी तरह घायल हुए हैं. ये पहली बार है जब पेंटागन ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में हुए मारे गए लोगों का आधिकारिक डेटा शेयर किया है. अब तक इस संघर्ष की गंभीरता को लेकर केवल कयास लगाए जा रहे थे लेकिन इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ यह भिड़ंत अमेरिका के लिए कितनी महंगी साबित हो रही है.

किसको हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?

डीसीएएस (DCAS) की रिपोर्ट में घायल सैनिकों का जो ब्योरा दिया गया है, वो चौंकाने वाला है. युद्ध के मैदान में सबसे ज्यादा मार अमेरिकी थलसेना पर पड़ी है, जिसके 247 जवान घायल हुए हैं. इसके अलावा, नौसेना के 63, वायु सेना के 36 और मरीन कॉर्प्स के 19 जवान इस ऑपरेशन के दौरान जख्मी हुए हैं.

इन आंकड़ों से पता चलता है कि जमीनी लड़ाई में अमेरिकी सेना को ईरान की तरफ से कड़ा मुकाबला मिल रहा है. हालांकि ट्रंप प्रशासन इस ऑपरेशन के असल मकसद को अभी भी पूरी तरह साफ नहीं कर रहा है, लेकिन अस्पताल में भर्ती जवानों की संख्या जंग का रुख साफ बयां कर रही है.

ट्रंप की जिद में कहां पहुंचे हालात

इस सैन्य अभियान की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बाद की गई थी. शुरुआत में इसे एक ‘सीमित कार्रवाई’ बताया गया था, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं. पेंटागन का ‘डिफेंस मैनपावर डाटा सेंटर’ इन आंकड़ों का रखरखाव करता है, जो युद्ध में मारे गए, घायल या लापता सैनिकों का अंतिम और पुख्ता रिकॉर्ड होता है. जानकारों का मानना है कि ट्रंप सरकार ने शुरुआत में इन आंकड़ों को इसलिए सार्वजनिक नहीं किया ताकि देश के भीतर युद्ध के खिलाफ विरोध के स्वर न उठें. लेकिन अब जब संघर्ष लंबा खिंच रहा है, तो विभाग के लिए सच छिपाना मुमकिन नहीं रह गया है.



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