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US Iran Tension: अमेरिका ईरान पर संभावित टकराव के बीच अपने सबसे ताकतवर गैर-परमाणु बम GBU-57 MOP का जखीरा फिर से भर रहा है. 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर इस्तेमाल के बाद अब 100 मिलियन डॉलर की नई डील बोइंग के साथ की जा रही है. लेकिन क्या ये बम अमेरिका ईरान से तनाव के कारण खरीद रहा है?
अमेरिका खरीद रहा बंकर बस्टर बम.
वॉशिंगटन: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो दिखाता है कि एक बार फिर हमला हो सकता है. अमेरिकी वायुसेना अपने सबसे भारी और ताकतवर बंकर बस्टर बम GBU-57 MOP को फिर से खरीदने जा रही है. यह वही बम है जिसे पिछले साल ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के दौरान ईरान के फोर्दो और नतांज परमाणु ठिकानों पर गिराया गया था. यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी दस्तावेजों में कहा गया कि वायुसेना बोइंग के साथ करीब 100 मिलियन डॉलर की डील को अंतिम रूप दे रही है. यह डील सिंगल सोर्स यानी सीधे बोइंग को दी जा रही है क्योंकि यही कंपनी इस खास बम का निर्माण करती है. वायुसेना का कहना है कि अगर किसी और को ठेका दिया गया तो देरी होगी और तैयारियों पर असर पड़ेगा.
ऑपरेशन मिडनाइट हैमर क्या था?
22 जून 2025 को अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था. यह कार्रवाई इजरायल और ईरान के 12 दिन के युद्ध के बाद हुई थी. इस मिशन में सात B-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल हुआ. हर विमान ने दो-दो बम गिराए. कुल 14 MOP बम इस्तेमाल किए गए. ये बम 30,000 पाउंड यानी करीब 13,600 किलो वजन का होता है. इसमें 5,740 पाउंड का वारहेड होता है और यह मजबूत कंक्रीट को 200 फीट तक भेद सकता है. इसे खास तौर पर जमीन के नीचे बने ठिकानों, कमांड सेंटर और परमाणु फैसिलिटी को तबाह करने के लिए बनाया गया है.
अमेरिका क्यों खरीद रहा बंकर बस्टर बम?
वायुसेना के दस्तावेज में साफ लिखा है कि ऑपरेशन में इस्तेमाल हुए बमों की भरपाई जरूरी है. डिलीवरी जनवरी 2028 से शुरू होने की संभावना है. हालांकि कितने बम खरीदे जाएंगे, इसकी संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है. जानकारी के मुताबिक 2015 तक अमेरिकी वायुसेना के पास कम से कम 20 MOP बम थे. इसके बाद उत्पादन जारी रहा, लेकिन हाल के वर्षों में बड़ी खरीद की खबर नहीं थी. 2025 में पहली बार इन बमों का युद्ध में इस्तेमाल हुआ.
क्या ये आखिरी खरीद है?
अमेरिका अब नए जमाने का बंकर बस्टर विकसित कर रहा है, जिसे नेक्स्ट जेनरेशन पेनिट्रेटर यानी NGP कहा जा रहा है. इसे बी-21 रेडर जैसे नए स्टेल्थ बमवर्षकों के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा. फिलहाल NGP शुरुआती चरण में है. ऐसे में MOP की यह खरीद एक अस्थायी इंतजाम मानी जा रही है. यह खरीद ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में कहा कि परमाणु बातचीत जारी रहनी चाहिए, लेकिन समझौता न हुआ तो कार्रवाई होगी.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





