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एक रिपोर्ट के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप ने निजी तौर पर ईरान में सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिक भेजने के विकल्प पर चर्चा की है. हालांकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इस बीच 28 फरवरी से शुरू हुए अभियान में अमेरिका 3000 से ज्यादा ईरानी ठिकानों पर हमले कर चुका है.
वॉशिंगटन: ट्रंप ने निजी तौर पर ईरान में अमेरिकी सैनिक भेजने के विचार पर गंभीर रुचि दिखाई है. एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस विषय पर अपने सहयोगियों और रिपब्लिकन नेताओं के साथ चर्चा की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह योजना किसी बड़े पैमाने पर आक्रमण की नहीं है बल्कि विशेष रणनीतिक मिशनों के लिए सीमित संख्या में सैनिकों को तैनात करने पर केंद्रित है. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने युद्ध के बाद के ईरान के लिए एक संभावित योजना भी बताई है. इसमें ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना और एक नई ईरानी सरकार के साथ तेल उत्पादन में सहयोग करना शामिल हो सकता है, जो मौजूदा अमेरिका-वेनेजुएला तेल व्यवस्था के समान होगा.
व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि यह खबर अनाम स्रोतों के अनुमानों पर आधारित है और वे राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का हिस्सा नहीं हैं. ट्रंप हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं और यह कहना गलत है कि वे किसी एक विकल्प का समर्थन कर रहे हैं. इस सप्ताह ट्रंप ने न्यूयार्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जहां अन्य राष्ट्रपतियों ने जमीन पर सैनिक भेजने से इनकार किया है, वहीं उनका मानना है कि ‘शायद इसकी जरूरत न पड़े, लेकिन अगर जरूरत हुई तो यह विकल्प हो सकता है.’
3000 से ज्यादा टार्गेट पर हमला
इस बीच यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कमांड के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद से अमेरिकी बलों ने ईरान के अंदर 3,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं और 43 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया या नष्ट किया है. अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े हमले शुरू किए थे, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए. इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल को निशाना बनाते हुए मिसाइल व ड्रोन हमले जारी रखे हैं. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा है कि उनका देश युद्धविराम की मांग नहीं कर रहा और उसे वॉशिंगटन के साथ बातचीत का कोई कारण नहीं दिखता.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





