US and Chinese Fighter Jets Face Off Near Korean Peninsula, Tension Escalates | चीनी ड्रैगन को अमेरिकी F-16 ने ललकारा, समंदर के ऊपर घंटों चला हाई वोल्टेज ड्रामा, अमेरिका और चीन के फाइटर जेट्स के बीच तनातनी, कोरियन पेनिनसुला में बढ़ा युद्ध का खतरा


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चीनी जेट्स को अमेरिकी F-16 ने ललकारा, घंटों चला हाई वोल्टेज ड्रामा; पूरी कहानी

Agency:एजेंसियां

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साउथ कोरिया के पास समंदर के ऊपर अमेरिकी और चीनी फाइटर जेट्स के बीच तनातनी की खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. ओसान एयरबेस से उड़े 10 अमेरिकी F-16 विमानों को रोकने के लिए चीन ने तुरंत अपने फाइटर जेट्स रवाना कर दिए. हालांकि कोई सीधा टकराव नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने एशिया-पैसिफिक रीजन में भारी तनाव पैदा कर दिया है.

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AI की मदद से बनाई सांकेतिक तस्वीर

सियोल: साउथ कोरिया के पास येलो सी (Yellow Sea) के ऊपर अमेरिकी और चीनी फाइटर जेट्स के बीच अचानक हुई तनातनी ने ग्लोबल लेवल पर हड़कंप मचा दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साउथ कोरिया के ओसान एयरबेस से अमेरिका के करीब 10 F-16 लड़ाकू विमानों ने एक साथ उड़ान भरी. जैसे ही ये विमान एयर डिफेंस जोन के पास पहुंचे, चीन ने अपनी सुरक्षा के लिए तुरंत अपने फाइटर जेट्स को हवा में भेज दिया. हालांकि इस दौरान कोई गोलीबारी या सीधा फिजिकल टकराव नहीं हुआ, लेकिन दोनों देशों के पायलट एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए थे. साउथ कोरिया की मीडिया ने इसे एक गंभीर ‘एरियल स्टैंड-ऑफ’ करार दिया है. इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों महाशक्तियों के बीच रस्साकशी अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है.

ओसान एयरबेस से उड़े 10 अमेरिकी विमानों का मकसद क्या था?

अमेरिकी एयरफोर्स के F-16 विमानों ने सियोल से लगभग 60 किलोमीटर दूर प्योंगटेक के ओसान एयरबेस से टेकऑफ किया था. बताया जा रहा है कि यह एक सोची-समझी ड्रिल थी, जिसका प्लान पहले ही शेयर किया जा चुका था. ये विमान साउथ कोरिया और चीन के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन के बीच के इलाके में उड़ रहे थे. हालांकि अमेरिकी विमानों ने चीन की हवाई सीमा में एंट्री नहीं की, लेकिन चीन ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा माना. चीन के सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने दावा किया है कि उनकी सेना ने अमेरिकी गतिविधियों पर पूरी तरह नजर रखी और कानून के हिसाब से जवाब दिया.

क्या साउथ कोरिया को इस गुप्त मिशन की कोई जानकारी नहीं थी?

इस पूरी घटना में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि साउथ कोरिया की सेना इस ड्रिल का हिस्सा नहीं थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना (USFK) ने साउथ कोरिया को एक्सरसाइज की सूचना तो दी थी, लेकिन ऑपरेशनल प्लान या इसका असली मकसद शेयर नहीं किया था. साउथ कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि उन्हें उड़ान की डिटेल्स के बारे में एडवांस में कुछ नहीं पता था. यह स्थिति काफी अजीब है क्योंकि आमतौर पर दोनों देश मिलकर ही ऐसी एक्सरसाइज करते हैं. इससे संकेत मिलते हैं कि अमेरिका अब कुछ मिशन अकेले ही हैंडल करने की प्लानिंग कर रहा है.

ट्रंप की नई डिफेंस पॉलिसी से चीन क्यों परेशान है?

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन साउथ कोरिया पर अपनी रक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने का दबाव बना रहा है. पिछले महीने जारी हुई नेशनल डिफेंस स्ट्रेटजी में वॉशिंगटन ने संकेत दिया था कि अब साउथ कोरिया को नॉर्थ कोरिया के खिलाफ ‘प्राइमरी’ जिम्मेदारी लेनी होगी. अमेरिका अब केवल क्रिटिकल सपोर्ट देने तक ही सीमित रहना चाहता है. चीन को डर है कि अमेरिका की यह बदली हुई नीति और अचानक होने वाली ऐसी मिलिट्री ड्रिल्स उसके इलाके में तनाव को और ज्यादा बढ़ा सकती हैं.

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Deepak Verma

दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्‍य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें



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