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UPSC Aspirants Akanksha Singh Same Roll Number

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12 मिनट पहले

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बिहार के आरा की निंदा करें और यूपी के आरा की निंदा करें - दैनिक भास्कर

बिहार के आरा की निंदा करें और यूपी के आरा की निंदा करें

यूपीएससी सिविल सर्विस ए माइक्रोसॉफ्ट रिजल फ्लैट्स 2025 में एक ही रैंक पर दो कंपनियों ने दावा किया है। यूपीएससी द्वारा जारी मेरिट लिटराईट में AIR 301 पर प्रशंसा सिंह हैं, रोल नंबर 0856794 है। इस सिलेक्शन पर बिहार और यूपी से 2 अलग-अलग लड़कियों ने दावा किया है। इन दोनों भूमिकाओं का नाम रहस्य सिंह है।

बिहार के सत्यापन के कार्ड में गड़बड़ी है

डेली भास्कर ने दोनों जियॉल्ट्स के एडमिट कार्ड चेक करने के लिए केस की जांच की। यूपी के दंगल के इंटरव्‍यूप्‍यूम कॉल लेटर पर रोल नंबर 0856794 दर्ज करें। इस एडमिट कार्ड पर क्यूआर को मार्क्सकैन करने पर भी यही रोल नंबर दिख रहा है।

वहीं बिहार के आरा के सत्यनारायण सिंह ने भास्कर को अपना प्रीलिम्स टिकट एडमिट कार्ड उपलब्ध करा दिया। हालाँकि, इस पर भी रोल नंबर 0856794 ही लिखा हुआ दिख रहा है। मगर क्यूआर मार्किटकैन करने के लिए रोल नंबर 085659 दिख रहा है।

ऐसे में या तो यूपीएससी की ओर से एडमिट कार्ड जारी करने में कोई गड़बड़ी हुई है, या फिर बिहार की ओर से एडमिट कार्ड जारी करने में कोई गड़बड़ी हुई है। इस मामले में अभी तक यूपीएससी की ओर से कोई दस्तावेजीकरण नहीं आया है।

बिहार के निशान का एडमिट कार्ड बनायें, यूपी के निशान का एडमिट कार्ड बनायें

बिहार के निशान का एडमिट कार्ड बनायें, यूपी के निशान का एडमिट कार्ड बनायें

यूपी की तरफ से कहा गया- अब कोई कंफ्यूजन नहीं

यूपी का खुलासा, पटना एम्स से एमबीबीएस, एमएस की पढ़ाई पूरी। इसके बाद यूपीएससी की तैयारी जारी की गई। ये उनका दूसरा प्रयास था.

यूपी का खुलासा, पटना एम्स से एमबीबीएस, एमएस की पढ़ाई पूरी। इसके बाद यूपीएससी की तैयारी जारी की गई। ये उनका दूसरा प्रयास था.

उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के रंजीत सिंह की बेटी ने डेली भास्कर को बताया कि उसने 0856794 रोल नंबर से अगस्त 2025 में और 4 फरवरी 2026 को साक्षात्कार दिया था।

सुझाव ने कहा- मुझे स्पष्ट है कि यह परिणाम मेरा है, आप मेरे एडमिट कार्ड पर दर्ज कोड या रोल नंबर से जांच कर सकते हैं। यूपीएससी की साइट पर कोई संदेह नहीं है। मीडिया में मिस इन्फोर्मेशन हुआ है। पूरा मामला क्लियर हो चुका है कि ये रिजल्ट मेरा है। आरा की रहने वाली साज़िश को लगता है कि नतीजा उसका है तो सामने आकर इस बात का खंडन करें और ड्रूम के साथ। मुझे नहीं पता कि आरा के निरीक्षण ने किस आधार पर रिजल्ट देखा है।

मेरे पास इसी रोल नंबर से लेकर तीन टेस्ट तक दिए गए हैं। मेरे पिता हर बार मुझे एग्ज़ॉमेट दिलवाते हैं। जब मैंने फॉर्म भरा था तब मुझे यह रोल नंबर मिला था।

बिहार के इम्तिहान ने कहा- ये मेरी यूपीएससी की गलती नहीं है

बिहार के तीरंदाज़ सिंह रिवायत सेना वाले ब्रह्मेश्वर सिंह नीके मुखिया की पोती हैं।

बिहार के तीरंदाज़ सिंह रिवायत सेना वाले ब्रह्मेश्वर सिंह नीके मुखिया की पोती हैं।

बिहार के भोजपुर जिले के अगिआंव खंड के खोपीरा गांव में रहने वाली हैं। हालाँकि, उनका परिवार आरा शहर के कटिरा जनजाति में रहता है। अंत की प्रारंभिक शिक्षा आरा के कैथोलिक मिशन स्कूल से हुई। उन्होंने साल 2017 में स्कोर की परीक्षा दी और 80 प्रतिशत नंबर जारी किए।

वर्ष 2019 में बेबी (विज्ञान) की परीक्षा में 81 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। आगे की पढ़ाई जारी हुई साल 2022 में अंग्रेजी से ग्रेजुएशन किया गया, जिसमें 64 प्रतिशत अंकों के साथ पहली बार प्रवेश किया गया।

दैनिक भास्कर से बातचीत में विवेचना ने बताया- मेरा जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण है और मैंने सीमित सामग्री के बीच कड़ी मेहनत और लग्न से यह कहां हासिल किया है। मेरे पिता इन कुमारडू ह्यूस्टन सिंह किसान हैं और मां रिंकू देवी घर पर रहती हैं।

बिहार के दुश्मन सेना वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती हैं

निरीक्षण सिंह बिहार की रिवायत सेना वाले ब्रह्मेश्वर सिंह नीक मुखिया की पोती हैं। भोजपुर जिले के खोपीरा गांव में रामबालक सिंह के घर 13 मार्च 1947 को जन्में ब्रह्मेश्वर सिंह बिहार में जातिगत युद्ध का निर्णायक चेहरा थे। साल 1960 में अदृश्य राज आया तो र्निविरोध मुखिया चुने गए, 30 साल तक खोपीरा के मुखिया रहे। टाइटल मुखिया का मिलाप, पहचान ब्रह्मेश्वर मुखिया बने। वफादारों और बड़े किसानों के बीच खूनी संघर्षों में हथियार उठाए गए और बड़े आंदोलन का बिगुल दिया गया।

1994 में बनी क्रांतिकारी सेना

वर्ष 1994 में रिवाइवल सेना का गठन किया गया, इसमें निम्न जाति के जमींदारों की निजी सेना शामिल थी। ब्रह्मेश्वर मुखिया ने कुछ ही समय में बिहार में बड़ा जनाधार तैयार कर लिया। इस बीच मुखिया और उनकी सेना पर बार-बार नरसंहार का आरोप लगा। वह 9 वर्ष तक जेल में रहा, परन्तु पहिले बेल मिली, और फिर बोर हो गया।

1995 में बिहार सरकार ने रिवाइवल सेना पर प्रतिबंध लगा दिया

बिहार सरकार ने जुलाई 1995 में रेलवे सेना पर प्रतिबंध लगा दिया। 2005 में नीतीश कुमार की सरकार आने के बाद बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरने लगी। अविश्वास प्रस्ताव दस्तावेज़ीकरण। इस बारे में सीनियर जर्नलिस्ट प्रियनायण राणेन मित्र हैं, ‘2005 के बाद की क्रांतिकारी सेना का कोई इतिहास आपको नहीं मिलेगा।’

‘सेना का मकसद पूरा होना लगा, तो उसकी संतान भी खत्म हो गई।’ 1 जून 2012 को आरा में ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या ने एक बार फिर पूरे बिहार को हिलाकर रख दिया।’

2012 में मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई हत्या

जनाधार और राजनीतिक द्वेष में 1 जून 2012 को आरा के कतिरा मोड़ पर मार्निंग वॉक के दौरान 70 साल की उम्र में ब्रह्मेश्वर मुखिया को नारे से छलनी कर दिया गया था।

इस घटना में आरा से लेकर पटना तक की आग में जला दिया गया। घटना ऐसी कि बिहार पुलिस को एक साल में कोई सुराग नहीं मिला और 10 साल में पहुंचने में कोई सुराग नहीं लगा।

तब के डीजीपी अभयानंद चौधरी ने कहा था, ‘ब्रह्मेश्वर मुखिया की शव यात्रा में घाटों के बीच किसी भी नेता का मेरे पास फोन नहीं आया था. मुखिया की हत्या के साथ ही रिवाइवल सेना खत्म हो गई। उनका पूरा संगठन बिखर गया।’

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यूपीएससी ने सिविल सर्विस ए माइक्रोसॉफ्ट 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी किया है। राज प्रकाशन के चित्तौड़गढ़ में रावतभाटा के अनुज अग्निहोत्री ऑल इंडिया टॉप पर हैं। 958 भाषाओं के लिए अलग-अलग शिलालेख अंकित हैं। रिजल सुपरमार्केट वेबसाइट upsc.gov.in पर उपलब्ध है। पूरी खबर पढ़ें…



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