Trump 200 Billion dollar War Bill | ईरान से जंग में खाली हुए ट्रंप के खजाने वॉर फंड के लिए कांग्रेस के आगे फैलाया हाथ


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ईरान के खिलाफ जारी युद्ध ने अमेरिकी खजाने पर भारी बोझ डाल दिया है, जिसके चलते पेंटागन ने संसद से 200 बिलियन डॉलर के फंड की मांग की है. इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर किए जा रहे हमलों में अमेरिका के सटीक मार करने वाले हथियारों का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है, जिससे निपटने के लिए अब भारी निवेश की जरूरत बताई जा रही है.

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ईरान जंग के बीच ट्रंप ने मांगा वॉर फंड

वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट की जंग अब केवल मिसाइलों और ड्रोन्स तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका के खजाने को भी खाली करने लगी है. डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को जारी रखने के लिए अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस से 200 बिलियन डॉलर के भारी-भरकम ‘वॉर फंड’ की मांग की है. पिछले तीन हफ्तों से ईरान पर हो रही भीषण बमबारी ने अमेरिका के हथियारों के गोदाम खाली कर दिए हैं, जिसे भरने के लिए अब पेंटागन ने हाथ फैला दिए हैं.

पेंटागन की वॉर चेस्ट की मांग

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की साझा एयरस्ट्राइक ने ईरान के हजारों ठिकानों को तबाह तो किया है, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाले ‘प्रिसिजन वेपन्स’ का स्टॉक अब खत्म होने की कगार पर है.
चौंकाने वाली बात यह है कि इस युद्ध के पहले ही हफ्ते में अमेरिका ने 11 बिलियन डॉलर यानी 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा फूंक दिए थे. डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीवन फिनबर्ग इस कोशिश में जुटे हैं कि अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री को इतनी फंडिंग मिले कि वे युद्ध की गति के हिसाब से गोला-बारूद तैयार कर सकें.

राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही 1.5 ट्रिलियन डॉलर का कुल रक्षा बजट पेश किया है, जो पिछले साल से 50% ज्यादा है. अब यह 200 बिलियन डॉलर यानी 16.5 लाख करोड़ रुपये के एक्स्ट्रा फंड की मांग आग में घी का काम कर रही है.

ट्रंप की मांग पूरी होगी या नहीं?

पेंटागन की इस मांग ने अमेरिकी राजनीति में भूचाल ला दिया है. जानकारों का मानना है कि इसे पास कराना आसान नहीं होगा. डेमोक्रेट्स इस युद्ध में अमेरिकी भागीदारी के सख्त खिलाफ हैं, वहीं आम जनता में भी युद्ध को लेकर समर्थन लगातार घट रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ पैसा झोंकने से हथियार रातों-रात तैयार नहीं हो जाते. अगर यह पैसा मंजूर नहीं हुआ, तो अमेरिकी सेना की वैश्विक ताकत कमजोर पड़ सकती है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक, यह फंडिंग रिक्वेस्ट वाशिंगटन में इस बात का लिटमस टेस्ट होगी कि अमेरिका इस जंग को और कितना लंबा खींचना चाहता है.

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Utkarsha SrivastavaChief Sub Editor

उत्कर्षा श्रीवास्तव डिजिटल जर्नलिस्ट हैं और जियो-पॉलिटिक्स टॉपिक्स पर लिखती हैं, वो वर्तमान में News18 Hindi के World सेक्शन में कार्यरत हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में 10+ वर्षों का अनुभव है, इस दौरान उन्होंने क…और पढ़ें





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