किस संगठन को ड्रोन ट्रेनिंग दे रहे थे अमेरिकी और यूक्रेनी, कैसे मिजोरम बना ‘लॉन्चपैड’? NIA ने बेनकाब किया राज


नई दिल्ली: सोचिए, सात विदेशी, एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक भारत में टूरिस्ट वीजा पर एंट्री करते हैं. दिखने में आम यात्री नजर आते हैं लेकिन इरादा बेहद खतरनाक. मिजोरम पहुंचे वो भी बिना परमिट के. फिर चुपचाप म्यांमार सीमा पार किया और वहां शुरू हुआ असली खेल. ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग, हथियारों की जानकारी. और टारगेट पूर्वोत्तर भारत में स्थिरता को हवा देना. NIA की जांच ने जो खुलासा किया, उसने इस पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है. यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र की परतें खोलने जैसा है.

यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि इसमें विदेशी नागरिकों का सीधा हस्तक्षेप सामने आया है. मिजोरम को एक ‘लॉन्चपैड’ की तरह इस्तेमाल किया गया. सीमा पार जाकर म्यांमार में सक्रिय कुकी-चिन सशस्त्र समूहों को आधुनिक तकनीक सिखाई गई. सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ ट्रेनिंग थी या भारत विरोधी गतिविधियों की बड़ी तैयारी? NIA की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि यह नेटवर्क गहरा है, संगठित है और इसके तार कई देशों से जुड़े हो सकते हैं.

यह मामला भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी भी है और एक सफलता भी.

क्या है मामला, क्यों हुआ NIA का एक्शन, कैसे काम कर रहा था नेटवर्क

  • अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक गिरफ्तार हुए.
  • टूरिस्ट वीजा पर भारत आए, फिर मिजोरम में बिना PAP के दाखिल.
  • मिजोरम से म्यांमार बॉर्डर पार कर कुकी-चिन जातीय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग.
  • ड्रोन वॉरफेयर, हथियार संचालन और जेमिंग टेक्नोलॉजी सिखाई.
  • यूरोप से ड्रोन कंसाइनमेंट भारत के रास्ते म्यांमार भेजे गए.
  • कुल 14 यूक्रेनी नागरिकों के नेटवर्क का खुलासा.
  • गुवाहाटी होते हुए मिजोरम तक पहुंचने का रूट इस्तेमाल.
  • स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क की भी जांच जारी.

NIA की टीमें सीमा पर सक्रिय, और गिरफ्तारी संभव

  • यह पूरा ऑपरेशन बेहद योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था. अलग-अलग तारीखों में भारत आना. अलग-अलग शहरों से एंट्री लेना. फिर गुवाहाटी के जरिए मिजोरम पहुंचना. यह रूट इसलिए चुना गया क्योंकि यहां निगरानी अपेक्षाकृत कम मानी जाती है. इसके बाद बिना प्रोटेक्टेड एरिया परमिट के सीमा पार करना और म्यांमार के अंदर जाकर ट्रेनिंग देना. यह दिखाता है कि इस नेटवर्क को जमीनी स्तर पर भी मजबूत सहयोग मिल रहा था.
  • जांच में यह भी सामने आया है कि यह सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं था. ड्रोन टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर, उपकरणों की सप्लाई और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सब कुछ एक संगठित ढांचे के तहत किया जा रहा था. इसका मकसद सिर्फ म्यांमार के भीतर गतिविधियां चलाना नहीं, बल्कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय विद्रोही समूहों को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत करना भी हो सकता है.

गिरफ्तार लोगों की पूरी लिस्ट (नाम और देश):

मैथ्यू एरन वैन डाइक (अमेरिकी नागरिक) को कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि वह एक पूर्व मर्सेनरी है और उसका बैकग्राउंड सीरिया, इराक और यूक्रेन जैसे संघर्ष क्षेत्रों से जुड़ा रहा है. NIA उसे इस पूरे साजिश का मुख्य कड़ी मान रही है. इसके अलावा यूक्रेन के नागरिकों में हुरबा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होनचारुक मक्सिम और कामिंस्की विक्टर को भी गिरफ्तार किया गया है, जो इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं.

मिजोरम को ‘लॉन्चपैड’ कैसे बनाया गया?

मिजोरम की भौगोलिक स्थिति इस पूरे ऑपरेशन में अहम रही. यहां से म्यांमार की सीमा आसानी से पार की जा सकती है. जांच में सामने आया है कि विदेशी नागरिकों ने इस रूट का फायदा उठाया. स्थानीय नेटवर्क की मदद से उन्होंने आवाजाही को आसान बनाया और इसे एक सुरक्षित ट्रांजिट प्वाइंट में बदल दिया.

कुकी-चिन समूहों को ट्रेनिंग देने का क्या मतलब है?

कुकी-चिन जातीय सशस्त्र समूह पहले से ही म्यांमार में सक्रिय हैं. अगर उन्हें ड्रोन और आधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग मिलती है, तो उनकी ताकत कई गुना बढ़ सकती है. इसका असर सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है, खासकर जहां पहले से तनाव की स्थिति रही है.

क्या यह सिर्फ सात लोगों का मामला है?

नहीं जांच में सामने आया है कि यह एक बड़ा नेटवर्क है. 14 यूक्रेनी नागरिकों की भागीदारी का संकेत मिला है. इसके अलावा स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आ सकते हैं. यानी यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा हो सकता है.

आगे क्या होगा? जांच की दिशा

  • अब इस मामले में जांच तेजी से कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है. NIA डिजिटल फुटप्रिंट और कम्युनिकेशन चैनल्स की गहराई से जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क के लिंक और कनेक्शन सामने आ सकें. साथ ही म्यांमार की जांच एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है. इससे सीमा पार गतिविधियों की सटीक जानकारी मिल सके. एजेंसी स्थानीय सपोर्ट सिस्टम की भी पहचान कर रही है, क्योंकि बिना जमीनी मदद के इस तरह का ऑपरेशन संभव नहीं माना जा रहा. UAPA के तहत केस दर्ज होने के चलते कानूनी कार्रवाई सख्त होगी और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी संभव हैं. इसके अलावा मिजोरम-म्यांमार सीमा पर निगरानी और कड़ी कर दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी घुसपैठ या साजिश को समय रहते रोका जा सके.
  • यह मामला भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी भी है और एक सफलता भी. चेतावनी इसलिए कि विदेशी नेटवर्क अब नई तकनीकों के जरिए घुसपैठ की कोशिश कर रहे हैं. सफलता इसलिए कि समय रहते इस साजिश को पकड़ लिया गया. आने वाले समय में यह जांच और भी बड़े खुलासे कर सकती है.



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