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हाल ही के दिनों में भारतीय रेलवे ने टिकटों में हेराफेरी या एआई से बने टिकटों के कई मामले पकड़े हैं. इस तरह जालसाजी के मामले रेलवे के राजस्व के लिए ठीक नहीं है. इसी को ध्यान में रखते हुए और ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए रेलवे ने तैयारी शुरू कर दी है.
खास तरीके से की जाएगी पहचान.
नई दिल्ली. हाल ही के दिनों में भारतीय रेलवे ने टिकटों में हेराफेरी या एआई से बने टिकटों के कई मामले पकड़े हैं. इस तरह जालसाजी के मामले रेलवे के राजस्व के लिए ठीक नहीं है. इसी को ध्यान में रखते हुए और ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए रेलवे ने तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए रेलवे स्टाफ को भी ट्रेंड किया जा रहा है, जिससे इस तरह के टिकटों की पहचान भी आसानी से की जा सके.
उत्तर मध्य रेलवे के आगरा डिवीजन द्वारा पारदर्शिता और टिकटिंग तकनीक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यूटीएस और एटीवीएम टिकटों में होने वाले संभावित फ्रॉड की रोकथाम के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में डिवीजन के विभिन्न प्रमुख स्टेशनों आगरा फोर्ट, ईदगाह, मथुरा जंक्शन, आगरा कैंट और धौलपुर जंक्शन से संबंधित चेकिंग स्टाफ और कमर्शिलय विभाग के कर्मचारी शामिल हुए.
कार्यशाला के दौरान अनरिजर्व टिकट और आटोमैटिक टिकट वेडिंग मशीन के माध्यम से जारी टिकटों के दुरुपयोग पर चर्चा की गई. उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को टिकटिंग प्रक्रिया में संभावित फ्राड, अनियमितताओं की पहचान करने, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा तकनीकी और व्यावहारिक उपायों के माध्यम से फ्रॉड को रोकने के तरीके बताए गए.
इतना ही नहीं चेकिंग स्टाफ को यात्रियों के टिकटों के जांच की प्रक्रिया को और अधिक बेहतर करने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा सतर्कता बरतने के लिए कहा गया. कार्यशाला में यह भी जोर दिया गया कि टिकटिंग प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है तथा इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारतीय रेलवे धीरे-धीरे इस तरह के कार्यशाला का आयोजन दूसरे डिवीजनों में भी करेगा, ट्रेन टिकटों के फजीवाड़े कम से कम हो सकें या जीरो किए जा सकें. जिससे रेलवे के राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा.





