28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध से बेशक ईरान में तबाही का मंजर हो. खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई हो. इजरायल और अमेरिका को बड़े झटके लगे हों लेकिन दुनिया के 3 शख्स ऐसे हैं, जिन्होंने इस युद्ध के दौरान ही हजारों लाखों करोड़ रुपए मुनाफे के पीट डाले हैं. इनमें दो लोग रूसी हैं तो तीसरा एक अमेरिकी. इस युद्ध ने उनकी और उनकी कंपनियों की पौबारह करा दी है. नोट छापने वाली मशीन भी इतनी स्पीड से पैसा नहीं छापती होगी, जिस तरह 28 दिनों में उन लोगों ने कर डाला होगा. इसमें एक शख्स तो मामूली कर्मचारी से सबसे धनी बना तो बाकी दोनों ही साधारण स्थितियों से पॉवरफुल बन गए.
तो आपको बता देते हैं कि ये तीन लोग कौन हैं. इनके नाम हैं वागित अलेक्पेरोव, इगोर सेचिन और जेम्स डी टैकलेट. इसमें पहले दो नाम रूसी हैं और तीसरा नाम अमेरिका के सबसे ताकतवर लोगों में एक का है. जो ऐसी कंपनी चलाता है, जिसका टर्नओवर ही दुनिया के कई देशों की इकोनॉमी के बराबर होगा. तो आप सोच रहे होंगे ये तीनों शख्स कैसे मालामाल हो गए, ये करते क्या हैं. ईरान युद्ध से इन्हीं तीन की लॉटरी कैसे खुली. इन्हीं की तिजोरियां कैसे तेजी से भरीं.
वागित अलेक्पेरोव, इगोर सेचिन और जेम्स डी. टैकलेट ग्लोबल एनर्जी और डिफेंस सेक्टर के बड़े शूरमा हैं, इन तीनों के लिए दुनिया की राजनीतिक अस्थिरता और युद्ध अक्सर मुनाफे का पैगाम लाते हैं.
रूस की सबसे बड़ी निजी तेल कंपनी के मालिक
वागित अलेक्पेरोव रूस की सबसे बड़ी निजी तेल कंपनी ल्युकऑयल के मालिक हैं. उनका एक पूर्व तेल रिग कर्मचारी से रूस के सबसे अमीर व्यक्ति बनने तक का उनका सफर फिल्मी है. ईरान संघर्ष के कारण जब वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई तो आधी दुनिया को तेल उनकी कंपनी देने लगी. इस दौरान तेल की कीमतों में दोगुने से ज्यादा का उछाल आ गया. ये उछाल अलेक्पेरोव की ल्युकऑयक जैसी कंपनी के लिए सीधा मुनाफा है. ये कहा जा रहा है कि उनकी कंपनी रोज हजारों करोड़ रुपए तेल बेचने से कमा लिये हैं.
वागित ने अपना करियर तेल रिंग में एक कर्मचारी के तौर पर शुूरू किया लेकिन तरक्की करते हुए टॉप पर पहुंच गए.
तेल की कीमतों में $1 की वृद्धि ही इनकी संपत्ति में करोड़ों का इजाफा कर देती है. अलेक्पेरोव अपनी बेहद लग्जरी जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं. उनके पास विशाल सुपरयॉट है, जिसकी कीमत करीब 650 करोड़ रुपये से अधिक है. दुर्लभ सिक्कों का एक विशाल संग्रह है, अपनी एक निजी म्यूजियम है. वह शाही जिंदगी जिंदगी जीते हैं.
दूसरे शख्स रूस के एनर्जी किंगमेकर
इगोर सेचिन भी रूस में एक श्रमिक के घर पैदा हुए. अनुवादक और क्लर्क के तौर पर काम किया. फिर पुतिन के संपर्क में आकर केजीबी के जासूस बने. वह हमेशा पुतिन के खास व्यक्ति रहे.
रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के सीईओ हैं. कंपनी को जितना फायदा होता है, उनका बोनस भी उतना उछलता है. वेतन और मोटा होता चला जाता है. वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन के सबसे करीबी सहयोगियों में एक माने जाते हैं. इन्हें रूस के ऊर्जा क्षेत्र का ‘किंगमेकर’ कहा जाता है. ईरान पर प्रतिबंधों और युद्ध की स्थिति के कारण दुनिया के कई देश रूसी तेल पर अधिक निर्भर हो गए. रोसनेफ्ट ने तुरंत अपने तेलों के दाम दोगुने से ज्यादा कर दिए.
सेचिन की ताकत केवल पैसों में नहीं, बल्कि वैश्विक तेल राजनीति को नियंत्रित करने में भी है. सेचिन को अक्सर ‘डार्थ वेडर’ कहा जाता है क्योंकि वह बेहद प्रभावशाली और रहस्यमयी हैं. उनकी जीवनशैली शाही है. उनके पास सैकड़ों करोड़ की सुपरयॉट्स रही हैं. उनकी सालाना आय और भत्ते इतने अधिक हैं कि उनकी गणना करना भी मुश्किल है.
जेम्स डी टैकलेट दुनिया की सबसे बड़ी हथियार कंपनी लॉकहीड मार्टिन के सीईओ हैं. वह पहले अमेरिकी वायुसेना में पॉयलट थे. फिर तरक्की करते हुए अमेरिका के सबसे ताकतवर लोगों में शुमार हो गए.
तीसरा दुनिया के हथियारों का सबसे बड़ा सौदागर
जेम्स डी. टैकलेट अमेरिकी हैं. वह दुनिया के हथियारों के सबसे बड़े सौदागर हैं. टैकलेट दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन के सीईओ हैं. यह वही कंपनी है जो F-35 लड़ाकू विमान, मिसाइल डिफेंस सिस्टम थाड और जावलिन मिसाइलें बनाती है. जब भी कहीं युद्ध होता है, मिसाइलों और रक्षा प्रणालियों की मांग आसमान छूने लगती है.
ईरान संघर्ष के कारण अमेरिका और उसके सहयोगियों ने हथियारों के नए ऑर्डर दिए हैं. हालिया आंकड़ों के अनुसार, लॉकहीड मार्टिन के शेयरों में भारी उछाल आया है. कंपनी के पास अरबों डॉलर का ‘बैकलॉग’ जमा है. कंपनी को जितना फायदा होता है, टैकलेट का बोनस और सैलरी भी उतनी ही बढ़ती है.
टैकलेट की लाइफस्टाइल एक हाई-प्रोफाइल अमेरिकी कॉर्पोरेट दिग्गज की तरह है. उनकी कुल संपत्ति करोड़ों डॉलर में है. वह आलीशान मैनहट्टन अपार्टमेंट्स में रहते हैं. गोल्फ क्लब्स के शौकीन हैं. उनका समय ज्यादातर प्राइवेट जेट्स और पेंटागन के अधिकारियों के साथ मीटिंग्स में बीतता है.
मामूली कर्मचारी से सबसे धनी शख्स
वागित अलेक्पेरोव की एक साधारण तेल कर्मचारी से रूस के सबसे अमीर व्यक्ति बनने का सफर किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है. उनकी इस सफलता के पीछे केवल किस्मत नहीं, बल्कि गहरी तकनीकी समझ और सोवियत संघ के पतन के दौरान बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों का चतुराई से इस्तेमाल था. उनके पिता भी तेल कर्मचारी थे. 1974 में इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद उन्होंने कैस्पियन सागर में एक ड्रिलिंग ऑपरेटर के रूप में काम शुरू किया.
वागित के पिता भी तेल कर्मचारी थे. 1974 में इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद उन्होंने कैस्पियन सागर में एक ड्रिलिंग ऑपरेटर के रूप में काम शुरू किया.
एक बार तेल के कुएं में विस्फोट होने के कारण वह समुद्र में जा गिरे. डूबते-डूबते बचे. ‘ग्राउंड लेवल’ के अनुभव ने उन्हें तेल उद्योग की बारीकियों को समझने में मदद की. 1979 में उन्हें पश्चिमी साइबेरिया भेजा गया, जो सोवियत संघ का नया तेल हब बन रहा था. यहां उन्होंने बड़ी कंपनियों में काम किया. तरक्की की सीढ़ियां तेजी से चढ़ीं. 1987 तक एक कंपनी के जनरल डायरेक्टर बन गए. उनकी प्रतिभा को देखते हुए केवल 39 साल की उम्र में उन्हें सोवियत संघ का उप तेल और गैस मंत्री बनाया गया.
उन्होंने रूस के तीन बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों की नींव रखी और एक कंपनी ल्यूकऑयल खड़ी की. जब सोवियत संघ टूटने के बाद रूस में निजीकरण की लहर आई, तो अलेक्पेरोव ने सरकार में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इसे निजी कंपनी में बदल दिया. खुद प्रमुख बन गए. उसके बाद उसके मालिक बन गये.
आज उनकी कुल संपत्ति 2.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो उन्हें रूस का सबसे अमीर व्यक्ति बनाती है.
बाकी दोनों भी फर्श से अर्श तक पहुंचे
इगोर सेचिन और जेम्स डी. टैकलेट भी सेल्फ-मेड व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और रणनीतिक संबंधों के दम पर दुनिया के सबसे शक्तिशाली पदों को हासिल किया. इगोर रूस में एक जासूस और अनुवादक थे. अब ‘किंगमेकर’ हैं. उनका जन्म लेनिनग्राद के एक साधारण श्रमिक परिवार में हुआ. 1980 के दशक में एक भाषाई अनुवादक के रूप में करियर शुरू किया. मोजाम्बिक और अंगोला के गृहयुद्धों के दौरान सोवियत सेना के लिए पुर्तगाली अनुवादक के रूप में काम किया. इसके बाद वह सोवियत खुफिया एजेंसी KGB के संपर्क में आए.
पुतिन के खास आदमी
1990 के दशक की शुरुआत में वह सेंट पीटर्सबर्ग नगर पालिका में एक मामूली क्लर्क थे. यहीं उनकी मुलाकात व्लादिमीर पुतिन से हुई. जब पुतिन मॉस्को गए, तो सेचिन उनके साये की तरह साथ रहे. उन्होंने पुतिन के चीफ ऑफ स्टाफ और उप प्रधानमंत्री के रूप में काम किया.2012 में उन्हें रोसनेफ्ट का सीईओ बनाया गया. उन्होंने अपनी राजनीतिक शक्ति का इस्तेमाल कर छोटी तेल कंपनियों को रोसनेफ्ट में मिला लिया. उसे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक तेल कंपनी बना दिया.
पायलट से ‘हथियारों के सौदागर’ तक
टैकलेट का सफर योग्यता और तेजी से कॉर्पोरेट सीढ़ी चढ़ने का है. टैकलेट ने करियर की शुरुआत अमेरिका की वायु सेना में एक पायलट के रूप में की. गल्फ वॉर के दौरान भारी मालवाहक विमान उड़ाए. फिर दो कंपनियों में मध्यम स्तर के मैनेजर बने. दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी में 17 साल तक काम किया. उसे वैश्विक ताकत बनाया. उनके सैन्य अनुभव और कॉर्पोरेट सफलता के मिश्रण को देखते हुए 2020 में उन्हें लॉकहीड मार्टिन का सीईओ चुना गया.





