उन्होंने आगे कहा कि जब पहले रुपये की कीमत में गिरावट आती थी, तब प्रधानमंत्री खुद कहा करते थे कि इससे देश की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। अब जब रुपये की कीमत लगातार कमजोर हो रही है, तो सरकार इस पर चुप क्यों है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस समय देश की प्रतिष्ठा पर पड़ रहे असर को लेकर सरकार क्या सोच रही है और रुपये को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
संजय राउत ने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है और आम जनता पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, क्योंकि इससे बाहर से आने वाली वस्तुएं महंगी हो जाती हैं और घरेलू बाजार में भी कीमतें बढ़ने लगती हैं। ऐसे समय में सरकार को राजनीतिक गतिविधियों के बजाय आर्थिक सुधारों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।





