महंगाई से राहत देगा ये सोलर चूल्हा, बिना गैस के बनेगा खाना! जानिए क्या है ये और कैसे करता है काम


आजकल महंगाई और एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के बीच सोलर वाला इलेक्ट्रिक स्टोव एक नया और रोचक विकल्प बनकर उभरा है. हाल ही में केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इसकी चर्चा की और कहा कि यह तकनीक एलपीजी पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है.

खासकर जब छत पर सोलर पैनल लगे हों (जैसे पीएम सूर्या घर योजना के तहत), तो यह स्टोव घरेलू बिजली से चलने वाले इलेक्ट्रिक चूल्हे की तरह काम करता है, लेकिन ऊर्जा सूरज से आती है.

सोलर इलेक्ट्रिक स्टोव क्या है?

सोलर वाला इलेक्ट्रिक स्टोव दरअसल एक इलेक्ट्रिक इंडक्शन या हीटिंग स्टोव होता है, जो सोलर एनर्जी से चलता है. यह आम गैस चूल्हे की तरह दिखता है, लेकिन इसमें गैस की जगह बिजली इस्तेमाल होती है. कई मॉडल्स फ्लेम जैसी लौ भी पैदा करते हैं, जिससे लगता है जैसे गैस पर पका रहे हों.

यह स्टोव दो तरह का हो सकता है:

प्योर सोलर पावर्ड- सीधे सोलर पैनल से चलता है.

हाइब्रिड – सोलर + ग्रिड बिजली दोनों से चल सकता है.

भारत में Indian Oil का Surya Nutan जैसा इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम भी इसी कैटेगरी में आता है, जो थर्मल बैटरी के साथ काम करता है. कुछ आयातित मॉडल्स भी हैं जिन्हें भारतीय कंपनियां डेमो कर रही हैं.

यह कैसे काम करता है?

इसके काम करने का तरीका काफी आसान लेकिन स्मार्ट है:

  • सोलर पैनल: छत पर लगे सोलर पैनल सूरज की रोशनी को बिजली (DC करंट) में बदलते हैं.
  • बैटरी/चार्ज कंट्रोलर: दिन में बनी बिजली को बैटरी में स्टोर किया जाता है. इससे शाम या बादल वाले दिनों में भी खाना बनाया जा सकता है.
  • इन्वर्टर: बैटरी की DC बिजली को AC बिजली में बदलता है, जो स्टोव को चलाने के लिए जरूरी होती है.
  • इंडक्शन या हीटिंग टूल: इंडक्शन स्टोव में कॉपर कॉइल होती है. जब बिजली गुजरती है तो मजबूत चुंबकीय क्षेत्र बनता है. यह क्षेत्र बर्तन (जो फेरस मेटल का होना चाहिए) में एडी करंट पैदा करता है और बर्तन खुद गर्म हो जाता है. बर्तन गर्म होता है, स्टोव की सतह नहीं- इसलिए सुरक्षित और तेज रहता है.

कुछ मॉडल्स में रेजिस्टेंस हीटिंग या फ्लेम-लाइक इलेक्ट्रिक बर्नर होते हैं, जो बिजली से सीधे गर्मी पैदा करते हैं. सूरज की रोशनी में पैनल सीधे स्टोव को पावर दे सकते हैं या बैटरी चार्ज करते हैं. हाइब्रिड मॉडल में अगर सोलर कम हो तो घर की बिजली अपने आप जुड़ जाती है.

उदाहरण: 1 किलोवाट का सोलर सिस्टम (4-5 पैनल) और बैटरी के साथ यह स्टोव चाय उबालना, सब्जी बनाना, रोटी सेंकना जैसे काम आसानी से कर सकता है. IIT बॉम्बे जैसे संस्थानों ने भी ऐसे सोलर इंडक्शन सिस्टम विकसित किए हैं.

फायदे

  1. एलपीजी बचत: घर की रसोई का बड़ा हिस्सा गैस से मुक्त हो सकता है. मंत्री जोशी के मुताबिक, पीएम सूर्या घर योजना के साथ यह गेम चेंजर साबित हो सकता है.
  2. सस्ता और पर्यावरण अनुकूल: सूरज की मुफ्त ऊर्जा से बिल जीरो. कोई धुआं, कोई प्रदूषण नहीं.
  3. सुरक्षित: गैस लीक का खतरा खत्म. इंडक्शन स्टोव में जलने का खतरा भी कम.
  4. 24×7 उपलब्धता: बैटरी और हाइब्रिड सिस्टम की वजह से रात या मौसम खराब होने पर भी काम करता है.

चुनौतियां
शुरुआती लागत ज्यादा लग सकती है (सोलर पैनल + बैटरी + स्टोव). लेकिन लंबे समय में बचत होती है. बर्तन भी इंडक्शन वाले (लोहे या स्टील के) होने चाहिए. भारत जैसे देश में जहां सूरज की रोशनी भरपूर है और एलपीजी आयात पर निर्भरता है, सोलर इलेक्ट्रिक स्टोव एक स्मार्ट समाधान है.

सरकार की सोलर योजनाओं के साथ अगर भारतीय कंपनियां इसे सस्ता और लोकल बनाएं तो लाखों परिवार गैस की टेंशन से मुक्त हो सकते हैं. भविष्य में यह तकनीक और बेहतर हो सकती है. अगर आपके घर में पहले से सोलर सिस्टम है तो एक अच्छा हाइब्रिड इलेक्ट्रिक स्टोव जोड़कर आप अपनी रसोई को सोलर पावर्ड बना सकते हैं.



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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