वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बर्थराइट सिटीजनशिप को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरी दुनिया के राजनीतिक गलियारों में भूकंप ला दिया है. ट्रंप ने सीधे तौर पर अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या को चुनौती देते हुए इसे केवल गुलामों के बच्चों के लिए सीमित करने की वकालत की है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि अमेरिका की नागरिकता चीन और दुनिया भर के अमीर लोगों के लिए बिकने वाली वस्तु बन गई है. उन्होंने इसे एक बड़ा व्यापार बताते हुए कहा कि विदेशी लोग पैसे देकर अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिक बना रहे हैं जो कि हास्यास्पद है. ट्रंप ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि यह कानून गृहयुद्ध के अंत में केवल पूर्व दासों को अधिकार देने के लिए लाया गया था.
इतना ही नहीं, ट्रंप ने अमेरिकी न्यायपालिका पर भी तीखा प्रहार किया. उन्होंने मौजूदा कोर्ट सिस्टम को बेवकूफ करार देते हुए कहा कि मूर्ख जज और जस्टिस एक महान देश का निर्माण नहीं कर सकते. ट्रंप का यह बयान न केवल प्रवासियों के खिलाफ एक बड़ी घोषणा है बल्कि यह अमेरिका के संवैधानिक ढांचे और कोर्ट के बीच एक बड़ी जंग का संकेत दे रहा है. डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान अमेरिका में बर्थराइट सिटीजनशिप को लेकर चल रही दशकों पुरानी बहस को एक बेहद आक्रामक और राजनीतिक मोड़ देता है. ट्रंप ने इस पोस्ट के जरिए न केवल अमेरिकी न्यायपालिका पर निशाना साधा है बल्कि नागरिकता के मूल संवैधानिक आधार को सीधे तौर पर चुनौती दी है.
ट्रंप के बयान के मायने क्या हैं?
1. 14वें संशोधन की नई व्याख्या (गुलामी का संदर्भ)
ट्रंप का तर्क है कि जन्मसिद्ध नागरिकता का कानून अमीर विदेशियों (विशेषकर चीन) के लिए नहीं बल्कि पूर्व दासों के बच्चों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया था.
· ऐतिहासिक तथ्य: अमेरिका के संविधान का 14वां संशोधन 1868 में गृहयुद्ध (Civil War) के ठीक बाद पारित हुआ था. इसका प्राथमिक उद्देश्य अफ्रीकी-अमेरिकी दासों को पूर्ण नागरिक अधिकार देना था. ट्रंप इसी मूल मंशा का हवाला देकर आधुनिक समय में प्रवासियों को मिलने वाली नागरिकता का विरोध कर रहे हैं.
2. बर्थ टूरिज्म पर कड़ा प्रहार
ट्रंप ने चीन और अन्य देशों के अमीर लोगों द्वारा पैसे देकर नागरिकता हासिल करने पर हमला बोला है. उनका मानना है कि विदेशी लोग केवल अपने बच्चों को अमेरिकी पासपोर्ट दिलाने के लिए वहां जाते हैं जिसे वे हास्यास्पद मानते हैं. उनके अनुसार दुनिया अमेरिका की इस उदारता पर हंस रही है.
3. न्यायपालिका और जजों की आलोचना
ट्रंप ने अमेरिकी कोर्ट सिस्टम को बेवकूफ (Dumb) और मूर्ख (Stupid) करार दिया है. उनका मानना है कि जज संविधान की गलत व्याख्या कर रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि मूर्ख जज और जस्टिस एक महान देश का निर्माण नहीं कर सकते. यह सीधे तौर पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उनके फैसलों पर एक राजनीतिक हमला है.
4. टैरिफ और अर्थव्यवस्था का तड़का
बयान में ‘TARIFFS’ का जिक्र कर ट्रंप ने यह संदेश दिया है कि अमेरिका को दूसरे देश आर्थिक रूप से भी लूट रहे हैं और नागरिकता बेचकर भी. वे इसे एक बड़े ग्लोबल बिजनेस के रूप में देखते हैं जिसमें अमेरिका का नुकसान हो रहा है.
क्या बर्थराइट सिटीजनशिप खत्म करना आसान है?
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन कहता है: ” अमेरिका में जन्मे या वहां की नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्ति… अमेरिका के नागरिक हैं.”
· चुनौती: इसे खत्म करने के लिए या तो संविधान में संशोधन की आवश्यकता होगी (जो बहुत कठिन है) या फिर सुप्रीम कोर्ट को 150 साल पुराने अपने ही फैसलों को पलटना होगा.
· ट्रंप का रुख: वे इसे एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) के जरिए चुनौती देने की बात करते रहे हैं जिससे एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है.
सवाल-जवाब
ट्रंप ने चीन का नाम विशेष रूप से क्यों लिया?
‘बर्थ टूरिज्म’ के आंकड़ों के अनुसार, चीन और रूस जैसे देशों से बड़ी संख्या में संपन्न महिलाएं केवल बच्चे को जन्म देने अमेरिका जाती हैं ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके. ट्रंप इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संसाधनों की लूट मानते हैं.
क्या अमेरिका दुनिया का इकलौता देश है जो जन्मसिद्ध नागरिकता देता है?
नहीं, ट्रंप का यह दावा कि “हम इकलौते देश हैं”, तकनीकी रूप से गलत है. दुनिया के लगभग 30 से अधिक देश (जैसे कनाडा, मैक्सिको, ब्राजील) ‘जस सोली’ (Jus Soli) यानी जन्म के आधार पर नागरिकता देते हैं. हालांकि, अधिकांश यूरोपीय देशों में इसके लिए सख्त नियम हैं.





