कुछ घंटों की नहीं ये राफ्टिंग, 3 दिन तक चलता है सफर, क्या-क्या करना होगा जानिए


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Rafting Health Tips : देवप्रयाग से ऋषिकेश तक का राफ्टिंग एडवेंचर प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन यह अनुभव हर किसी के लिए नहीं है. करीब 70 किलोमीटर लंबा यह सफर सामान्य राफ्टिंग से बिल्कुल अलग है. शुरुआत में गंगा का बहाव शांत दिखाई देता है, लेकिन जैसे-जैसे राफ्ट आगे बढ़ती है, पानी का स्वरूप बदलने लगता है और खतरनाक रैपिड्स सामने आने लगते हैं. लोकल 18 से नमामि गंगे एडवेंचर के मालिक सैंडी बताते हैं कि यही बदलाव इस सफर को रोमांचक भी बनाता है और जोखिम भरा भी.

ऋषिकेश. देवप्रयाग से ऋषिकेश तक का राफ्टिंग एक्सपीडिशन आजकल एडवेंचर प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन यह अनुभव हर किसी के लिए नहीं है. खासतौर पर दिल से जुड़ी समस्या वाले लोगों को इस तरह की लंबी और चुनौतीपूर्ण राफ्टिंग से दूर रहने की सलाह दी जाती है. करीब 70 किलोमीटर लंबा यह सफर सामान्य राफ्टिंग से बिल्कुल अलग है, जिसमें शरीर और दिमाग दोनों की मजबूती की जरूरत होती है. शुरुआत में गंगा का बहाव शांत दिखाई देता है, लेकिन जैसे-जैसे राफ्ट आगे बढ़ती है, पानी का स्वरूप बदलने लगता है और खतरनाक रैपिड्स सामने आने लगते हैं. यही बदलाव इस सफर को रोमांचक भी बनाता है और जोखिम भरा भी.

लोकल 18 के साथ बातचीत में नमामि गंगे एडवेंचर के मालिक सैंडी बताते हैं कि इस एक्सपीडिशन की सबसे खास बात इसकी लंबाई और समय है. आम राफ्टिंग जहां कुछ घंटों में पूरी हो जाती है, यह सफर दो से तीन दिन तक चलता है और इसमें रोजाना 8 से 10 घंटे तक पानी में रहना पड़ता है. लगातार तेज बहाव, ठंडा पानी और शारीरिक मेहनत शरीर पर दबाव डालती है. ऐसे में जिन लोगों को हार्ट की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर या सांस से जुड़ी दिक्कत है, उनके लिए यह एक्सपीडिशन खतरनाक साबित हो सकता है. गाइड्स की मानें तो कई बार रैपिड्स इतने तेज होते हैं कि राफ्ट का संतुलन बनाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. एक छोटी सी गलती या कमजोरी बड़ा खतरा बन सकती है.

अचानक आने वाले मोड़

रास्ते में आने वाले रैपिड्स इस यात्रा की असली पहचान हैं. गंगा की ऊंची लहरें, तेज धारा और अचानक आने वाले मोड़ हर पल एड्रेनालिन बढ़ाते हैं. कई जगहों पर पानी की रफ्तार इतनी तेज होती है कि अनुभवी राफ्टर्स को भी पूरी ताकत लगानी पड़ती है. इसके बीच-बीच में कुछ शांत हिस्से भी आते हैं, जहां लोग राहत की सांस ले सकते हैं और आसपास की खूबसूरत वादियों का आनंद ले सकते हैं. पहाड़ों के बीच बहती गंगा, हरे-भरे जंगल और दूर-दूर तक फैली शांति इस सफर को यादगार बना देती है.

इन बातों का रखें ध्यान

इस एक्सपीडिशन का एक और आकर्षण है बीच कैंपिंग. नदी किनारे रात बिताने का अनुभव लोगों के लिए बेहद खास होता है. खुले आसमान के नीचे बोनफायर, म्यूजिक और दोस्तों के साथ बिताए पल इस यात्रा को सिर्फ एडवेंचर नहीं बल्कि एक इमोशनल एक्सपीरियंस बना देते हैं. रास्ते में पड़ने वाला अलकनंदा-भागीरथी संगम इस यात्रा को आध्यात्मिक स्पर्श भी देता है. यहां का नजारा इतना खूबसूरत होता है कि कुछ पल के लिए सारी थकान गायब हो जाती है. हालांकि इस पूरे सफर में सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है. लाइफ जैकेट, हेलमेट और अनुभवी गाइड हर समय साथ रहते हैं. फिर भी यह समझना जरूरी है कि यह एडवेंचर पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता. मौसम, पानी का स्तर और व्यक्ति की शारीरिक क्षमता इस अनुभव को आसान या कठिन बना सकते हैं. इसलिए एक्सपीडिशन पर जाने से पहले मेडिकल कंडीशन जरूर चेक करानी चाहिए और गाइड के निर्देशों का सख्ती से पालन करें.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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