This Blood-Coloured Lake In Tanzania Can Turn Living Creatures Into Stone Statues


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वो झील जिसमें जाते ही पत्थर बन जाता है जीव! खून की तरह लाल है पानी

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Deadliest lakes in the world : दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, लेकिन एक ऐसी झील भी है जिसके नाम से ही लोग सिहर उठते हैं. तंजानिया की नेट्रॉन झील (Lake Natron) को ‘शापित’ या ‘मौत की झील’ कहा जाता है. दावा किया जाता है कि इस झील के संपर्क में जो भी पक्षी या जानवर आता है, वह देखते ही देखते पत्थर की मूर्ति में बदल जाता है. खून की तरह लाल दिखने वाली इस झील का पानी जितना आकर्षक है, उतना ही जानलेवा भी. आखिर क्या है इस पानी का रासायनिक रहस्य? क्यों यहां जीव-जंतु ‘मम्मी’ बन जाते हैं? आइए जानते हैं विज्ञान की नजर से इस खौफनाक झील की पूरी हकीकत.

यह झील अफ्रीका के तंजानिया में है. इस झील को दुनिया की सबसे खतरनाक झील मानी जाती है. अफ्रीका की यह खतरनाक झील लेक नैट्रॉन अपने खून-सी लाल रंग और रहस्यमयी पानी के लिए जानी जाती है. यानी इस झील का पानी खून की तरह लाल होता है. कहा जाता है कि इस झील के पानी में जो भी जीव जाता है तभी मर जाता है और ममी में तब्दील हो जाता है यानी उस जीव का शरीर मिस्र के ममी की तरह हो जाता. वह उसी तरह वहां जमी रहती है. इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि इसमें भरपूर मात्रा में खनिज और नमक रहता है. झील की अत्यधिक रासायनिक संरचना इतनी तीव्र है कि यह जानवरों के शरीर को सुरक्षित कर देती है. इसी कारण झील के किनारे पाए जाने वाले जानवर पत्थर में बदले हुए (पेट्रिफाइड) दिखाई देते हैं. (Image- Instagram/@nickbrandtphotography, Face of Africa Adventures)

दुनिया की लगभग हर संस्कृति में नदियों, झीलों और जल स्रोतों को पवित्र माना गया है. भारत में गंगा, यमुना जैसी नदियां जीवन और मोक्ष का प्रतीक हैं, तो वहीं ईसाई धर्म में जॉर्डन नदी को धार्मिक आस्था से जोड़ा जाता है. आमतौर पर पानी को जीवन देने वाला माना जाता है. लेकिन उत्तरी तंजानिया में स्थित लेक नैट्रॉन इससे बिल्कुल अलग है. यह झील अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए तो जानी जाती है, लेकिन इसकी प्रकृति बेहद खतरनाक है. इसलिए इसे दुनिया की सबसे खतरनाक झील मानी जाती है. यहां का पानी इतना रासायनिक और घातक है कि यह जीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. इसी वजह से यह झील श्रद्धा नहीं, बल्कि डर और रहस्य का प्रतीक बन गई है. (Image-Geology In)

लेक नैट्रॉन का निर्माण लगभग 15 लाख साल पहले हुआ था. अत्यधिक टेक्टोनिक और ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण जो भीषण भू-गर्भीय हलचल हुई थी, उसी से यह झील बनी थी . इसी इलाके में ओल डोइन्यो लेंगाई नाम का ज्वालामुखी स्थित है, जिसे मसाई जनजाति भगवान का पर्वत मानती है. इस ज्वालामुखी से समय-समय पर हुए विस्फोटों के दौरान निकलने वाले खनिज और राख झील में जाकर जमा होते गए. इन्हीं खनिजों ने लेक नैट्रॉन के पानी को अत्यधिक क्षारीय और खतरनाक बना दिया. ज्वालामुखीय तत्वों के कारण ही इस झील की रासायनिक संरचना सामान्य झीलों से बिल्कुल अलग है, जो इसे रहस्यमयी और जानलेवा बनाती है. (Image-Canva)

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लेक नैट्रॉन का चौंकाने वाला लाल रंग किसी रसायन की वजह से नहीं, बल्कि यहां पनपने वाले नमक पसंद करने वाले सूक्ष्म जीवों के कारण है. इनमें प्रमुख रूप से हेलोआर्किया और सायनोबैक्टीरिया शामिल हैं. ये सूक्ष्मजीव झील के अत्यधिक क्षारीय पानी में आसानी से जीवित रहते हैं और बढ़ते हैं. इनके शरीर में मौजूद रंगद्रव्य पानी को गहरा लाल, नारंगी और गुलाबी रंग दे देते हैं. यही वजह है कि लेक नैट्रॉन का रंग इतना तेज दिखाई देता है कि इसे हजारों फीट ऊंचाई से, यहां तक कि हवाई जहाज या सैटेलाइट तस्वीरों में भी साफ देखा जा सकता है. (Image-Canva)

लेक नैट्रॉन का पानी अत्यधिक क्षारीय है. यानी इसमें नमक भरा हुआ है जिसका pH स्तर करीब 10.5 तक पहुंच जाता है. इसकी तीव्रता इतनी ज्यादा है कि इसे अमोनिया जितना खतरनाक माना जाता है. इस झील का पानी आंखों और त्वचा में जलन और जलने जैसी परेशानी पैदा कर सकता है. जो जानवर इस पानी के संपर्क में आते हैं, उनका शरीर तेजी से डिहाइड्रेट हो जाता है और त्वचा व मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंचता है. यही वजह है कि इस झील में वे ही जीव जीवित रह पाते हैं, जो इस बेहद कठोर और विषम वातावरण के अनुसार खुद को ढाल चुके हैं. सामान्य जीवों के लिए यहां लंबे समय तक जीवित रहना लगभग असंभव है.  (Image-Canva)

लेक नैट्रॉन के आसपास मरने वाले जानवर अक्सर पत्थर में बदले हुए दिखाई देते हैं. दरअसल, इस झील के पानी में मौजूद सोडियम कार्बोनेट मृत शरीर को सड़ने से बचा लेता है. यह प्रक्रिया प्राचीन मिस्र की ममीकरण तकनीक से मिलती-जुलती है, जिसमें शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता था. पानी के संपर्क में आने से जानवरों का शरीर धीरे-धीरे सख्त हो जाता है और उनमें नमी खत्म हो जाती है. इसके कारण शव गलने की बजाय संरक्षित रह जाते हैं और झील के किनारे पड़े हुए ऐसे लगते हैं, जैसे वे पत्थर की मूर्तियां हों. यह दृश्य देखने में रहस्यमय और डरावना दोनों होता है. (Image-Canva)

भले ही लेक नैट्रॉन को एक खतरनाक झील माना जाता है, लेकिन यहां जीवन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. इस झील में लेसर फ्लेमिंगो बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. ये पक्षी यहां मौजूद शैवाल को अपना भोजन बनाते हैं और इसी झील में बड़े पैमाने पर प्रजनन भी करते हैं. झील का अत्यधिक क्षारीय और कठोर वातावरण अन्य जानवरों और शिकारी जीवों को यहां आने से रोकता है. इसी वजह से फ्लेमिंगो के अंडे और बच्चे सुरक्षित रहते हैं. इस तरह जो झील दूसरों के लिए जानलेवा है, वही फ्लेमिंगो के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल बन जाती है. (Image-Canva)



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