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These are the reasons why BJP lost in Ayodhya | देश में चर्चा, अयोध्या में क्यों हारी भाजपा: लोग बोले- वोट मोदी के नाम पर दिए, सांसद इस लायक नहीं थे – Ayodhya News

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जिस अयोध्या पर भाजपा की निगाहें थीं, वहीं भाजपा चुनाव हार गई। राम नगरी में मिले इस संदेश को सभी ने चौंका दिया। 1990 की रथयात्रा से लेकर 2024 के चुनाव तक भाजपा के मूल में रहने वाली सीट पर पार्टी ने जी-जान से ताकत लगाई। हजार-दो हजार करोड़ नहीं, 32 हजार करोड़ के

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राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में सुरखियाँ बनीं। 500 साल पुराना इतिहास बदला गया। पीएम मोदी खुद यहां रोड-शो करने आए। योगी ने 5 जनसभाएं कीं। मगर नेट जादू नहीं चलेगा। जनता की निराशा अंदर ही अंदर मुखपृष्ठ हो रही थी।

भाजपा के स्थानीय नेताओं से लेकर नेताओं तक उस तासीर को भांप ही नहीं पाई। मोदी को यहां के भाजपा नेता गुड मैनेजमेंट दिखाते रहे। मगर अंदरखाने में कुछ और ही चल रहा था। विरोध की यह चिंगारी उम्मीदवार के फाइनल होते ही शुरू हो गई थी।

आखिर भाजपा अपने सबसे बड़े गढ़ में क्यों हारी, लोगों के बीच क्या गुस्सा था? मोदी आखिर जनता की नब्ज क्यों नहीं पकड़ पाए? इन सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर उतरी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें…

यह फोटो 22 जनवरी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन की है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीआईपी से मुलाकात की थी।

यह फोटो 22 जनवरी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीआईपी से मुलाकात की थी।

लोग बोले- मंदिर से खुश, एमपी से नाराज
हनुमानगढ़ी जाने वाली सड़क के मार्केट में हमारी मुलाकात रणंजय शास्त्री से हुई। वह अयोध्या के ही रहने वाले हैं। भाजपा को वोट क्यों नहीं पड़ा? वो कहते हैं- लोग मोदी-योगी को पसंद करते हैं। राममंदिर से खुश हैं। मगर सांसद लल्लू सिंह से नाराज हैं। आप ऐसे समझिए कि जो 4.99 लाख वोट भाजपा को मिले हैं वे पीएम मोदी को मिले हैं, लल्लू सिंह को नहीं।

वह बूढ़े पर ही नहीं रुकते। कहते हैं, अयोध्या में 2 साल से लोग परेशान हैं। वीआईपी तो आते हैं, लेकिन जो सड़कें बंद होती हैं, उनमें हम लोग फंसते हैं। लोग घरों में कैद हो जाते हैं। हमारे रिश्तेदार शहर के बॉर्डर पर फंस जाते हैं। अंदर नहीं आने दिया जाता। लोग परेशान हो गए, यही वजह है कि लोगों ने स्पैम को जीता दिया।

भाजपा को शहर से मिले वोट, गांव वालों का रुख़ सपा की ओर
यहां से कुछ आगे हमारी मुलाकात ओंकार पांडे से हुई। वह भी रणञ्जय शास्त्री से इत्तेफाक रखते हैं। कहते हैं- भाजपा को गांव में कम वोट मिले हैं। शहर के लोगों ने वोट दिए हैं। इसकी वजह टुकड़े की तानाशाही और संसद की उदासीनता है। ऐसा लगता है कि वो मुख्यमंत्री के सीधे संपर्क में हैं। लोगों की खबरें अब तक नहीं सुनी गईं। गांव के लोग ज्यादा परेशान हैं। आप देखोगे, गांव के लोगों के वोट स्पैम को गए होंगे।

मकान-दुकान विनाश से भी छुटकारा
कुछ दूरी पर खड़े वकील अजय कुमार तिवारी खुद को नहीं रोक सके। वह कहती हैं- बाबाजी का बुलडोजर पूरे उत्तर प्रदेश में जीता रहेगा, लेकिन अयोध्या में यह भी हार का बड़ा कारण रहा है। इतना मकान-दुकान टूट गया। लोग क्या खुश होंगे? फिर पेपर लीक होने से लड़का खफा थे। जो सोचते हैं कि सरकारी नौकरी मिलेगी, उन्हें बहुत निराशा हुई। यहां कानून व्यवस्था नहीं, सिर्फ मास्टर लॉ चलाया जा रहा है।

रोजी-रोटी चलने से गुस्से में छोटे-छोटे
राम मंदिर से करीब 10 कि.मी. दूर सिविल लाइन पहुंचे। यहां अजय यादव से हमारी मुलाकात हुई। वह कहते हैं- लोगों की रोजी-रोटी चली गई। सांसद किसी के सुख-दुख में शामिल नहीं हुए। किसी को मदद नहीं मिली। वीआईपी आंदोलन की आड़ में अगर किसी का ठेला हटा दिया गया तो उसे दुकान भी नहीं लगाने दी जा रही है। उसकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं। राम मंदिर तो सबका है। सबकी आस्था है, फिर गरीब आदमी क्यों परेशान हो? यही वजह है कि चुनाव में नतीजे भाजपा के फेवर में नहीं आए।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम है- लोगों को लगता है कि अयोध्या के लोगों ने अपनी ही पार्टी को हरा दिया। मगर असलियत कोई नहीं जानता है। जब भाजपा को जीता था, हमने जीता। मगर ऐसा कब तक होता है। मिल्कीपुर के विधायक अवधेश प्रसाद भी सपा के हैं। मगर पूरे अयोध्या के लोग सुनते हैं। सुख-दुख में खड़े होते हैं। भाजपा के पदाधिकारियों से तो लोग मिल भी नहीं सकते।

जातिगत समीकरण हावी दिखा
कथा वाचक डॉ. चंद्रांशु महाराज कहते हैं- चुनाव में जातिगत समीकरण ज्यादा हावी रहे। भाजपा को इस बार 40% वोट ही मिले। अयोध्या में हर चीज का मुख्य कारण जनसमस्या रही है। जिस पर ध्यान नहीं दिया।

अयोध्या के राम जानकी बिहार कुंज के महंत अवधेश दास कहते हैं- मोदी के कार्यकाल में ही राम मंदिर का फैसला आया, भूमि पूजन हुआ और भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। भाजपा पूनम की हार पर वह कहती हैं- ‘तिन्हहि सोहै न अवध बढ़ावा। चोरहि चण्डिनी राति न भावा। अयोध्या के निवासी किसी के सागे नहीं हैं। यहां पसीने के खिलाफ नकारात्मकता फैलाई गई है।

पॉलिटिकल एक्सपोर्ट्स

अयोध्या में भाजपा की बड़ी हार के फैक्टर क्या रहे?
वरिष्ठ पत्रकार आनंद मोहन पांडेय बताते हैं- भाजपा की हार के कई कारण हैं। पहला, भाजपा उम्मीदवार का अति आत्मविश्वास। ये लोग समझते रहे कि राम मंदिर बन गया है। अब तो जीत ही जायेंगे। दूसरा कारण, जातिगत समीकरण। आर.पी.एस. बिरादरी से थे। उन्हें अपनी जाति के 1.5 लाख में 90% वोट मिले हैं। इसके अलावा, पिंगा, यादव-मुस्लिम के वोट भी मिले हैं।

अयोध्या में राममंदिर का मुद्दा क्यों नहीं चला?
वरिष्ठ पत्रकार बीएन दास कहते हैं- अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद ऐसा लग रहा था कि इस बार भाजपा को भारी बढ़त मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका, क्योंकि यहां पहले भी राम मंदिर का मुद्दा हावी नहीं हो रहा। यही कारण है कि इस बार भी चुनाव में इसका खास असर नहीं दिखा।

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