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Stress Harmful Effects: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक सामान्य शब्द बन गया है, लेकिन इसकी गहराई हमारे स्वास्थ्य को भीतर से खोखला कर रही है. जब हम लंबे समय तक मानसिक दबाव में रहते हैं, तो हमारा शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में बना रहता है, जिससे कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है. यह स्थिति न केवल मानसिक शांति छीनती है, बल्कि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी बीमार करने लगती है. अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए, तो जवानी में ही व्यक्ति कई गंभीर रोगों का शिकार हो सकता है.
हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज : WHO की रिपोर्ट के मुताबिक लगातार तनाव का सबसे बुरा असर हमारे दिल पर पड़ता है. जब आप तनाव में होते हैं, तो आपका हार्ट रेट बढ़ जाता है और ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है. लंबे समय तक हाई बीपी रहने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. तनाव के कारण शरीर में सूजन भी बढ़ती है, जो धमनियों के लिए हानिकारक है.

टाइप-2 डायबिटीज : तनाव और शुगर लेवल का सीधा संबंध है. स्ट्रेस के दौरान शरीर एनर्जी के लिए खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ा देता है. अगर तनाव लगातार बना रहे, तो शरीर इस अतिरिक्त शुगर को प्रोसेस नहीं कर पाता, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है. यही कारण है कि अत्यधिक मानसिक दबाव झेलने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना अधिक होती है.

पाचन तंत्र की समस्याएं : क्या आपने गौर किया है कि घबराहट में अक्सर पेट खराब हो जाता है? हमारा मस्तिष्क और पेट आपस में गहराई से जुड़े हैं. क्रोनिक स्ट्रेस की वजह से एसिडिटी, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम और पेट में अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यह पाचन क्रिया को धीमा कर देता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता.
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कमजोर इम्यून सिस्टम : तनाव आपके शरीर की रक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है. कोर्टिसोल का उच्च स्तर प्रतिरक्षा कोशिकाओं की कार्यक्षमता को घटा देता है, जिससे आप बार-बार सर्दी, खांसी और अन्य संक्रमणों की चपेट में आने लगते हैं. एक तनावग्रस्त शरीर किसी भी बीमारी से लड़ने में सामान्य से अधिक समय लेता है.

डिप्रेशन और एंजायटी : शारीरिक बीमारियों के अलावा स्ट्रेस सीधे तौर पर मानसिक विकारों का द्वार है. मामूली तनाव जब क्रोनिक बन जाता है, तो यह गंभीर डिप्रेशन और एंजायटी डिसऑर्डर में बदल सकता है. इससे व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और वह सामाजिक रूप से कटने लगता है.

अनिद्रा और थकान : तनावग्रस्त दिमाग कभी शांत नहीं बैठता, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है. घंटों बिस्तर पर लेटे रहने के बाद भी विचार चलते रहते हैं, जिससे अनिद्रा की समस्या पैदा होती है. पर्याप्त नींद न मिलने के कारण शरीर की मरम्मत नहीं हो पाती, जिससे व्यक्ति दिन भर थकान और चिड़चिड़ेपन का अनुभव करता है.

मोटापे की समस्या : तनाव के दौरान शरीर में घ्रेलिन हार्मोन बढ़ता है, जो भूख को तेज करता है. अक्सर लोग तनाव को कम करने के लिए इमोशनल ईटिंग का सहारा लेते हैं और ज्यादा मीठा या फैटी फूड खाने लगते हैं. इसके अलावा कोर्टिसोल हार्मोन विशेष रूप से पेट के आसपास चर्बी जमा करने के लिए जिम्मेदार होता है, जिससे मोटापा बढ़ता है.

त्वचा और बालों की समस्याएं : तनाव का असर आपके चेहरे और बालों पर भी साफ दिखता है. ज्यादा स्ट्रेस से शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे मुंहासे, एक्जिमा और सोरायसिस जैसी त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ जाती हैं. इसके साथ ही अत्यधिक तनाव बालों के झड़ने का एक प्रमुख कारण माना जाता है.





