उम्र को ठेंगा दिखाते रांची के ये 3 योद्धा… 85 साल में भी पहाड़ों पर लगाते हैं दौड़, देखकर आप कहेंगे- वाह क्या जिंदगी है


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Ranchi Fitness King: रांची के रामचरण साहू (85), प्रभात कुमार और विष किशोर ठाकुर (80) अपनी फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली के लिए मशहूर हैं. रामचरण 15 किमी चलते हैं, प्रभात गार्डनिंग में माहिर हैं और विष किशोर ज्योतिष में पीएचडी कर रहे हैं. तीनों की फिटनेस देखकर आप भी कहेंगे कि वाह क्या जिंदगी है.

झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले तीन ऐसे लोग हैं. जो 80 साल पार कर चुके हैं, लेकिन जब आप तीनों को देखेंगे तो आपको लगेगा नहीं की ये उम्रदराज हैं. इस उम्र में भी इनका फिटनेस काबिल ए तारीफ है. फिटनेस का आलम कुछ ऐसा है कि यह लोग 4 किलोमीटर पहाड़ के ऊपर दौड़ लगाते हैं. इनमें पहला नाम रांची के श्री रामचरण साहू काआता है. जो कि उम्र में 85 वर्ष के हो चुके हैं. लेकिन उनकी फिटनेस देखकर आपको लगेगा यह तो केवल 60 साल के है. आज भी हर दिन 15 किलोमीटर तक चल लेते हैं. उन्होंने बताया कि हम लोग अपने जमाने में माड भात खाकर यह बॉडी बनाए हुए हैं. आज तक बाहर का खाना नहीं खाया और आज तक हॉस्पिटल का चक्कर भी नहीं लगाए हुए हैं.

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उन्होंने बताया कि हमें नहीं पता अस्पताल क्या होता है. एडमिट होना क्या होता है. अपने खेत का उगाया सारी चीजों को खाता हूं. वहीं, दूसरा नाम रांची के प्रभात कुमार ( 85 ) का है. जो कि कोल इंडिया के सीएमडी पद से रिटायर्ड हैं और आज गार्डनिंग को ही अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिए हैं. आज रांची के गार्डनिंग एक्सपर्ट के तौर पर जाने जाते हैं. इनका गार्डन देखकर आपका दिल गार्डन-गार्डन हो जाएगा. इन्होंने 5000 से अधिक पेड़ पौध इन्होंने लगाए हैं.

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दिन के 8 से 9 घंटे यहीं पर बिताते हैं. अपने हाथ से 5 से 6 तरह का एकदम यूनिक खाद तैयार करते हैं. प्रभात बताते हैं गार्डन को ही अपना बच्चा मान लिया है. यहीं पर रहता हूं यहीं से ऊर्जा लेता हूं, घर का बना हुआ खाता हूं, गार्डन में ही सब्जी उगाता हूं. एकदम ऑर्गेनिक और शाम के 6:00 बजे के बाद कुछ भी नहीं, शाम के 6:00 बजे बस एक कटोरी सूप यही मेरा डाइट है.

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तीसरा नाम रांची के विष किशोर ठाकुर का है, जो कि अब 80 साल के होने वाले हैं. वह इस समय भी वह ज्योतिषी में पीएचडी कर रहे हैं और अब वह एलएलबी की तैयारी करेंगे. राष्ट्रपति के हाथों उनको गोल्ड मेडल मिल चुका है. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इनकी तारीफ कर चुके हैं. उन्होंने कहा गोल्ड मेडल देते हुए कि ऐसा एनर्जेटिक इंसान तो पहली बार देख रहे हैं.

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विष किशोर ठाकुर बताते हैं कि मैं एक टीचर था. वहीं से पढ़ने और पढ़ाने का जुनून था. यह पढ़ाई मुझे तरोताजा रखती है. मेरे को बूढ़ा नहीं होने देती है. आज भी बाहर का कभी कुछ नहीं खाता. हर दिन 10 किलोमीटर मॉर्निंग वॉक करता हूं. यही मेरी फिटनेस का राज है. हां, सुबह-सुबह उठकर एक चम्मच चवनप्राश जरुर खा लेता हूं.



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