नई दिल्ली. एक ऐसा सन्नाटा जहां न कोई तारा चमकेगा, न कोई ग्रह बचेगा और न ही समय का कोई वजूद होगा. जिस पृथ्वी को हम अनंत और अमर मानते थे उसकी एक्सपायरी डेट घट गई है. वैज्ञानिकों ने अब तक के सबसे डरावने सच से पर्दा उठाया है. हमारा ब्रह्मांड उतनी लंबी उम्र नहीं जिएगा जितना हम सोच रहे थे. स्टीफन हॉकिंग की एक पुरानी थ्योरी को जब आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर परखा गया तो पता चला कि ब्रह्मांड की घड़ी की सुइयां उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज भाग रही हैं. जिस ब्रह्मांड को हम खरबों-अरबों सालों का अजेय साम्राज्य मानते थे, वह अब धीरे-धीरे वाष्पित होकर शून्य में विलीन होने की ओर बढ़ रहा है.
दशकों से यह माना जाता था कि हमारा ब्रह्मांड करीब $10^{1100}$ वर्षों तक अस्तित्व में रहेगा लेकिन जर्नल ऑफ कॉस्मोलॉजी एंड एस्ट्रोपार्टिकल फिजिक्स में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन ने इस समयसीमा को घटाकर मात्र $10^{78}$ वर्ष कर दिया है. हालांकि यह समय भी मानवीय समझ से परे बहुत विशाल है लेकिन ब्रह्मांडीय पैमाने पर यह गिरावट बेहद चौंकाने वाली है. राडबौड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने स्टीफन हॉकिंग के ‘हॉकिंग रेडिएशन’ सिद्धांत को आधार बनाकर यह नया दावा पेश किया है. इस शोध के अनुसार न केवल ब्लैक होल बल्कि गुरुत्वाकर्षण रखने वाली हर वस्तु धीरे-धीरे खत्म हो रही है, जो ब्रह्मांड के अंत की ओर इशारा करती है.
ब्रह्मांड के अंत का पूरा गणित
· उम्र में भारी कटौती: वैज्ञानिकों ने पहले अनुमान लगाया था कि ब्रह्मांड $10^{1100}$ सालों तक रहेगा लेकिन नई रिसर्च इसे सीधे घटाकर $10^{78}$ साल पर ले आई है.
· हॉकिंग रेडिएशन का खौफ: स्टीफन हॉकिंग ने कहा था कि ब्लैक होल धीरे-धीरे कण छोड़ते हैं और खत्म हो जाते हैं. नई रिसर्च कहती है कि ब्रह्मांड की हर वस्तु (तारे, ग्रह आदि) इसी तरह धीरे-धीरे भाप बनकर उड़ रही है.
· बिना होल के वाष्पीकरण: पहले माना जाता था कि सिर्फ ब्लैक होल ही गायब होते हैं पर अब पता चला है कि अंतरिक्ष का खिंचाव ही हर चीज को खत्म करने के लिए काफी है.
· सफेद बौने तारों का अंत: हमारी आकाशगंगा के 97% तारे ‘सफेद बौने’ (White Dwarfs) बन जाएंगे. रिसर्च के मुताबिक, $10^{78}$ साल बाद ये तारे भी ब्रह्मांड से पूरी तरह मिट जाएंगे.
· समय का फासला: भले ही ब्रह्मांड की उम्र बहुत कम कर दी गई है लेकिन यह $10^{78}$ साल का समय भी इतना ज्यादा है कि इंसान के लिए इसे गिन पाना नामुमकिन है.
· अस्तित्व का शून्य होना: इस प्रक्रिया के अंत में ब्रह्मांड पूरी तरह अंधकारमय और खाली हो जाएगा, जहां न ऊर्जा बचेगी और न ही पदार्थ.
सवाल-जवाब
ब्रह्मांड के अंत की समयसीमा में इतना बड़ा बदलाव क्यों आया?
यह बदलाव ‘हॉकिंग रेडिएशन’ की नई व्याख्या के कारण आया है. पहले माना जाता था कि केवल ब्लैक होल ही वाष्पित (evaporate) होते हैं, लेकिन नए शोध के अनुसार, स्पेसटाइम कर्वचर (spacetime curvature) के कारण ब्रह्मांड की हर वस्तु धीरे-धीरे अपनी ऊर्जा खो रही है, जिससे इसके अंत का अनुमान पहले की तुलना में बहुत कम हो गया है.
सफेद बौने तारे (White Dwarfs) इस शोध में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
आकाशगंगा के लगभग 97% तारे अंततः सफेद बौने बन जाएंगे. शोधकर्ताओं ने पाया कि ये अवशेष $10^{78}$ वर्षों के बाद गायब हो सकते हैं. चूंकि ये ब्रह्मांड के मुख्य अवशेष हैं, इसलिए इनका खत्म होना ब्रह्मांड के अंतिम अस्तित्व के खत्म होने का संकेत है.
क्या इस शोध का हमारे वर्तमान जीवन पर कोई असर पड़ेगा?
बिल्कुल नहीं. हमारा ब्रह्मांड अभी केवल 13.8 अरब वर्ष पुराना है. $10^{78}$ वर्ष इतनी बड़ी संख्या है कि इसकी तुलना में वर्तमान ब्रह्मांड की आयु एक पल के बराबर भी नहीं है. यह शोध केवल ब्रह्मांड के सुदूर भविष्य की वैज्ञानिक समझ के लिए है.





