Iran Destroy USA THAAD: ईरान वॉर हर बीतते दिन के साथ और खतरनाक फेज में प्रवेश करता जा रहा है. पूरी दुनिया को जहां इस युद्ध के जल्द से जल्द खत्म होने की उम्मीद है तो वहीं दूसरी तरफ लगातार आ रही तस्वीरें इस टकराव की भयावह स्थिति को दिखा रही हैं. अमेरिका ने हमले के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मौत के घाट उतार दिया. इससे ईरान ही नहीं पूरी दुनिया सन्न रह गई. तेहरान की ओर से भी पलटवार किया गया और अरब जगत में मौजूद अमेरिका के कई सैन्य और एयरबेस को निशाना बनाया. खामेनेई की सेना ने पहले ही दिन अमेरिका को ऐसा जख्म दिया, जो उसे दशकों में नहीं मिला. USA को जिस THAAD एयर डिफेंस सिस्टम पर नाज था, खामेनेई की सेना ने सबसे पहले उसी को नेस्तनाबूद कर दिया. UAE, जॉर्डन और कतर में स्थित अमेरिकी रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया है. सैटेलाइट इमेज में इन तीनों देशों में ईरानी अटैक से हुई तबाही के मंजर को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. अब अमेरिकी सरकार के उस बयान का मतलब समझ में आ रहा है, जिसमें ईरान वॉर के लंबा खिंचने की बात कही गई.
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच अब खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी सीधे निशाने पर आ गए हैं. हाल ही में सामने आई नई सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिला है कि ईरान ने जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जहां अमेरिकी मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम के महत्वपूर्ण रडार तैनात थे. इन हमलों का उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद एयर डिफेंस नेटवर्क को कमजोर करना बताया जा रहा है. सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण से पता चलता है कि जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयरबेस पर तैनात एक अमेरिकी THAAD मिसाइल बैटरी के रडार सिस्टम को शुरुआती हमलों के दौरान निशाना बनाया गया. CNN की रिपोर्ट के अनुसार, संभवतः THAAD मिसाइल बैटरी को नष्ट कर दिया गया. यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए व्यापक हवाई अभियान के जवाब में तेहरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था.
जॉर्डन के एयरबेस पर रडार को भारी नुकसान
सोमवार को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में जॉर्डन के मुवाफक साल्ती एयर बेस के पास रेत में लगभग 13 फीट चौड़े दो बड़े गड्ढे दिखाई देते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक यह संकेत है कि रडार सिस्टम को सटीक रूप से निशाना बनाने के लिए एक से अधिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया होगा. जिस रडार को निशाना बनाया गया वह THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम का AN/TPY-2 ट्रांसपोर्टेबल रडार है, जिसे अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन बनाती है. यह रडार अत्यंत उन्नत तकनीक से लैस होता है और इसका उपयोग आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को काफी दूरी से पहचानने के लिए किया जाता है. एक THAAD बैटरी के लिए यह रडार केंद्रीय भूमिका निभाता है, क्योंकि इसी के माध्यम से इंटरसेप्टर मिसाइलों को लक्ष्य की जानकारी मिलती है. अमेरिकी मिसाइल डिफेंस एजेंसी के 2025 के बजट दस्तावेजों के अनुसार इस रडार की कीमत लगभग 50 करोड़ डॉलर के आसपास होती है. रिपोर्ट के अनुसार, यह रडार सिस्टम पांच बड़े ट्रेलरों पर स्थापित होता है, जिनमें से प्रत्येक लगभग 40 फीट लंबा होता है. सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिलता है कि इन सभी ट्रेलरों को गंभीर नुकसान पहुंचा है या वे पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं.
THAAD दुनिया के एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम में से एक है. (फाइल फोटो/Reuters)
फरवरी से सक्रिय था अमेरिकी ठिकाना
जानकारी के मुताबिक, यह THAAD बैटरी फरवरी के मध्य से जॉर्डन के इस एयर बेस पर तैनात थी. यह ठिकाना ईरान से करीब 500 मील दूर स्थित है और लंबे समय से अमेरिका के लिए क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है. संघर्ष शुरू होने से पहले ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में इस एयर बेस पर 50 से अधिक लड़ाकू विमान दिखाई दिए थे. इसके अलावा वहां ड्रोन, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और कई सैन्य शेल्टर भी मौजूद थे, जिनमें और भी विमान छिपे हो सकते थे. इस वजह से यह ठिकाना क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए बेहद अहम माना जाता है.
UAE में भी रडार ठिकानों पर हमले
सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से यह भी सामने आया है कि संयुक्त अरब अमीरात में दो अलग-अलग सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी इसी तरह के हमले हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार रुवैस और सादेर के पास स्थित सैन्य ठिकानों पर कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है. रुवैस स्थित सैन्य परिसर में कम से कम तीन इमारतों को नुकसान पहुंचने के संकेत मिले हैं, जबकि सादेर में चार स्ट्रक्चर पर हमले के निशान दिखाई दिए हैं. जिन इमारतों को नुकसान पहुंचा है, उनमें वे वाहन शेड भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल THAAD बैटरी के रडार सिस्टम को रखने के लिए किया जाता है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों में वहां मौजूद रडार सिस्टम पूरी तरह नष्ट हुए या नहीं. हाई रिजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध न होने के कारण यह भी तय नहीं हो पाया है कि हमले के समय रडार सिस्टम इन ठिकानों पर मौजूद थे या नहीं.
ईरान ने कतर में स्थित अमेरिका निर्मित अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम को ध्वस्त कर दिया है. (फोटो क्रेडिट: Planet Labs PBC/Middlebury Institute)
अमेरिकी या यूएई के रडार सिस्टम पर हमला?
यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि यूएई में जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहां अमेरिकी सेना की THAAD बैटरियां तैनात थीं या वे बैटरियां थीं जिन्हें अमेरिका ने यूएई को बेचा है. हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा से यह पुष्टि हुई है कि इन दोनों स्थानों पर 2016 और 2018 से THAAD सिस्टम से जुड़े उपकरण देखे जाते रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन रडारों को गंभीर नुकसान पहुंचा है तो इससे क्षेत्र में मौजूद एयर डिफेंस नेटवर्क की क्षमता पर असर पड़ सकता है.
THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) अमेरिका की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में नष्ट करना है. यह प्रणाली “हिट-टू-किल” तकनीक का उपयोग करती है, जिसमें इंटरसेप्टर मिसाइल सीधे टकराकर लक्ष्य को नष्ट करती है. THAAD लगभग 150 से 200 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को इंटरसेप्ट कर सकता है. यह पैट्रियट एयर एंड मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बड़े क्षेत्र की सुरक्षा प्रदान करता है और अन्य मिसाइल रक्षा प्रणालियों के साथ मिलकर काम करता है.
THAAD सिस्टम की संरचना और एक बैटरी में क्या-क्या शामिल होता है?
THAAD की एक बैटरी में लगभग 90 सैनिक तैनात होते हैं जो इसके संचालन और रखरखाव का काम संभालते हैं. इसमें 6 ट्रक-माउंटेड लॉन्चर होते हैं और हर लॉन्चर में 8 इंटरसेप्टर मिसाइलें लगी होती हैं, यानी कुल 48 इंटरसेप्टर मौजूद रहते हैं. इसके अलावा इसमें एक अत्याधुनिक AN/TPY-2 रडार सिस्टम होता है जो दुश्मन की मिसाइलों को ट्रैक करता है. इसके साथ ही टैक्टिकल फायर कंट्रोल और कम्युनिकेशन सिस्टम भी होता है, जो पूरे ऑपरेशन का समन्वय करता है.
THAAD किस तरह के मिसाइल खतरों को रोकने में सक्षम है?
THAAD को छोटी, मध्यम और सीमित इंटरमीडिएट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह 1,000 किलोमीटर तक की शॉर्ट रेंज मिसाइल, 1,000 से 3,000 किलोमीटर तक की मीडियम रेंज मिसाइल और 3,000 से 5,000 किलोमीटर तक की इंटरमीडिएट रेंज मिसाइल को इंटरसेप्ट कर सकता है. यह मिसाइलों को उनके अंतिम चरण यानी टर्मिनल फेज में नष्ट करता है. खास बात यह है कि THAAD वायुमंडल के अंदर और बाहर दोनों जगह इंटरसेप्शन करने की क्षमता रखता है.
THAAD प्रणाली का विकास किसने किया और इसके संचालन की जिम्मेदारी किसकी है?
THAAD प्रणाली का विकास अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने किया है, जिसका मुख्यालय मैरीलैंड के बेथेस्डा में स्थित है. इसका निर्माण अलबामा के ट्रॉय शहर में किया जाता है. इस प्रणाली के विकास और तकनीकी रखरखाव की जिम्मेदारी मिसाइल डिफेंस एजेंसी (MDA) की है. वहीं अमेरिकी सेना इसके संचालन और सामान्य रखरखाव का काम संभालती है. MDA यह भी सुनिश्चित करती है कि सभी THAAD बैटरियां ठीक से काम करें और सैनिकों को पर्याप्त प्रशिक्षण मिले.
अमेरिकी सेना के पास कितनी THAAD बैटरियां हैं और वे कहां तैनात हैं?
वर्तमान में अमेरिकी सेना के पास कुल आठ THAAD बैटरियां हैं. पहली THAAD बैटरी मई 2008 में टेक्सास के फोर्ट ब्लिस में सक्रिय की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार तीन बैटरियां फोर्ट ब्लिस में तैनात हैं और दो बैटरियां टेक्सास के फोर्ट कैवाजोस में स्थित हैं. इसके अलावा एक बैटरी दक्षिण कोरिया में और एक गुआम में तैनात है. हालांकि आठवीं बैटरी की संभावित तैनाती का स्थान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है.
बड़ा नुकसान
हथियारों के विशेषज्ञ और Armament Research Services (ARES) के निदेशक एनआर जेनजेन जोन्स के मुताबिक, THAAD सिस्टम के लिए AN/TPY-2 रडार बेहद महत्वपूर्ण घटक होता है. उनके अनुसार यह रडार न केवल इंटरसेप्टर मिसाइलों को लॉन्च करने में मदद करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एयर डिफेंस की समन्वित तस्वीर भी प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि इस तरह के रडार को जल्दी बदल पाना आसान नहीं होता. यदि कोई रडार नष्ट हो जाता है तो उसकी जगह नया रडार किसी अन्य क्षेत्र से लाकर तैनात करना पड़ता है, जिसमें काफी समय और संसाधन लगते हैं. जेनजेन जोन्स के अनुसार THAAD सिस्टम एक बड़े क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम होता है, लेकिन इसे प्रभावी बनाने के लिए इसे अन्य एयर डिफेंस सिस्टम जैसे पैट्रियट के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अलग-अलग प्रकार के खतरों जैसे बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन से बेहतर सुरक्षा मिल सके.
तेहरान टाइम्स ने अपने X पोस्ट में चीनी सैटेलाइट इमेज का हवाला देते हुए बताया है कि तेहरान के हमले में अमेरिकी बेस तबाह हुआ है. (फोटो क्रेडिट: @TehranTimes79 के एक्स अकाउंट से साभार)
कम्यूनिकेशन और इंटेलिजेंस इक्विपमेंट भी निशाने पर
इससे पहले भी रिपोर्ट सामने आई थी कि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ऐसे हमले किए हैं जिनका लक्ष्य संचार, रडार और खुफिया उपकरणों को नुकसान पहुंचाना था. ऐसा माना जा रहा है कि ईरान की रणनीति अमेरिकी सैन्य नेटवर्क को कमजोर कर उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की है. सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कतर के उम्म दहल क्षेत्र में मौजूद एक प्रारंभिक चेतावनी रडार सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा है. यह रडार अमेरिकी तकनीक पर आधारित बताया जाता है और इसका उपयोग संभावित मिसाइल हमलों का पहले से पता लगाने के लिए किया जाता है.





