
चंद्रबाबू नायडू और प्रधानमंत्री मोदी
अपनी कम उम्र के जगन मोहन रेड्डी से दुर्भाग्यपूर्ण मिलने के पांच साल बाद तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू इस चुनाव में अपनी पार्टी को आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत की ओर ले जाते दिख रहे हैं। राज्य में भाजपा और जनसेना पार्टी भी उनके साथ गठबंधन में हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार टीडीपी 175 विधानसभा सीटों में दो सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है और 130 पर आगे है, जबकि उसकी सहयोगी भाजपा सात और जनसेना पार्टी 20 सीटों पर आगे हैं। निवर्तमान विधानसभा में टीडीपी के 23 सदस्य हैं। वहीं, कांग्रेस चुनाव के शुरुआती नतीजों में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी 25 में से 16 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। इसलिए वह केंद्र में मोदी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
गिरफ्तारी से लेकर आंध्र में नया अध्याय शुरू होने तक का सफर
पिछले साल सितंबर में उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू को स्किल डेवेलपमेंट घोटाले में राज्य की सीआईडी ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्होंने खुद को फिर से राजनीतिक रूप से साबित कर दिया। टीडीपी ने लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है और पार्टी कुल 25 में से 16 सीटों पर आगे है, जबकि उसकी सहयोगी भाजपा और जनसेना पार्टी 3 और दो सीटों पर आगे है। आंध्र प्रदेश में अलग-अलग समय पर 13 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान कई कीर्तिमान रखे गए हैं, एम.डी.यू. को आईटी क्षेत्र में अपने राज्य को अग्रणी स्थान पर ले जाने का श्रेय दिया जाता है, तथा वह राज्य ही केंद्र की राजनीति के भी कुशल रणनीतिकार नहीं रहे। हैं
2018 में एनडीए से तोड़ा था नाता
एम.डी.यू. ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे को लेकर मार्च, 2018 में एनडीए से नाता तोड़ लिया था, लेकिन वर्ष 2019 के विधानसभा व कांग्रेस चुनाव में मिली करारी हार ने उन्हें राजनीतिक नेपथ्य में धकेल दिया। ठीक छह साल बाद मार्च, 2024 में, श्री नायडू ने एनडीए में वापसी की और आंध्र प्रदेश में भाजपा, जनसेना के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही। गठबंधन के तहत प्रदेश की कुल 175 विधानसभा सीटों में से टीडीपी 144, जनसेना 21 और भाजपा 10 सीटों पर चुनाव लड़ी। राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन होने के बावजूद मुस्लिम आरक्षण जैसे मुद्दे पर एम.डी.ई. ने अपना अलग रुख रखा और मुस्लिम आरक्षण की पैरवी की। उन्होंने कहा, ”हम शुरू से ही मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं और यह जारी रहेगा।” हालांकि उनके घोषणापत्र में टीडीपी ने इस मुद्दे से दूरी बना ली।
आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा समय तक रहे मुख्यमंत्री
मोदी सरकार के बाद भले ही उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर मौके पर सराहना करते नजर आए हों, लेकिन पूर्व में उनके साथ रिश्ते सहज नहीं रहे। एम.डी.एम. ने 2002 में गुजरात दंगे के बाद मोदी का विरोध किया था। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर उप राष्ट्रपति के नाम पर कई कीर्तिमान भी हैं। वह आंध्र प्रदेश के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। वह कई कार्यकाल में 13 साल 247 दिन तक मुख्यमंत्री का पद संभाले हुए हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के वे ऐसे एकमात्र नेता हैं जो अविभाजित और विभाजन (आंध्र से अलग कर बिगड़ने का गठन) के बाद राज्य की बागडोर संभालेंगे। मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू की छवि एक आर्थिक सुधारक और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले नेता की है। उन्होंने हैदराबाद को साइबर सिटी के तौर पर विकसित किया। उन्होंने राज्य के आधारभूत ढांचे के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया, जिसमें नई राजधानी अमरावती का निर्माण भी शामिल है।
एनडीए के सहयोगी भी रहे उप राष्ट्रपति
राज्य ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में भी एम.डी.यू. का खासा दबदबा रहा है। वर्ष 1996 और 1998 के लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने संयुक्त मोर्चा का नेतृत्व किया। 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को समर्थन देने से पहले वह संयुक्त मोर्चा के सदस्य थे। मोदी राष्ट्र के प्रतिबद्ध भी रहे। एन. चंद्रबाबू नायडू का जन्म 20 अप्रैल 1950 को आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव नारावरिप्पल्ले में हुआ था। उनके पिता एन. खर्जुरा नायडू एक किसान थे और उनकी माता अम्मानम्मा एक गृहिणी थीं। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने शेषपुरम के स्कूल से प्राथमिक शिक्षा और चंद्रगिरि के सरकारी स्कूल से 10वीं की। इसके बाद 1972 में तिरुपति से श्री वेंकटेश्वर आर्ट्स कॉलेज से स्नातक और वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में शोधकार्य किया। वह अर्थशास्त्र में भी माहिर है।
सफर-
श्री एम. वेंकैया नायडू का उत्तराधिकार 1970 के दशक में शुरू हुआ और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई के दौरान वह श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय में छात्र संघ के नेता रहे। इसके बाद वह युवा कांग्रेस में शामिल हो गए और फिर आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) में चले गए। उन्होंने फिल्म अभिनेता और पार्टी के संस्थापक एनटी रामा राव की पुत्री भुवनेश्वरी से विवाह किया। एम.डी.बेटे पहली बार 1978 में आंध्र प्रदेश विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए और मंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 1995 में, वह अपने ससुर एन टी रामा राव के राजनीतिक तख्तापलट के बाद पहली बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। एम.डी.ई. 1999 में फिर से मुख्यमंत्री चुने गए और 2004 तक पद पर रहे। आंध्र प्रदेश का विभाजन कर तेजी का गठन करने के लिए 2014 के बाद वह तीसरी बार राज्य (आंध्र प्रदेश) के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से करारी हार के बाद टीडीपी सत्ता से बाहर हो गई थी।
राजा महाराजा उभरे
अब फिर आंध्र प्रदेश में टीडीपी ने हैरतअंगेज रूप से डबल प्रदर्शन करके सबको चौंका दिया है। टीडीपी ने जहां राज्य के विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ वापसी की है, वहीं कांग्रेस में भी शानदार प्रदर्शन किया है। कांग्रेस चुनाव परिणाम की बात करें तो टीडीपी 16 नतीजों पर लीड कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, चंद्रबाबू नायडू 9 जून को आंध्रप्रदेश के सीएम पद की शपथ ले सकते हैं। जगन मोहन रेड्डी पिछले विधानसभा चुनाव से दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से हारुन वाले एम.डी.ई. एक बार फिर से किंग मेकर बनकर उभरे हैं।
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