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देश का वो प्रधानमंत्री, जिससे पुलिस ने मांगी 35 रुपए की रिश्वत, फिर पूरा थाना हो गया सस्पेंड

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चौधरी चरण सिंह- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत : पीटीआई/फ़ाइल
देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह

नई दिल्ली: देश और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री रत्न चौधरी चरण सिंह की आज पुण्यतिथि है। वह 28 जुलाई, 1979 से 14 जनवरी, 1980 तक पद पर रहे। उनसे एक मशहूर किस्सा है, जब एक थानेदार ने उनसे 35 रुपये की रिश्वत ली और फिर पूरा थाना सस्पेंड हो गया।

वाकया क्या है?

यह वाक्या वर्ष 1979 का है। यूपी के इटावा जिले के उसराहार गांव में एक किसान ने बैल खरीद लिया और कहा कि वह मेरठ से अपने रिश्तेदारों के यहां बैल खरीदने आया है। इस दौरान रास्ते में उसकी जेब काट दी गई और पैसे चुरा लिए गए। इसकी शिकायत दर्ज करायें।

इस पर पुलिसकर्मियों ने किसान से ऊल-जलूल सवाल पूछे और बाद में एक कांस्टेबल ने शिकायत दर्ज कराई। कांस्टेबल के मना करने पर किसान मायूस हो गया। इसी दौरान एक सिपाही ने कहा कि अगर कुछ रिश्वत मिल जाए तो काम हो सकता है।

किसान ने रिश्वत देने की बात मान ली और 100 रुपए की रिश्वत पर मोलभाव करते-करते 35 रुपए में बात तय हुई। इसके बाद मुंशी ने अपनी शिकायत लिखी। मुंशी ने किसान से पूछा कि क्या आप साइन करेंगे या अंगूठा लगाएंगे। इस पर किसान ने अपनी जेब से एक मुहरबंद और कलम निकाला और मुहरबंद से कागज पर थप्पा लगा दिया। उस मुहर्रिक की छाप को भाग मुंशी दंग रह गया। कागज पर जो अंकित लगी थी वह ‘प्रधानमंत्री भारत सरकार’ की थी।

इसके बाद पूरे पुलिस अधीक्षक में हंगामा हो गया कि देश के प्रधानमंत्री चरण सिंह किसान होकर अपनी शिकायत लिखने आए और पुलिसकर्मियों ने उनसे ही रिश्वत मांग ली। इस घटना के बाद पूरा थाना सस्पेंड हो गया था।

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