Gangaram Hospital News: आमतौर पर छोटे बच्चे कुछ चीजें निगल लेते हैं और गले में फंसने पर उन्हें डॉक्टरों के पास ले जाना पड़ता है, लेकिन दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में एक अच्छी-खासी उम्र का मरीज पहुंचा गले में तेज दर्द और तकलीफ के साथ पहुंचा जो गलती से अपना ही डेंचर यानि नकली दांतों की पूरी प्लेट को निगल गया. यह प्लेट उसके गले से नीचे फूड पाइप में फंस गई थी.
सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज को देखने के बाद तुरंत एंडोस्कोपी तकनीक से जांच करने का फैसला किया और फिर इस क्रिटिकल केस में फूड पाइप में फंसी डेंचर एंडोस्कोपिक तकनीक और लेजर की मदद से सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया. सबसे खास बात रही कि मरीजों को बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी, वरना मरीज के लिए बहुत ज्यादा दिक्कत हो जाती.
यह मरीज गंभीर सांस लेने में तकलीफ और गले में तेज दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचा था.जांच में पता चला कि उसने गलती से अपनी डेंचर निगल ली थी, जो फूड पाइप और सांस की नली के जंक्शन के ठीक नीचे, क्रिकोफैरिंक्स हिस्से में फंस गई थी.इसके कारण मरीज को निगलने में कठिनाई और सीने में तेज दर्द हो रहा था.
इस दौरान मरीज की इमेजिंग जांच में सामने आया कि डेंचर फूड पाइप के संवेदनशील हिस्से में मजबूती से फंसी हुई थी और उसमें लगे तेज धातु के क्लैस्प (क्लिप) अन्न नली को नुकसान पहुंचा सकते थे.
मामले को चुनौतीपूर्ण बताते हुए गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट और चेयरमैन, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड पैनक्रियाटोबिलियरी साइंसेज डॉ.अनिल अरोड़ा ने कहा, ‘डेंचर बड़ा उपकरण है और यह हमारे सामने आए सबसे कठिन मामलों में से एक था. पारंपरिक तरीकों से इसे निकालने में गंभीर चोट का खतरा था.’
उन्होंने आगे बताया कि जब शुरुआती प्रयास सफल नहीं हुए, तो डॉक्टरों ने उन्नत तकनीक अपनाई. एंडोस्कोपिक गाइडेंस के तहत लेजर बीम की मदद से डेंचर को अन्न नली के अंदर ही छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा गया, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से अलग किया जा सके.इसके बाद ऊपरी अन्न नली में एक प्रोटेक्टिव ओवरट्यूब डाली गई, जिससे तेज टुकड़ों से ऊतकों को सुरक्षित रखते हुए हर हिस्से को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया.
वहीं डॉ. श्रीहरि अनिखिंदी ने कहा कि लेजर की मदद से डेंचर को सुरक्षित रूप से काटकर निकालना संभव हुआ. जबकि ओवरट्यूब ने अन्न नली को सुरक्षा दी, जिससे बिना ओपन सर्जरी के यह प्रक्रिया पूरी की जा सकी.
डॉक्टरों के अनुसार, इस उन्नत तकनीक से मरीज को बड़ी सर्जरी के जोखिम और जटिलताओं से बचाया जा सका.





