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The Bone Church: क्या आप किसी ऐसे चर्च में जाकर प्रर्थना करना चाहेंगे जहां चारों तरह हजारों लोगों के कंकाल हो? हम किसी फिल्म या भूत-प्रेत की कहानी के डरावने चर्च के बारे में नहीं बात कर रहे हैं. वास्तव में एक ऐसा चर्च है जहां झूमर से लेकर सजावट की हर चीज मानव कंकाल से बनी है. इसे अस्थि कलश और चर्च ऑफ बोन्स भी कहा जाता है.
सेडलेक ऑस्युअरी चर्च जिसे बोन चर्च या अस्थि कलश भी कहा जाता है. ये देखने में बाहर से दूसरे चर्च की तरह नॉर्मल ही लगता है. लेकिन इसके अंदर जाते ही आखों पर यकिन करना मुश्किल हो जाता है. ये चर्च चेक रिपब्लिक के कुटना होरा शहर के पास सेडलेक नाम की जगह पर स्थित है.

इस चर्च में जैसे ही आप अंदर जाते हैं, कहानी पूरी तरह बदल जाती है. यहां आपको वो हर चीज दिखायी देगी जो दूसरे नॉर्मल चर्च में होते हैं,लेकिन मानव कंकाल से बने हुए.सोचने में ही ये बहुत डरावना लगता है. लेकिन यहां जाने वाले लोगों को कहना है यहां डर नहीं शांति महसूस होती है.

चर्च के अंदर सबसे हैरान कर देने वाली चीज है बीच में लटका हुआ बड़ा सा झूमर. यह झूमर पूरी तरह इंसानों की हड्डियों से बना है और कहा जाता है कि इसमें मानव शरीर की हर एक हड्डी शामिल है.इसके अलावा श्वार्ज़ेनबर्ग परिवार का कोट ऑफ आर्म्स पूरी तरह मानव हड्डियों से बनाया गया है.
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इस अनोखे चर्च की कहानी साल 1278 से शुरू होती है, बोहेमिया के राजा ने सेडलेक के सिस्टरशियन मोनेस्टरी के हेड एबट हेनर को यरुशलम भेजा. जब वे वापस लौटे तो अपने साथ मिट्टी भरा एक घड़ा लेकर आए. ये उसी जमीन की मिट्टी थी, जहां ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था.

हेनरी ने उस पवित्र मिट्टी को सेडलेक के कब्रिस्तान में फैला दिया.जैसे ही यह खबर फैली, दूर-दूर से लोग सेडलेक में दफन होने की इच्छा करने लगे. कई लोग तो अपने रिश्तेदारों को भी यहां दफनाने लाए. धीरे-धीरे यह जगह एक पवित्र कब्रिस्तान बन गयी, जिसे समय के साथ बार-बार बड़ा करना पड़ा.

कुछ समय बाद जब यूरोप में भयानक प्लेग फैला, जिसमें हजारों लोग मारे गए.उस दौर में भी बहुत से लोग मरने से पहले सेडलेक आना चाहते थे. बहुत कम समय में यहां हजारों शव दफन हो गए.

15वीं सदी में कब्रिस्तान के पास एक गोथिक चर्च बनाया गया.इसके नीचे के हिस्से को हड्डियां रखने के लिए इस्तेमाल किया गया, जिसे ऑस्युअरी कहा जाता है. शुरुआत में एक आधे अंधे भिक्षु ने हड्डियों को जमा कर व्यवस्थित किया, लेकिन वे सैकड़ों साल तक वहीं पड़ी रहीं.

फिर 1870 में एक लोकल लकड़ी के कारीगर फ्रांतिशेक रिंट को यहां कि हड्डियों को अरेंज करने का काम दिया गया.उसने हड्डियों को साफ किया, उन्हें कला में बदला और चर्च को ऐसा रूप दिया जो आज पूरी दुनिया को चौंका देता है. करीब 40,000 लोगों की हड्डियां हैं. ये जगह टूरिस्ट के लिए खुली है. यहां आप टिकट लेकर अंदर जा सकते हैं.





