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Telangana One Student School: तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के नरपननीपल्ली गांव में एक ऐसा सरकारी स्कूल है, जहाँ केवल एक छात्रा, 9 वर्षीय कीर्तना, पढ़ाई करती है. कभी 70 छात्रों वाले इस स्कूल को निजी स्कूलों के क्रेज ने खाली कर दिया, लेकिन कीर्तना के पिता पुलैया ने स्कूल को बंद होने से बचाने के लिए अपनी बेटी का दाखिला यहीं रखा. सरकार इस एक बच्ची की शिक्षा पर सालाना 12.84 लाख रुपये खर्च कर रही है, जिसमें शिक्षिका उमा का वेतन और स्कूल का रखरखाव शामिल है. शिक्षिका हर दिन पूरी निष्ठा के साथ कीर्तना को चौथी कक्षा का पाठ पढ़ाती हैं.
Telangana One Student School: आधुनिक युग में जहाँ स्कूल हज़ारों बच्चों की भीड़ और बड़े आलीशान परिसरों के लिए जाने जाते हैं. वहीं तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले का नरपननीपल्ली गांव एक अलग ही मिसाल पेश कर रहा है. यहाँ के सरकारी प्राथमिक स्कूल में सुबह की प्रार्थना और क्लास की रौनक सिर्फ एक बच्ची से शुरू होकर उसी पर खत्म हो जाती है. यह कहानी है 9 वर्षीय कीर्तना की. जो वर्तमान में इस पूरे स्कूल की इकलौती छात्रा है. स्कूल के सूने बरामदों में कीर्तना की पढ़ाई के प्रति लगन शिक्षा के अधिकार की एक जीवंत तस्वीर पेश करती है.
एक समय था जब इस स्कूल में 70 से अधिक बच्चे उत्साह के साथ पढ़ा करते थे. लेकिन निजी स्कूलों की चकाचौंध और अंग्रेजी माध्यम के प्रति बढ़ते आकर्षण ने धीरे-धीरे स्कूल को खाली कर दिया. गांव के लगभग सभी अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला पास के शहरों या निजी संस्थानों में करा दिया. लेकिन कीर्तना के पिता पुलैया ने एक साहसी और अलग रास्ता चुना. उनका दृढ़ विश्वास है कि यदि उनके गांव का यह इकलौता सरकारी स्कूल बंद हो गया. तो आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा का यह दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो सकता है. इसी संकल्प के साथ उन्होंने कीर्तना को यहीं पढ़ाने का फैसला किया है.
एक छात्रा और लाखों का सरकारी खर्च
हैरानी की बात यह है कि केवल एक छात्रा होने के बावजूद सरकार और शिक्षिका उमा की प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आई है. शिक्षिका हर दिन समय पर स्कूल पहुँचती हैं और कीर्तना को उतनी ही गंभीरता से पढ़ाती हैं. जैसे वे किसी भरी हुई कक्षा को पढ़ा रही हों. आंकड़ों पर गौर करें तो इस एक बच्ची की शिक्षा और स्कूल को जीवित रखने पर सरकार सालाना लगभग 12.84 लाख रुपये खर्च कर रही है. इसमें शिक्षिका का वेतन. रसोइया और अन्य रखरखाव के खर्च शामिल हैं. यह स्थिति जापान के उस मशहूर रेलवे स्टेशन की याद दिलाती है. जो सिर्फ एक छात्रा की पढ़ाई पूरी होने तक चालू रखा गया था.
भविष्य की उम्मीद और प्रशासन की पहल
कीर्तना अभी चौथी कक्षा में है और वह अपनी टीचर की लाडली होने के साथ-साथ इस स्कूल की ब्रांड एंबेसडर भी बन चुकी है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अकेले पढ़ने से बच्चे के सामाजिक विकास पर असर पड़ सकता है. लेकिन प्रशासन अब इस स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ‘वी कैन लर्न’ जैसे विशेष कार्यक्रम चला रहा है. प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि कीर्तना और उसके पिता का यह संघर्ष रंग लाएगा. और अगले शिक्षा सत्र तक यहाँ फिर से बच्चों की रौनक लौटेगी. फिलहाल नरपननीपल्ली का यह स्कूल पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक कहानी बना हुआ है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें





