Last Updated:
Swami Vivekananda Statue Seattle: अमेरिका के सिएटल शहर में वेस्टलेक स्क्वायर पर स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है. यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी शहर प्रशासन ने विवेकानंद की प्रतिमा लगाई है. अमेजन मुख्यालय के पास स्थित यह स्थान अब भारतीय संस्कृति का प्रतीक बन गया है और भारत-अमेरिका के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देगा.
अमेरिका के सिएटल शहर में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज किया गया है. शहर के व्यस्त और प्रमुख इलाके वेस्टलेक स्क्वायर में स्वामी विवेकानंद की आदमकद कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है. यह सिर्फ एक प्रतिमा नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक मंच पर सम्मान है. सिएटल जैसे आधुनिक और तकनीकी रूप से अग्रणी शहर के बीचोंबीच विवेकानंद की उपस्थिति यह दिखाती है कि आध्यात्म और आधुनिकता साथ-साथ चल सकते हैं. यह दृश्य अपने आप में अनोखा है और आने वाले समय में यह स्थान भारतीय संस्कृति का प्रतीक केंद्र बन सकता है.

यह स्थापना इसलिए भी खास है क्योंकि यह अमेरिका में किसी नगर प्रशासन द्वारा स्थापित स्वामी विवेकानंद की पहली प्रतिमा है. सिएटल की महापौर केटी विल्सन और भारत के महावाणिज्य दूत ने संयुक्त रूप से इसका अनावरण किया. इस मौके पर कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. यह आयोजन भारत और अमेरिका के सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. सिएटल शहर ने इस पहल के जरिए अपनी समावेशी सोच को दुनिया के सामने रखा है.

वेस्टलेक स्क्वायर जहां यह प्रतिमा स्थापित की गई है, शहर का सबसे व्यस्त स्थान माना जाता है. यहां रोजाना लाखों लोग आते-जाते हैं. आसपास अमेजन मुख्यालय, कन्वेंशन सेंटर और मोनोरेल जैसी प्रमुख जगहें मौजूद हैं. ऐसे में विवेकानंद की प्रतिमा को देखने वाले लोगों की संख्या भी बड़ी होगी. यह स्थान अब केवल एक सार्वजनिक चौक नहीं रहेगा, बल्कि सांस्कृतिक संवाद का केंद्र भी बनेगा.
Add News18 as
Preferred Source on Google

इस प्रतिमा का निर्माण भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमार कुमावत ने किया है. उन्होंने दुनिया भर में 80 से ज्यादा देशों में 600 से अधिक मूर्तियां बनाई हैं. उनकी कला में भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है. सिएटल में स्थापित यह प्रतिमा भी उसी परंपरा का विस्तार है. यह न सिर्फ कला का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती देती है.

स्वामी विवेकानंद ने 19वीं सदी में भारत की आध्यात्मिक विचारधारा को पश्चिमी दुनिया तक पहुंचाया था. उन्होंने वेदांत और योग के सिद्धांतों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया. उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और दुनिया भर में लोगों को प्रेरित करते हैं. सिएटल में उनकी प्रतिमा लगना इस बात का संकेत है कि उनके संदेश की गूंज आज भी उतनी ही मजबूत है.

इस आयोजन में सिएटल के अलावा आसपास के कई शहरों के मेयर और सामुदायिक नेता भी शामिल हुए. भारतीय मूल के लोगों ने भी बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में भाग लिया. यह दृश्य भारत-अमेरिका के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है. इस तरह के आयोजन दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर जुड़ाव को और गहरा करते हैं.

इस प्रतिमा की स्थापना के बाद सिएटल की पहचान में एक नया अध्याय जुड़ गया है. अब यह शहर सिर्फ तकनीकी नवाचार के लिए नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विविधता के लिए भी जाना जाएगा. स्वामी विवेकानंद की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी और उन्हें यह याद दिलाएगी कि आध्यात्म और मानवता का संदेश समय और सीमाओं से परे होता है.





