नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोई भी सरकारी स्पेशल कोर्ट के सामने पेश हुआ हो, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उसे गिरफ्तार करने के लिए संबंधित कोर्ट की खुली ले जाएगी।
जस्टिस अभय ओका और जस्टिस जया भुयान की बेंच ने यह आदेश पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को दिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने चार प्री-अरेस्ट बेल याचिका को खारिज कर दिया था। यह केस ग्राउंड फ्लोरिडा से नीचे है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कुछ रेवेन्यूज़ का निर्माण किया गया था।
ईडी के 3 दलाल पर
- मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान यदि किसी शहरी का अपराध नहीं छोड़ा गया है और विशेष अदालत ने उसे समन भेजा है। उसके बाद अगर वह नेशनल कोर्ट में पेश होता है तो उसके लिए पीएमएलए एक्ट के सेक्शन 45 की कड़ी में दाखिला लेना जरूरी नहीं है।
- कोर्ट समन के बाद अगर बायोलॉजिकल पेशी होती है तो उसके लिए ईडी को स्पेशल कोर्ट में आवेदन प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
- अदालत ने एक एजेंसी को कस्टडी देवी से कहा, जब वह दोषी होगी कि कस्टडी में पूछताछ जरूरी है।
पीएमएलए का खंड 19 क्या है?
अदालत के फैसले का मतलब यह है कि जब ईडी ने उस उत्पाद के खिलाफ शिकायत भेजी थी, जिसकी जांच के दौरान गिरफ्तारी नहीं हुई थी। टैब पीएमएलए एक्ट की धारा 19 के तहत मिली स्पेशल पावर्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। धारा 19 में कहा गया है कि अगर ईडी को किसी भी तरह के आपराधिक अपराध में शामिल होने का शक है तो वह उसे गिरफ्तार कर सकती है।
पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रश्न किया था
इस मामले पर पिछली समीक्षा 30 अप्रैल को हुई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि अगर कोर्ट ने पीएमएलए के तहत मैसाचुसेट्स को समन भेजा है और वह पेश हुआ है तो क्या सीआरपीसी के तहत गारंटी के लिए आवेदन किया जा सकता है?
